बड़े नवाचारों का जन्म भारी बजट से नहीं, बड़े विचारों सेः प्रो. संदीप पोद्दार

Big innovations are born not from huge budgets but from big ideas: Prof. Sandeep Poddar

रविवार दिल्ली नेटवर्क

लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज, मलेशिया में रिसर्च एंड इन्नोवेशन के डिप्टी वाइस चांसलर प्रो. संदीप पोद्दार ने सतत नवाचार और उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया, टेलीफोन और विमान जैसे आविष्कार सीमित संसाधनों और असफलताओं के बावजूद विकसित किए गए हैं। बड़े नवाचार हमेशा बड़े बजट से नहीं, बल्कि बड़े विचारों से जन्म लेते हैं। यदि सोच स्पष्ट हो और उद्देश्य मजबूत हो, तो कम फंडिंग में भी प्रभावशाली और उपयोगी इन्नोवेशन किए जा सकते हैं। प्रो. पोद्दार ने कहा, हमें प्रकृति से सीखना चाहिए। प्रकृति स्वयं एक महान शिक्षक है। कई आधुनिक तकनीकें जैव-अनुकरण के सिद्धांत पर आधारित हैं, जहां वैज्ञानिकों ने प्रकृति के डिज़ाइन और कार्यप्रणाली से प्रेरणा लेकर नवाचार विकसित किए हैं। एक साधारण विचार को सही दिशा, शोध और दृढ़ संकल्प के माध्यम से सफल स्टार्टअप में बदला जा सकता है। प्रो. पोद्दार तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के इंस्टीट्यूशन इन्नोवेशन काउंसिल- आईआईसी की ओर से सस्टेनेबल इन्नोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप पर हुई वर्कशॉप में बतौर विशिष्ट अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके वर्कशॉप का शंखनाद हुआ। इस मौके पर कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार बतौर मुख्य अतिथि, ऑप्टोमेट्री के एचओडी डॉ. राकेश कुमार यादव, फॉरेंसिक साइंसेज के एचओडी श्री रवि कुमार, आईआईसी कोऑर्डिनेटर श्री योगेश कुमार, रेडियोलॉजी के एचओडी श्री अमित बिष्ट, डॉ. पिनाकी अदक आदि मौजूद रहे।

मुख्य सत्र के बाद रिसर्च पब्लिकेशन एंड इन्नोवेशन पर हुई कार्यशाला में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र लेखन, स्कोपस/यूजीसी-केयर जर्नल चयन, शोध में नैतिकता, पेटेंट प्रक्रिया, तथा अकादमिक नवाचार को उद्योग से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रो. पोद्दार ने कहा, आज अनेक भ्रामक या शोषणकारी वेबसाइटें और शोध पत्रिकाएं मौजूद हैं, ऐसी पत्रिकाओं का मुख्य उद्देश्य केवल शोधकर्ताओं से धन प्राप्त करना होता है। इनमें शोध की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और अकादमिक मानकों का पालन नहीं किया जाता। उन्होंने बताया कि शोध केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समस्या समाधान की एक प्रक्रिया है। वास्तविक शोध वही है, जो समाज, उद्योग और पर्यावरण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करे। उन्होंने समझाया कि रिसर्च और इन्नोवेशन एक-दूसरे के पूरक हैं। वर्कशॉप में रेडियोलॉजी, ऑप्टोमेट्री, फिजियोथेरेपी, मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीक्स, फॉरेंसिक साइंसेज़ विभाग आदि के स्टुडेंट्स ने प्रतिभाग किया। स्टुडेंट्स ने स्टार्टअप, फंडिंग, नवाचार की चुनौतियों और सतत व्यवसाय मॉडल से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक और संतोषजनक उत्तर दिया गया। संचालन मिस सौम्या त्रिपाठी ने किया।