कांग्रेस कार्यकारी समिति: जागरूक विपक्ष जनता का संरक्षण

Congress Working Committee: Vigilant Opposition Protecting the People

प्रो. नीलम महाजन सिंह

हाल ही में संपन्न हुई कांग्रेस कार्यकारी समिति (Congress Working Committee) की बैठक में विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए, कांग्रेस की तैयारी व विजय का संकल्प लिया गया। संकल्प के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जल्द होने वाले राज्यों में निर्णायक जनादेश हासिल करने का प्रयास करेगी। साथ ही लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी संगठन की तैयारी पूरी होनी चाहिए। कांग्रेस, स्वतंत्रता संग्राम से नवोदित राजनीतिक दल है। पार्टी के आरंभिक नेता, स्वतंत्रता सेनानी थे। कांग्रेस, भारत के हर राज्य में उपस्थित है और कांग्रेस समर्थक भी। फ़िर क्या कारण है कि आज पार्टी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है? पार्टी के प्रमुख ऐतिहासिक अध्यक्ष (स्वतंत्रता पूर्व) वोमेश चंद्र बोनर्जी: (1885, बॉम्बे) दादाभाई नौरोजी: 1886, 1893, 1906 बदरुद्दीन तैयबजी: 1887 (प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति) ऐनी बेसेंट: 1917 (पहली महिला राष्ट्रपति) सरोजनी नायडू: 1925 (प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष) महात्मा गांधी: 1924 (बेलगाम) सुभाष चंद्र बोस: 1938, 1939 जवाहरलाल नेहरू: 1929, 1936, 1937, 1951-1954) थे। स्वतंत्रता के बाद व अभी तक, जे.बी. कृपलानी: 1947 इंदिरा गांधी: 1978-1984 राजीव गांधी: 1985-1991 सोनिया गांधी: 1998-2017, 2019-2022 (सबसे लंबे समय तक) राहुल गांधी: 2017-2019 मल्लिकार्जुन खड़गे: 2022-वर्तमान में हैं। पार्टी के संकल्प पत्र में कहा गया कि ‘कांग्रेस कार्य समिति की बैठक यह विश्वास व्यक्त करते हुए समाप्त होती है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जल्द होने वाले चुनावों में निर्णायक जनादेश हासिल करेगी। साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी संगठन की तैयारी पूरी है। 2023 से 2024 की शुरुआत तक, इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) चार राज्यों में सत्तारूढ रही। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में जीती, जहां भारत की 13.5% से ज़्यादा आबादी रहती है। अपने सहयोगियों के साथ मिलकर, कांग्रेस सात राज्यों के शासन में शामिल है, जिसमें लगभग 30% आबादी शामिल है; अक्सर यह (I.N.D.I.A.) ई.न.डि.या. गठबंधन का हिस्सा रही। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का नेतृत्व है। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का नेतृत्व है। मुख्य गठबंधन: कांग्रेस बिहार, झारखंड व तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (I.N.D.I.A.) गठबंधन के ज़रिए)। 2026 की उपलब्ध ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस राज्यों के चुनावों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही है, जिसमें असम व केरल शामिल हैं। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मुख्य विपक्षी पार्टी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के दौरान पार्टी नेताओं से व्यक्तिगत मतभेदों को दूर रखने की नसीहत दी व पार्टी की सफलता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। खरगे ने पार्टी नेताओं से अनुशासन व एकजुटता रखने का भी आह्वान किया। देश में बदलाव के संकेत हैं। ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा गया। पार्टी के लोगों को जम्मू कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए। पिछले दस सालों में भाजपा के राज में आम लोगों के सामने चुनौतियां दोगुना बढ़ गईं हैं। कांग्रेस को केंद्र सरकार को सत्ता से हटाने के लिए पूरी ताकत झोंकनी पड़ेगी। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में तय किया गया कि पार्टी को विवादित मुद्दों से दूर रहना चाहिए व इसमें नहीं फंसना चाहिए। सनातन धर्म को लेकर जारी विवाद की बजाय गरीबों व उनके मुद्दों पर फोकस करना चाहिए। साथ ही बैठक में केरल के पूर्व सीएम ओमन चांडी के निधन पर शोक प्रस्ताव, मणिपुर पर शोक प्रस्ताव व हिमाचल प्रदेश की आपदा पर शोक प्रस्ताव पास किया गया। पार्टी ने हिमाचल प्रदेश की आपदा को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की। पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री, पी.चिदंबरम ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ संविधान पर हमला है और पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी। चिदंबरम ने इसे ‘संघवाद पर हमला’ बताया। साथ ही आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के कामकाज को बाधित कर रही है व राज्यों को राजस्व में हिस्सा देने से इंकार किया जा रहा है या फिर उनका हिस्सा कम कर दिया गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, सलमान खुर्शीद, आदि, बैठक में शामिल हुए। कांग्रेस पार्टी एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने, जनता के मुद्दों को उठाने व सरकार को भारत की जनता के प्रति जवाबदेह ठहराने के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस अध्यक्ष, पदाधिकारियों, नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और कांग्रेस उम्मीदवारों के अथक प्रयासों की सराहना करती है, जिन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस कठिन लड़ाई को लड़ने के लिए दिन-रात परिश्रम किया। मल्लिकार्जुन ने समिति को संबोधित करते हुए, चुनौतीपूर्ण समय में कांग्रेस अध्यक्ष से नेतृत्व और मार्गदर्शन की अपील की। ​भारत के युवाओं, किसानों, अनुसूचित जाति, जनजाति वअन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों, गरीबों व वंचित वर्गों के हितों की रक्षा करने का आह्वान किया गया। जनादेश के परिणामस्वरूप उत्पन्न चुनौतियों, असफलताओं व कमियों को स्वीकार करती है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बज चुकी है और इस चुनावी समर में कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। कोलकाता में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व जयराम रमेश ने पार्टी का ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। कांग्रेस ने इस बार ‘एकला चलो’ की नीति अपनाते हुए बंगाल की जनता के सामने एक ऐसा तीसरा विकल्प पेश किया है, जो विकास, रोजगार और सामाजिक सौहार्द पर टिका है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वे टी.एम.सी. के भ्रष्टाचार और बीजेपी के ध्रुवीकरण के बीच बंगाल को तरक्की का नया रास्ता दिखाएगी। कांग्रेस के घोषणापत्र की सबसे बड़ी धमक महिलाओं और किसानों के लिए किए गए वादों में दिख रही है। पार्टी ने वादा किया है कि अगर बंगाल में उनकी सरकार बनती है, तो हर महिला को ‘महालक्ष्मी योजना’ के तहत हर महीने ₹2000 रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ ही, अन्नदाताओं को साधने के लिए सालाना ₹15 हजार रुपये की सहायता राशि व मुफ्त बिजली का ऐलान किया गया। इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी जा सकती है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए पार्टी ने हर परिवार के लिए ₹10 लाख रुपये तक के मुफ़्त सरकारी स्वास्थ्य बीमा का वादा किया है, जो आम आदमी के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। रोज़गार का ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ मॉडल, बंगाल में बेरोजगारी एक ज्वलंत मुद्दा है, जिसे कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र के केंद्र में रखा है। इसके साथ ही स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और सभी सरकारी रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से भरने की बात कही गई है। युवाओं के लिए मुफ्त शिक्षा और कौशल विकास के जरिए कांग्रेस बंगाल को दोबारा ‘औद्योगिक महाशक्ति’ बनाने का सपना दिखा रही है।

