भजनलाल सरकार का तीसरा बजट: भरोसे की कसौटी और अच्छे भविष्य का संकेत होगा

Bhajan Lal government's third budget: A test of trust and a sign of a bright future

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

देश के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा आगामी 11 फरवरी पेश किया जाने वाला वर्ष 2026-27 का बजट केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं होगा,बल्कि राज्य सरकार के कार्यकाल का तीसरा और निर्णायक बजट माना जा रहा है। राज्य की उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दिया कुमारी वार्षिक बजट राज्य विधानसभा के पटल पर पेश करेगी।

सत्ता में आने के बाद पहला बजट आधार तैयार करने का होता है, दूसरा निरंतरता का संदेश देता है, लेकिन तीसरा बजट वह मोड़ होता है जहां सरकार को यह दिखाना होता है कि उसके वादे जमीन पर कितने उतरे और आगे की दिशा क्या होगी? राजनीतिक दृष्टि से तीसरा बजट सरकार की विश्वसनीयता की परीक्षा होता है। पहले दो बजटों में की गई घोषणाओं का आकलन अब जनता करने लगती है। किसान, युवा, कर्मचारी और व्यापारी यह देखना चाहते हैं कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रहीं या उनका वास्तविक लाभ मिला है। यही कारण है कि इस बजट में सरकार पर अपेक्षाओं का दबाव पहले से कहीं अधिक है। कुल मिलाकर, भजनलाल सरकार का तीसरा बजट राज्य सरकार के अब तक के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड और भविष्य का रोडमैप दोनों ही है। जनता इस बजट में यह देखना चाहती है कि सरकार अनुभव के साथ परिपक्व हुई है। फिर यदि घोषणाएं जमीनी हकीकत से जुड़ी रहीं, तो यह बजट सरकार के लिए भरोसे की नींव मजबूत करेगा।

राजस्थान के इस बजट को “बढ़ता राजस्थान –निखरता राजस्थान” के थीम पर आधारित बताया जा रहा है, जिसमें राज्य सरकार की प्राथमिकता किसान, युवा, महिला, रोजगार, जल-संकट समाधान और आधारभूत विकास जैसे प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विभिन्न जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से अपने संवाद के ज़रिये बजट की तैयारियों पर फोकस जारी रखा है, ताकि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप बजट घोषणाएं पेश की जा सकें। केंद्रीय बजट 2026-27 में केंद्रीय करों से राजस्थान को इस बार ₹90,445 करोड़ की हिस्सेदारी मिली है जोकि पिछले वर्ष की यानी पिछले बजट (2025-26) तुलना में इस बार लगभग ₹6,500–₹7,000 करोड़ अधिक है। इस प्रकार केंद्रीय कर हिस्सेदारी के रूप में राज्य को अधिक धन प्राप्त होगा। आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार राजस्थान की कुल राशि बढ़ी है लेकिन हिस्सेदारी का प्रतिशत थोड़ा घटा है।पिछले बजट में राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 6.026% थी, जो इस बार 5.926 प्रतिशत रह गई है। कुल बढ़ोतरी का कारण केंद्रीय कर संग्रह में वृद्धि और राज्यों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की नीति है। केंद्र से मिलने वाली धनराशि राजस्थान के राजस्व हस्तांतरण का बड़ा हिस्सा होती है, जिसे राज्य अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और सामाजिक खर्चों के लिए उपयोग करता है।इस वर्ष ₹90,445 करोड़ का आवंटन पिछले वर्ष के मुकाबले वित्तीय मजबूती को बढ़ाता है, जिससे राज्य को योजनाओं और विकास प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक फंड मिलेगी। आर्थिक रूप से राज्य का आने वाला बजट सरकार की मध्यम अवधि की रणनीति को स्पष्ट करता है। अब सरकार के पास प्रशासनिक अनुभव भी है और वित्तीय सीमाओं की स्पष्ट समझ भी। ऐसे में यह बजट बताएगा कि संसाधनों का आवंटन किस प्राथमिकता के साथ किया जाएगा।क्या कृषि और जल संकट को सर्वोच्च स्थान मिलेगी या रोजगार और औद्योगिक निवेश को नई गति दी जाएगी।

