अशोक भाटिया
भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही बांग्लादेश की यूनुस सरकार को लगता था कि पाकिस्तान का साथ पाकर वह सफल हो जाएगा। लेकिन, भारत ने ऐसा दांव खेला कि बिना कोई कदम उठाए या एक भी शब्द बोले बांग्लादेश की रीढ़ ही तोड़ दी। हुआ यूं कि बांग्लादेश जिस उद्योग के दम पर सांसें ले रहा था, वही उद्योग अब अपनी आखिरी सांस गिन रहा है। इसकी वजह प्रत्यक्ष न सही लेकिन परोक्ष रूप से भारत को ही बताया जा रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के सस्ते धागों के जाल में उलझकर बांग्लादेश कब बर्बादी के मुहाने पर खड़ा हो गया, उसे आभास भी नहीं हुआ।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कपड़ा उद्योग पर अब गंभीर संकट के बादल छाने लगे हैं। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अगले महीने कई कारखानों पर ताला लगाने की नौबत आ गई है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने घोषणा की कि अगर जनवरी अंत तक यार्न के ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा बहाल न हुई तो 1 फरवरी से देश की सभी स्पिनिंग यूनिटें उत्पादन बंद कर देंगी। राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) ने वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिश पर बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यह सुविधा निलंबित कर दी।
सरकार का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू मिलें तबाह हो रही हैं। गारमेंट निर्यातक भारत से कॉटन यार्न (78 प्रतिशत) और चीन से पॉलिएस्टर मंगा रहे हैं, जो स्थानीय उत्पाद से सस्ता और बेहतर है। 2025 में 70 करोड़ किलो यार्न आयात पर 2 अरब डॉलर खर्च हुए। पिछले 3-4 माह के गैस संकट ने हालात बिगाड़ दिए। अनियमित आपूर्ति, ऊंची कीमतों से उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत गिर गई। उद्योग को 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, वहीं मिल मालिकों को सब्सिडी और आर्थिक पैकेज का इंतजार है।
BTMA चेयरमैन सलीम रहमान ने कहा, ‘भारतीय यार्न से बाजार डंप हो गया। 12,000 करोड़ टका का स्टॉक पड़ा है। 50 से ज्यादा मिलें बंद, हजारों बेरोजगार।’ एसोसिएशन की मांगें स्पष्ट हैं कि 10-30 काउंट कॉटन यार्न पर ड्यूटी-फ्री आयात समाप्त, गैस पर सब्सिडी व नियमित आपूर्ति, VAT में छूट, बैंक ऋणों पर ब्याज राहत, सरकार से संवाद। इस कदम से 10 लाख नौकरियां खतरे में हैं। अंतरिम सरकार को चेतावनी दी गई, लेकिन VAT राहत नहीं मिली।
मिलर्स और बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के बीच विवाद तेज। मिलर्स दावा करते हैं कि घरेलू क्षमता मांग पूरी कर सकती है। भारत के यार्न निर्यातक अमित सोती ने कहा, ‘बॉन्डेड सुविधा हटने से बांग्लादेशी गारमेंट्स प्रभावित होंगे।’ गौरतलब है कि कपड़ा क्षेत्र बांग्लादेश अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, 80 प्रतिशत निर्यात और 40 लाख रोजगार इसी क्षेत्र से लोगों को मिलता है। गैस संकट, आयात निर्भरता और नीतिगत अनिश्चितता ने इसे कमजोर किया। अगर 1 फरवरी को मिलों पर ताले लगे तो आर्थिक मंदी और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।
ज्ञात हो कि बांग्लादेश का सबसे बड़ा उद्योग कपड़ा है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। जारा और एचएनएम जैसे ब्रांड भी बांग्लादेश से बनकर जाते हैं, तब दुनिया पहनती है। बांग्लादेश अकेले हर साल करीब 47 अरब डॉलर के रेडीमेड कपड़े दुनिया को निर्यात करता है। इन कपड़ों को बनाने के लिए बांग्लादेश यार्न यानी धागे का आयात भारत से करता है। मतलब सीधा कारोबार, भारत से सस्ते धागे खरीदो, उससे कपड़े बनाओ और दुनिया को बेच दो। लेकिन, बांग्लादेश को इन सस्ते धागों की ऐसी लत पड़ी कि आज उसी धागे में उलझकर उसका अरबों डॉलर का कारोबार डूबने की कगार पर पहुंच गया है। आलम ये है कि उसके मिल मालिकों ने सरकार से साफ कहा है कि अगर कुछ नहीं किया तो 1 फरवरी से सारी कपड़ा मिलें बंद हो जाएंगी।
