सीएजी ने दिल्ली विधान सभा अध्यक्ष बिजेंद्र गुप्ता से मुलाक़ात की

CAG met Delhi Legislative Assembly Speaker Bijendra Gupta

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली : सीएजी (ऑडिट) श्रीमती रोली शुक्ला मगले ने दिल्ली विधान सभा अध्यक्ष बिजेंद्र गुप्ता से मिलकर कई मुद्दों पर बात की । सीएजी (C&AG) रिपोर्टों और एटीएन (ATNs) के बारे में उन्होंने जानकारी दी। सीएजी इस बात से अवगत था कि लोक लेखा समिति (PAC) और सरकारी उपक्रम समिति (COGU) ने सीएजी रिपोर्टों के किसी भी पैरा की जांच नहीं की है और न ही अपनी कोई रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की है।

इसके बाद, इस संदर्भ में सचिव (LA) को एक पत्र भी भेजा गया ।

हालांकि, इस बात पर बिजेंद्र गुप्ता को अत्यंत आश्चर्य हुआ था कि दिल्ली सरकार के प्रशासनिक विभाग सीएजी द्वारा रिपोर्ट किए गए पैरा पर एटीएन प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं। विभागों को यह एटीएन तीन माह के भीतर प्रस्तुत करना अनिवार्य है, चाहे पीएसी (PAC) या सीओजीयू (COGU) उसकी जांच करे या न करे।

विधान सभा अध्यक्ष को इस बात से अवगत कराया गया कि भारत सरकार के व्यय विभाग ने सीएजी रिपोर्टों के प्रस्तुतीकरण के बाद की कार्रवाई की निगरानी के लिए एक निगरानी प्रकोष्ठ (Monitoring Cell) स्थापित किया है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए वे एपीएमएस पोर्टल (APMS – Audit Para Monitoring System) का उपयोग कर रहे हैं। यह एक वेब-आधारित कंप्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली है, जो विभागों द्वारा सीएजी रिपोर्टों पर एएन (ATNs) और पीएसी (PAC) एवं सीओजीयू (COGU) रिपोर्टों पर एटीआर (ATRs) प्रस्तुत करने की निगरानी में सहायक है। इससे अनावश्यक विलंब और कागजी कार्यवाही समाप्त हो जाती है।

दिल्ली में अभी भी यह कार्य मैन्युअल रूप से किया जा रहा है, जो न केवल समय-साध्य है बल्कि सटीकता की दृष्टि से भी प्रभावी नहीं है। इस संबंध में, अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) से दिल्ली में शीघ्र एपीएमएस लागू करने का अनुरोध महालेखाकार (दिल्ली) द्वारा उनके पत्र दिनांक 02.01.2025 के माध्यम से किया गया है ।

विधान सभा अध्यक्ष को विश्वास है कि दिल्ली में एपीएमएस पोर्टल को शीघ्र लागू किया जाना अत्यंत आवश्यक है और साथ ही, प्रशासनिक विभागों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे अपने एटीएन समय पर प्रस्तुत करें। महालेखाकार (दिल्ली) द्वारा उपलब्ध कराई गई लंबित एटीएन की सूची भी संलग्न की गई है।

बिजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी 7 अप्रैल 2025 तक प्रदान की जाए, ताकि लोक लेखा समिति इस मामले की समीक्षा कर सके और आगे की आवश्यक कार्रवाई कर सके।