भजन लाल सरकार के तीसरे बजट से ग्रामीण राजस्थान को खास उम्मीदें हैं। सूखा, जल संकट और कृषि लागत के दबाव के बीच सरकार से अपेक्षा है कि वह सिंचाई परियोजनाओं, जल संरक्षण और पशुपालन को मजबूत आधार दे। यदि इस बजट में इन क्षेत्रों के लिए ठोस प्रावधान होते हैं, तो इसे सरकार के ग्रामीण एजेंडे की मजबूती के रूप में देखा जाएगा। इसके साथ ही बेरोजगारी सरकार के सामने सबसे संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। तीसरा बजट इस सवाल का जवाब देगा कि सरकार रोजगार को लेकर गंभीर है और युवाओं के लिए अवसर सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ने का इरादा रखती है। सरकारी भर्तियों, कौशल विकास और निजी निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां इस बजट की सफलता तय करेंगी।

कोरोना के कालखंड के गुजर जाने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। तीसरे बजट में यदि जिला अस्पतालों, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता है, तो यह सरकार के सामाजिक सरोकार को दर्शाएगा। वहीं शिक्षा में निवेश भविष्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करता है। भजन लाल सरकार का यह बजट केवल वर्तमान वित्तीय वर्ष तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें की गई घोषणाएं आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करेंगी।

हर वर्ष की तरह इस बार भी राजस्थान का बजट प्रदेश के लाखों निवासियों के लिए उम्मीदों की नई किरण लेकर आ रहा है। किसान, युवा, महिलाएं, कर्मचारी, व्यापारी, उद्योगपति और आम उपभोक्ता आदि सभी की निगाहें सरकार के बजटीय प्रावधानों पर टिकी हैं। महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट, जल और बिजली की उपलब्धता जैसे मुद्दे जहां आमजन की प्राथमिकता में हैं, वहीं आधारभूत ढांचे के विकास, शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं और निवेश को बढ़ावा देने की अपेक्षा भी मजबूत है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले किसानों को इस बजट से विशेष राहत की आस है। मानसून की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और फसल के उचित मूल्य का संकट किसानों के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में किसान संगठनों की मांग है कि सरकार कृषि ऋण पर ब्याज में राहत, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, माइक्रो-इरिगेशन को प्रोत्साहन और फसल बीमा योजना को और प्रभावी बनाए। इसके साथ ही पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। युवा वर्ग के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है। प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी कर रोजगार की तलाश में निकलते हैं। ऐसे में बजट से सरकारी भर्तियों में तेजी, कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने की उम्मीद है। आईटी, पर्यटन, खनन, अक्षय ऊर्जा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। युवाओं को यह भरोसा है कि बजट में स्वरोजगार योजनाओं के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे।महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर भी बजट से बड़ी अपेक्षाएं जुड़ी हैं। स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता, महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन, पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार तथा बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले कदमों पर सभी की नजर है। खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए साधन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद भी इस बजट से की जा रही है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, शिक्षकों की भर्ती, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा तथा उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार के लिए बजट बढ़ाने की मांग है। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पतालों को सुदृढ़ करने, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की अपेक्षा जताई जा रही है। शहरी क्षेत्रों के निवासी भी बजट को लेकर खासे उत्साहित हैं। पेयजल संकट, यातायात जाम, आवास और स्वच्छता जैसी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को गति देने, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने और कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की मांग लगातार सामने आ रही है।

व्यापार और उद्योग जगत की नजरें भी बजट पर टिकी हैं। राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए सरल नीतियां, करों में राहत और बुनियादी ढांचे में सुधार की अपेक्षा है। विशेष रूप से पर्यटन, पत्थर उद्योग, हस्तशिल्प और एमएसएमई सेक्टर के लिए प्रोत्साहन पैकेज की मांग उद्योग संगठनों द्वारा की जा रही है। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राजस्थान का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने वाला माध्यम है। आमजन की उम्मीद है कि सरकार संतुलित और जनहितकारी बजट प्रस्तुत करेगी, जो विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय को भी प्राथमिकता देगी।

कुल मिलाकर, राजस्थान का बजट जनता के लिए उम्मीदों का दस्तावेज है। प्राथमिकता क्रम साफ दिखाई दे रहा है पहले कृषि, पानी और रोजगार, फिर स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला कल्याण और उसके बाद शहरी विकास एवं उद्योग। बजट की सफलता इस बात पर निर्भर है कि घोषणाएं धरातल पर उतरकर आमजन के जीवन में बदलाव लाती हैं। अब देखना यह है कि सरकार इन अपेक्षाओं पर खरी उतर प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे ले जायेगी।