बांग्लादेश में धागे का लोकल उत्पादन उतना नहीं होता, जितना उसके कपड़ा उद्योग को जरूरत है। लिहाजा वह भारत और चीन से सस्ते धागे का आयात करता है। भारत का धागा अच्छी क्वालिटी और सस्ता होने के नाते ज्यादा खरीदता है। उसे प्रति किलोग्राम 3 से 5 फीसदी सस्ता भी पड़ता है। साल 2025 में उसने 70 करोड़ किलोग्राम धागा आयात किया, जिसमें से 78 फीसदी यानी करीब 2 अरब डॉलर के धागे सिर्फ भारत से मंगाए गए हैं। इस आयात की बड़ी वजह यह है कि वहां बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत धागा आयात करने पर खरीदारों को कोई आयात शुल्क नहीं देना पड़ता है।
भारत से सस्ते धागे का आयात इतना ज्यादा हुआ कि बांग्लादेश की लोकल मिलों के पास करीब 10 हजार करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया, जिसे खरीदने वाला कोई नहीं है। इस स्टॉक की वजह से देश में 50 से ज्यादा मिलें बंद हो चुकी हैं और उत्पादन की क्षमता भी 50 फीसदी कम हो गई है। इस संकट की वजह से अब तक हजारों नौकरियां जा चुकी हैं। बांग्लादेश में पिछले 4-5 महीने से गैस संकट भी चल रहा है, जिससे कर्ज और लोन चुकाने का संकट बढ़ गया। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर भारत से धागे की डंपिंग बंद नहीं हुई तो 1 फरवरी, 2026 से उत्पादन ठप कर देंगे।
एक तरफ तो बांग्लादेश के कपड़ा निर्यातक सस्ते धागे के आयात के पक्ष में हैं, क्योंकि लोकल धागा महंगा और क्वालिटी में भी अच्छा नहीं होता। अगर आयात बंद हुआ तो लागत बढ़ेगी और उत्पादन में देरी आएगी जिससे ऑर्डर्स में कमी आ सकती है। अगर सरकार के कदम से आयात रुकता है तो उत्पादकों को ऊंची कीमतों पर लोकल धागा खरीदना पड़ेगा। इससे उनकी प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा। छोटी और मझोली आकार वाली फैक्ट्रियां पहले 10-20 टन धागे का ऑर्डर 2 दिन में डिलीवर करा लेती थीं, लेकिन अब इसमें देरी होगी और उत्पादन अटकेगा।
गौरतलब है कि बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर भारत की हालिया कार्रवाइयों (जैसे लैंड बॉर्डर से आयात में सख्ती और व्यापार बाधाएं) का गहरा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इससे बांग्लादेशी परिधान (RMG) की विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है, उत्पादन लागत बढ़ सकती है, और कच्चा माल (सूती धागा) महंगा होने से वहां की स्पिनिंग मिलें बंद होने की कगार पर आ सकती हैं।
बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री (वस्त्र उद्योग) गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। घरेलू टेक्सटाइल मिलर्स ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जनवरी के अंत तक यार्न (कपड़ा बुनाई में उपयोग होने वाले धागे) के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट (बिना किसी शुल्क के आयात) की सुविधा बहाल नहीं करती, तो 1 फरवरी से देशभर की स्पिनिंग यूनिट्स (धागे की कताई) का उत्पादन ठप कर दिया जाएगा।
यह संकट तब और गहरा गया जब बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) को बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत इम्पोर्टेड यार्न पर ड्यूटी-फ्री सुविधा निलंबित करने की सिफारिश की। सरकार का मानना है कि ड्यूटी-फ्री यार्न के इम्पोर्ट से घरेलू स्पिनिंग मिलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, गारमेंट निर्माता वर्षों से भारत से कॉटन यार्न और चीन से पॉलिएस्टर यार्न आयात करते रहे हैं, क्योंकि ये सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हैं। घरेलू मिलर्स का कहना है कि भारत और चीन से बड़े पैमाने पर यार्न आयात करने के कारण स्थानीय उद्योग गहरे वित्तीय संकट में फंस गए हैं।
वहीँ संकट ने मिलर्स और गारमेंट निर्यातकों के बीच टकराव बढ़ा दिया है। मिलर्स का दावा है कि घरेलू उद्योग पूरी मांग पूरी कर सकता है, जबकि बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) का कहना है कि स्थानीय 10-30 काउंट कॉटन यार्न भारतीय यार्न से महंगा है और गुणवत्ता में भी पीछे है। निर्यातकों के अनुसार, ड्यूटी-फ्री आयात पर रोक से उत्पादन लागत बढ़ेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
भारत के यार्न निर्यातक अमित सोती ने कहा कि बॉन्डेड सुविधा खत्म होने से बांग्लादेशी निर्यात उद्योग पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग- जो देश में रोजगार और फॉरेन रिजर्व का प्रमुख स्रोत है, एक बहुत नाजुक मोड़ पर खड़ा है। यदि वहां की सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं।





