बीकानेर हाउस: टेन ईयर्स टुगेदर कार्यक्रम का हुआ सफल आयोजन

Bikaner House: Ten Years Together program was successfully organized

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली: नई दिल्ली के बीकानेर हाउस को राजस्थानी कला-संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर के जीवंत प्रदर्शनों का हॉटस्पॉट बनाने और राजस्थानी कला और संस्कृति को विभिन्न कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से देश-विदेश के दर्शकों तक पहूचाने के लिए आज से 10 वर्ष पहले वसुंधरा राजे के कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार द्वारा बीकानेर हाउस मैनेजमेंट समिति (बीएचएमएस) का गठन किया था। आज बीकानेर हाउस इस समिति के प्रयासों से एक गतिशील सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है।

इस बीएचएमएस ने अपनी 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज बीकानेर हाउस परिसर में “बीकानेर हाउस: टेन ईयर्स टुगेदर” कार्यक्रम भव्य आयोजन किया जिसमें पिछले 10 वर्षों में इस समिति द्वारा किए गए कार्यक्रमों का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत इन-हाउस अभिलेखीय प्रदर्शनी ‘थ्रू द ईयर्स: सेलिब्रेटिंग ए डिकेड ऑफ आर्ट, कल्चर एंड हेरिटेज’ से हुई, जिसके बाद ‘बीकानेर हाउस: ए डिकेड ऑफ रेज़ोनेंस’ पुस्तक का लोकार्पण एवं लोक प्रस्तुतियों के साथ उल्लासपूर्ण सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव सह मुख्य रेजिडेंट कमिश्नर (सीआरसी) श्री वी. श्रीनिवास एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन तथा पुस्तक के विमोचन के साथ किया गया।

प्रदर्शनी में बीकानेर हाउस की भव्यता, इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक स्मृतियाँ बखूबी एक-दूसरे में समाहित होती प्रदर्शित की गई हैं। इस प्रदर्शनी को एक संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतरता और परिवर्तन के बीच एक सतत संवाद के रूप में भी परिकल्पित किया गया है।

10वीं वर्षगांठ के कार्यक्रमों के अंतर्गत छात्र चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई तथा ‘सोल ऑफ राजस्थान’ शीर्षक से फोटोग्राफी प्रदर्शनी, गैलरी वंडरवॉल द्वारा आयोजित की गई।

उल्लेखनीय है वर्ष 1929 में ऐतिहासिक प्रिंसेस पार्क में बीकानेर रियासत के शासकों के आवास के रूप में निर्मित बीकानेर हाउस ने विगत वर्षों में एक शाही निवास से लेकर एक जीवंत सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक संवाद केंद्र के रूप में अपनी लंबी यात्रा तय की है। आज बीकानेर हाउस गेटवे ऑफ़ राजस्थान के रूप में उभर रहा है तथा राजस्थानी कला और संस्कृति को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बनकर उभरा है।