भिवाड़ी केमिकल फैक्ट्री में अग्निकांड : केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था के पुनर्मूल्यांकन का अवसर है

Bhiwadi Chemical Factory Fire: Not Just an Accident, But an Opportunity to Re-evaluate Industrial Safety

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली के अन्तर्गत शुमार राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी में सोमवार 16 फरवरी 2026 को एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। यह अग्निकांड भिवाड़ी-खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट जी-1/118 B में सुबह लगभग 9:30 बजे शुरू हुआ, जब फैक्ट्री के अंदर लगभग 20-25 मजदूर कार्यरत थे। आग इतनी तीव्र थी कि कई मजदूर आग की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कई मजदूरों की जलकर मौत हो गई है और कई अन्य घायल हैं। राजस्थान विधानसभा में भी भिवाड़ी अग्निकांड का मुद्दा गूंजा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है और अधिकारियों को तुरंत मदद, राहत और इलाज की सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिये। जिला प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है और घटना के कारणों एवं जवाबदेही की समीक्षा के आदेश जारी किये हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सभी फैक्ट्रियों की जांच शुरू हो गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनमें सभी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है। किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर दी है और फोरेंसिक टीम को साक्ष्य जुटाने तथा विस्फोट और आग के वास्तविक कारणों की जांच के लिये भेजा है। कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक नेताओं ने राज्य सरकार से इस तरह के दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिये मजबूत नियम और निगरानी प्रणाली लागू करने की मांग की है,ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकी जा सकें।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस नियंत्रण कक्ष ने दमकल और बचाव दलों को तुरंत जानकारी दी। राज्य औद्योगिक विकास निगम (रीको) और खुशखेड़ा दोनों फायर स्टेशन से लगभग 6 से अधिक दमकल गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं। आग को लगभग डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद नियंत्रित किया गया। दमकल कर्मी, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर बचाव अभियान जारी रखा और फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। आसपास की अन्य फैक्ट्रियों को तुरंत खाली करवा दिया गया और बिजली आपूर्ति भी कुछ समय के लिये रोकी गई, ताकि अतिरिक्त क्षति को रोका जा सके।शवों की पहचान और पोस्ट-मॉर्टम प्रक्रिया के लिये प्रयास जारी हैं तथा घायल लोगों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

आग की शुरुआत के कारणों पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार फैक्ट्री में रासायनिक पदार्थ और कार्ड बोर्ड के भण्डार थे, जिससे आग बेहद तेज़ी से फैल गई। आग शुरू होने से पहले जोरदार धमाके की आवाज़ भी सुनी गई, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी गैस सिलेंडर या विस्फोटक सामग्री ने आग की तीव्रता बढ़ाई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि यह फ़ैक्ट्री केवल “केमिकल” फैक्ट्री नहीं बल्कि बिना लाइसेंस चलने वाला अवैध पटाखा/विस्फोटक सामग्री का निर्माण स्थल भी हो सकती है, जो सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। इन सभी परिस्थितियों ने न केवल आग को फैलने में मदद की बल्कि भयंकर विस्फोट का कारण भी बना, जिससे बचाव कार्य कठिन हो गया।

विधानसभा में गूंजा भिवाड़ी अग्निकांड का मुद्दा

भिवाड़ी की केमिकल फैक्ट्री में हुई भीषण आग की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। इस दर्दनाक हादसे में कई मजदूरों की जान जाने के बाद मामला राजस्थान विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस घटना को गंभीर औद्योगिक लापरवाही बताते हुए व्यापक जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को अधिक मुआवजा, फैक्ट्री मालिक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने की मांग रखी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सदन में वक्तव्य देते हुए घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि राज्य सरकार इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है।

फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा प्रमाणपत्र और भंडारण अनुमति की जांच की जा रही है। यदि अवैध गतिविधि या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी और घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में हाई-रिस्क उद्योगों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों में मिनी फायर स्टेशन और आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि भविष्य में प्रतिक्रिया समय कम किया जा सके।

विधानसभा में हुई चर्चा के बाद यह संकेत मिले हैं कि राज्य सरकार औद्योगिक सुरक्षा कानूनों को और कठोर बनाने पर विचार कर सकती है। भिवाड़ी अग्निकांड ने औद्योगिक विकास और सुरक्षा मानकों के संतुलन पर बहस को तेज कर दिया है। सदन में हुई तीखी बहस से स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रहेगा।औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भिवाड़ी क्षेत्र की छवि और निवेश माहौल पर भी इसका असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार पर दबाव है कि वह त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करे।

राजस्थान विधानसभा में भिवाड़ी अग्निकांड पर हुई चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि औद्योगिक सुरक्षा अब केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनहित और श्रमिक सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुका है। जांच में निष्पक्ष और कार्रवाई कठोर होती है, तो यह घटना भविष्य के लिए एक सबक साबित हो सकती है।

