-
आलेख
बोतलबंद पानी का भारत, सार्वजनिक जल प्रशासन की गहरी विफलता
डॉ. सत्यवान सौरभ भारत में बोतलबंद पानी पर बढ़ती निर्भरता केवल उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जल प्रशासन में व्याप्त गहरी और बहुस्तरीय…
Read More » -
आलेख
भारत की खुशहाली और आर्थिक मजबूती का आधार: केंद्रीय उत्पाद शुल्क
दिलीप कुमार पाठक भारत की आर्थिक प्रगति के पीछे उन हजारों हाथों का योगदान है, जो देश के राजस्व को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम करते हैं। इन्हीं प्रयासों…
Read More » -
आलेख
राष्ट्रीय चुनौती बनती बस हड़तालें—कब होगा स्थायी समाधान?
प्रो. आरके जैन “अरिजीत” त्योहार की आहट के बीच मध्य प्रदेश 2 मार्च 2026 की सुबह एक बड़े ठहराव की ओर बढ़ रहा है—सड़कों पर सन्नाटा होगा और यात्रियों की…
Read More » -
कारोबार
पूंजी बाजार में सेडेमैक मेक्ट्रोनिक्स की बड़ी छलांग
पूंजी बाजार में सेडेमैक मेक्ट्रोनिक्स की बड़ी छलांग सेडेमैक की टेक्नोलॉजी यात्रा का नया पड़ाव मुंबई (अनिल बेदाग): भारतीय ऑटोमोटिव और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी…
Read More » -
आलेख
कचरे पर कड़ा रुख: न्यायपालिका के निर्देश और ज़मीनी सच्चाई
सुनील कुमार महला ठोस कचरे का प्रबंधन आज के समय की एक बहुत बड़ी आवश्यकता बन चुका है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज लगातार बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते शहरीकरण, औधोगिकीकरण…
Read More » -
आलेख
विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी: विकास का सशक्त सूत्र
-सुनील कुमार महला 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। वास्तव में, यह दिवस वैज्ञानिक सोच, नवाचार (इनोवेशन) और सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) में विज्ञान की भूमिका को…
Read More » -
आलेख
हरदीप सिंह पुरी: इपस्टीन फाइल्स, दलाली, प्रॉस्टिट्यूशन, नाबालिग बालिका शोषण व पेट्रोलियम
प्रो. नीलम महाजन सिंह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘नारी का सम्मान, बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, लखपति दीदी’ वगैरह की बात करते हैं। हिंदू कॉलेज के एक मामूली से, हरदीप…
Read More » -
आलेख
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की चर्चा: सत्य का आईना या संस्था की गरिमा पर प्रहार?
डॉ. प्रियंका सौरभ न्यायपालिका भारत के लोकतंत्र का संरक्षक स्तंभ है, जो संविधान की रक्षा करता है और नागरिकों को न्याय का आश्वासन देता है। लेकिन हाल ही में सुप्रीम…
Read More » -
आलेख
रंग नहीं, संवेदनाओं का उत्सव है होली
कृति आरके जैन अँधेरा जितना भी गहरा हो, जब आग की लपटें उठती हैं, वह हर छिपी कड़वाहट और पुरानी पीड़ा को राख बना देती हैं। होलिका दहन केवल एक…
Read More » -
आलेख
असल में हम ही अपने बच्चों को हत्यारे बना रहे है
संजय रोकड़े अब हमें चेत जाने की जरूरत है, पर मेरी ये बात आपको बेफिजूल की बात लगेगी। मैं ये भी जानता हूं कि लखनऊ में जिस बच्चे ने अपने…
Read More »