महासभा के अध्यक्ष महेन्द्र नाहटा और प्रधान न्यासी सुरेश गोयल का अभिनंदन

Congratulations to General Assembly President Mahendra Nahata and Chief Trustee Suresh Goyal

पद नहीं, व्यक्तित्व ही संस्था की पहचान होता है – मुनि विमलकुमार

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली : राजधानी के अणुव्रत भवन में उस समय श्रद्धा, विश्वास और वंदना के स्वर एक साथ गूंज उठे, जब संस्था शिरोमणि जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के नवगठित ट्रस्ट बोर्ड के प्रधान न्यासी श्री सुरेश गोयल एवं श्री महेंद्र नाहटा के अध्यक्ष मनोनीत होने के उपलक्ष्य में अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, दिल्ली एवं आचार्य श्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान एवं परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण के विद्वान शिष्य शासनश्री मुनिश्री विमलकुमार जी एवं बहुश्रुत मुनिश्री उदितकुमार जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। मंगलाचरण से प्रारंभ हुए इस समारोह में वातावरण श्रद्धा, अनुशासन और संघनिष्ठा की भावधारा से ओत-प्रोत रहा।

शासनश्री मुनि विमलकुमार जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक शक्ति उसके पदाधिकारी होते हैं। पद केवल दायित्व का प्रतीक है, किंतु उसे सार्थक बनाती है-विनम्रता, संगठन निष्ठा और दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता। तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्य महाश्रमण जी के नेतृत्व में संचालित संस्थाओं में इन गुणों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यही समन्वय समाज के विकास का मूलाधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महासभा का नव मनोनीत नेतृत्व इन मूल्यों को और सशक्त करेगा। बहुश्रुत मुनिश्री उदितकुमार जी ने कहा कि जिस संगठन के कार्यकर्ताओं में धार्मिकता के साथ सामाजिकता-संवेदनशीलता का भाव होता है, उसका इतिहास स्वतः स्वर्णिम बन जाता है। उन्होंने कहा कि श्री सुरेश गोयल और श्री महेंद्र नाहटा में इन दोनों गुणों का सशक्त समावेश है। उनकी संघनिष्ठा, सेवा-भाव और समर्पण की साधना उन्हें इस दायित्व तक लाई है। उन्होंने कामना की कि उनका नेतृत्व महासभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। मुनि अभिजीतकुमार जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए नव नेतृत्व को कर्तृत्वशील एवं संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी।

आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल पटवारी जैन ने दोनों महानुभावों का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनकी सुदीर्घ सेवाएं, विनम्र व्यवहार और संघ के प्रति अटूट निष्ठा ही उनके चयन का आधार बनी है। यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि दिल्ली समाज के लिए गौरव का क्षण है। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने कहा कि दोनों विभूतियां उदारता और दानशीलता की सजीव प्रतिमूर्ति हैं। समाजहित और संघकार्य के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरक रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा। प्रवास व्यवस्था समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री बजरंग बोथरा ने कहा कि दोनों ही महान विभूतियां महासभा के इतिहास में नया अध्याय लिखेंगी। इस बार महासभा में बड़ी संख्या में दिल्ली का प्रतिनिधित्व होना हम सबके लिए विशेष प्रसन्नता और गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल अभिनंदन का नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के नए संकल्प का भी है।

श्री महेंद्र नाहटा ने गहन श्रद्धा के साथ गुरु के प्रति समर्पण भाव व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता का वास्तविक आधार गुरु कृपा ही होती है। हमारी सभी संस्थाओं की आत्मा भी गुरु हैं, उनकी दृष्टि, उनका मार्गदर्शन और उनका आशीर्वाद ही हमें दिशा देता है। उन्हें जो दायित्व प्राप्त हुआ है, वह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि गुरु अनुकम्पा का प्रतिफल है। गुरु चरणों में पूर्ण समर्पण के साथ उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि वे महासभा के कार्यों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सतत प्रयास करेंगे। वहीं श्री सुरेश गोयल ने अपने विचारों में महासभा के गौरवपूर्ण इतिहास का स्मरण कराते हुए बताया कि जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा की स्थापना आचार्य श्री कालूगणी के शासनकाल में हुई थी और यह तेरापंथ धर्मसंघ की सबसे प्राचीन संस्था है, जिसने 113 वर्ष की प्रेरक यात्रा पूर्ण की है। उन्होंने कहा कि इस शिरोमणि संस्था के सतत विकास के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। गुरु को उन्होंने सिद्धत्व का सेतु और जीवन की सार्थकता का परम आयाम बताते हुए कहा कि गुरु मार्ग ही हमें आत्मोन्नति और संघविकास की ओर अग्रसर करता है। कार्यक्रम का कुशल संयोजन दिल्ली सभा के महामंत्री श्री प्रमोद घोड़ावत ने अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से किया।

अभिनंदन करने वाली संस्थाओं में तेरापंथ परिषद, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, अणुव्रत समिति ट्रस्ट, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास सहित अनेक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर से श्री महेंद्र नाहटा, श्री सुरेश गोयल एवं महासभा में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य कार्यकर्ताओं के प्रति श्रद्धा और शुभकामनाओं के भाव व्यक्त किए। समारोह के अंत में वातावरण एक ही संकल्प से गूंज उठा-नेतृत्व केवल अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व है और उत्तरदायित्व तभी सफल होता है जब उसमें संघ, समाज और साधना-तीनों के प्रति समर्पण हो।