
डॉ मार्कण्डेय राय
परिचय
‘वसुधैव कुटुंबकम: वैश्विक शांति की दिशा में अग्रसर’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो वैश्विक शांति, सहयोग और समरसता की अवधारणा को न केवल दार्शनिक दृष्टि से प्रस्तुत करता है, बल्कि इसके व्यावहारिक और नीतिगत पक्षों की भी व्यापक व्याख्या करता है। इस पुस्तक का संपादन एवं शोध डॉ. सुरेंद्र कुमार पाठक द्वारा किया गया है, जो इस विषय पर गहरी पकड़ और अनुसंधान के लिए जाने जाते हैं। पुस्तक का प्रकाशन ज्ञानदा प्रकाशन (JNANADA PRAKASHAN) और भारतीय विश्वविद्यालय परिसंघ (Confederation of Indian Universities) के सहयोग से किया गया है।
विषयवस्तु का संक्षिप्त परिचय
यह पुस्तक वसुधैव कुटुंबकम की वैचारिक, नैतिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, राजनीतिक एवं व्यवहारिक व्याख्या प्रस्तुत करती है। पुस्तक में कुल सात अध्याय हैं, जो निम्नलिखित विषयों को समाहित करते हैं:
- वसुधैव कुटुंबकम का परिचय – इस अध्याय में इस अवधारणा के मूल दर्शन, तात्त्विक आधार, और इसके सार्वभौमिक महत्व को स्पष्ट किया गया है।
- वैचारिक और दार्शनिक परिप्रेक्ष्य – विभिन्न सभ्यताओं, धर्मों और विचारधाराओं में इस सिद्धांत की स्वीकृति और इसके ऐतिहासिक संदर्भों की चर्चा की गई है।
- व्यवहारिक और नैतिक आयाम – मानव व्यवहार, नैतिकता और सामाजिक संरचनाओं में वसुधैव कुटुंबकम के प्रभाव को दर्शाया गया है।
- न्याय, विधि और नीति निर्माण – अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संविधान और वैश्विक प्रशासन में इस अवधारणा के समावेश की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है।
- आर्थिक और पारिस्थितिक परिप्रेक्ष्य – वैश्विक अर्थव्यवस्था, सतत विकास (SDGs), और पर्यावरणीय संतुलन में वसुधैव कुटुंबकम के योगदान पर प्रकाश डाला गया है।
- वैश्विक नीति-सुझाव – इस अध्याय में वैश्विक संगठनों जैसे UN, G20, और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं, ताकि इस दर्शन को वैश्विक स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
- आगे की राह – वसुधैव कुटुंबकम को व्यवहारिक रूप में कैसे अपनाया जाए, इसके लिए रणनीतियाँ और नीतिगत सिफारिशें दी गई हैं।
विशेषताएँ
अकादमिक गहराई: यह पुस्तक केवल दार्शनिक विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैज्ञानिक, सामाजिक और नीति-निर्माण संबंधी शोध का समावेश है।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ: लेखक ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस विचार को देखने का प्रयास किया है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, घोषणाओं (जैसे G20, UN एजेंडा, और ग्लोबल पीस लीडरशिप कॉन्फ्रेंस) से इसके संबंध को जोड़ा है।
समग्र दृष्टिकोण: यह पुस्तक वसुधैव कुटुंबकम के केवल आध्यात्मिक या सांस्कृतिक पहलू तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक, कानूनी, राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर भी गहन दृष्टि डालती है।
समाधानपरक दृष्टिकोण: इसमें केवल सैद्धांतिक विश्लेषण ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान और क्रियान्वयन रणनीतियों का भी उल्लेख किया गया है।
पुस्तक की प्रासंगिकता
वर्तमान समय में जब वैश्विक राजनीति अस्थिरता, पर्यावरणीय संकट और सांस्कृतिक विभाजन के दौर से गुजर रही है, ऐसे में वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यह पुस्तक न केवल एक विचारधारा को प्रस्तुत करती है, बल्कि उसे यथार्थ में बदलने के मार्ग भी सुझाती है।
निष्कर्ष
‘वसुधैव कुटुंबकम: वैश्विक शांति की दिशा में अग्रसर’ केवल एक विचारशील ग्रंथ नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शिका है, जो हमें बताती है कि किस प्रकार इस प्राचीन भारतीय दर्शन को आधुनिक विश्व की आवश्यकताओं के अनुरूप लागू किया जा सकता है। शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और वैश्विक शांति में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए यह एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक है।
रेटिंग: 4.8/5
सुझाव: यदि आगामी संस्करण में विभिन्न वैश्विक नेताओं और संगठनों की टिप्पणियों और इस विषय पर उनके विचारों को और अधिक विस्तार से जोड़ा जाए, तो यह पुस्तक और भी अधिक प्रभावशाली बन सकती है।