कानून का राज व भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने वादा किया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी और महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर मंडल में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, ताकि न्याय मिलने में देरी न हो। BJP-TMC को बताया ‘एक ही सिक्के के दो पहलू’। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी ‘वंदे मातरम’ जैसे मुद्दों और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है, जबकि राज्य के असली मुद्दे गरीबी और विकास हैं। पार्टी ने साफ किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर भले ही विपक्षी दल एकजुट हों, लेकिन बंगाल की जमीन पर वह टीएमसी और बीजेपी दोनों के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी। कांग्रेस का यह घोषणापत्र केवल वादों का पिटारा नहीं, बल्कि बंगाल की खोई हुई गरिमा को वापस लाने का एक रोडमैप नजर आता है। समिति गहन आत्मनिरीक्षण की अनुशंसा करती है व कांग्रेस अध्यक्ष से पार्टी के हर स्तर पर पूर्ण सुधार और विस्तृत पुनर्गठन का अनुरोध करती है। इस संबंध में एक योजना शीघ्र ही लागू की जाएगी। कांग्रेस का जज़्बा और विचारधारात्मक प्रतिबद्धता पहले से कहीं अधिक मज़बूत है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बाद तेल की बढ़ती कीमतों का मुद्दा हमारे सामने एक गंभीर समस्या बनकर खड़ा है। बैंकिंग क्षेत्र बेहद खराब स्थिति में है, जहां पिछले पांच वर्षों में अनियंत्रित और अनियंत्रित एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये हो गए हैं, जिससे बैंकिंग कार्यों की स्थिरता खतरे में पड़ गई है। अर्थव्यवस्था में मंदी, निजी निवेश की कमी और उपभोग के स्तर में भारी गिरावट गंभीर आर्थिक मंदी की ओर इशारा करती है। रोजगार संकट का कोई समाधान नहीं निकला है, जिससे हमारे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। कृषि संकट लगातार बना हुआ है, देश के बड़े हिस्से, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक, भीषण सूखे की चपेट में हैं। सामाजिक संघर्ष व तनाव आबादी के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहे हैं। कांग्रेस समिति (सीडब्ल्यूसी) ने माना है कि सरकार को इन मुद्दों का तत्काल समाधान करना होगा। कांग्रेस पार्टी इन गंभीर चुनौतियों से निपटने में रचनात्मक भूमिका निभा सकती है। सीडब्ल्यूसी को उम्मीद है कि सरकार इन मुद्दों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानेगी। यदि विपक्ष जागरूक रहेगा, तो जनता के मुद्दों को साकार किया जा सकता है।

प्रो. नीलम महाजन सिंह (वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, अंतर्राष्ट्रीय सामयिक विशेषज्ञ, दूरदर्शन व्यक्तित्व, सॉलिसिटर फॉर ह्यूमन राइट्स व परोपकारक)