औद्योगिक सुरक्षा सुधारों की जरूरत

भिवाड़ी केमिकल फैक्ट्री आग दुर्घटना एक गंभीर औद्योगिक त्रासदी है जिसमें असुरक्षित संचालन, संभावित अवैध गतिविधियाँ और नियमों के उल्लंघन के गंभीर संकेत दिखते हैं। इस हादसे ने न केवल कई मजदूरों की जान ली, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा के मुद्दों को फिर से उजागर किया है। सरकार और प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया राहत कार्य में मददगार रही है, पर अगले कदम में जांच, जवाबदेही और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिये कार्रवाई बेहद आवश्यक है। भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान जैसे तेजी से औद्योगिक विकास कर रहे राज्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। इस घटना ने न केवल कई परिवारों को असहनीय पीड़ा दी,बल्कि औद्योगिक नियमन, निरीक्षण तंत्र और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। अब आवश्यकता केवल जांच और दोष तय करने की नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों की है। राज्य के सभी केमिकल, पटाखा, पेंट, प्लास्टिक और ज्वलनशील पदार्थों से जुड़े उद्योगों के लिए वार्षिक थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए। वर्तमान में कई इकाइयाँ केवल कागजी अनुपालन दिखाती हैं। डिजिटल पोर्टल के माध्यम से फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र, विद्युत सुरक्षा रिपोर्ट और भंडारण लाइसेंस को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया जा सकता है,ताकि पारदर्शिता बढ़े। ज्वलनशील रसायनों, गैस सिलेंडरों और विस्फोटक सामग्री के भंडारण के लिए स्पष्ट मानक तय हैं,परंतु उनका पालन ढीला रहता है। भविष्य में अधिकतम भंडारण सीमा का जीपीएस -आधारित ट्रैकिंग, बिना लाइसेंस इकाइयों पर त्वरित सीलिंग कार्रवाई जिला स्तर पर “हाई-रिस्क इंडस्ट्री” की सूची जैसी व्यवस्थाएँ लागू की जानी चाहिए।

राजधानी नई दिल्ली से सटे भिवाड़ी, नीमराना, खुशखेड़ा जैसे औद्योगिक क्लस्टरों में आधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, केमिकल फोम टैंकर और गैस-डिटेक्शन उपकरण उपलब्ध होना आवश्यक है। कई बार आग पर काबू पाने में देरी का कारण संसाधनों की कमी होती है। राज्य सरकार को औद्योगिक क्षेत्रों में मिनी फायर स्टेशन स्थापित करने चाहिए, जिनकी प्रतिक्रिया समय सीमा 10 मिनट से अधिक न हो। अधिकांश पीड़ित मजदूर सुरक्षा प्रशिक्षण से वंचित रहते हैं। भविष्य की रणनीति में हर 6 महीने में मॉक ड्रिल,श्रमिकों के लिए अनिवार्य सुरक्षा किट,आपातकालीन निकास मार्ग का स्पष्ट चिन्हांकन,श्रमिक बीमा और दुर्घटना क्षतिपूर्ति का स्वतः प्रावधान आदि शामिल होना चाहिए। यदि कर्मचारी यह जानते हों कि आग लगने पर क्या करना है,तो हताहतों की संख्या कम हो सकती है। राजस्थान में जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तो हैं,लेकिन औद्योगिक दुर्घटनाओं के लिए विशेष इंडस्ट्रियल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेल की स्थापना समय की मांग है। यह सेल पुलिस, दमकल, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगा।रासायनिक फैक्ट्रियों में आग केवल मानव जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी घातक होती है। जहरीला धुआँ आसपास की बस्तियों पर प्रभाव डाल सकता है। अतः रीयल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम और इमरजेंसी अलर्ट मैसेजिंग व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। यदि किसी फैक्ट्री में अवैध उत्पादन या लाइसेंस उल्लंघन पाया जाए तो केवल जुर्माना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में मालिक और प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमा, औद्योगिक लाइसेंस का स्थायी निरस्तीकरण, जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच,जैसी कठोर कार्रवाई आवश्यक है। इससे उद्योगों में भय और अनुशासन दोनों स्थापित होंगे।ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी नेटवर्क और ऑनलाइन अनुपालन प्रणाली से निरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सकता है। (रीको) को प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित करना चाहिए।

भिवाड़ी की घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था के पुनर्मूल्यांकन का अवसर है। यदि सरकार इस त्रासदी को सुधार के बिंदु के रूप में लेती है और कठोर नीतिगत कदम उठाती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। औद्योगिक विकास और मानव जीवन की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना ही सच्चे अर्थों में सुशासन की पहचान होगी।