अशोक भाटिया
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का ऐलान भले ही न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के साथ तनातनी के बीच तमिलनाडु के दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने एक तीर से तीन निशाना साधते नजर आए। अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ का राहुल गांधी ने समर्थन करके बीजेपी को कठघरे में खड़े करते नजर आए तो दूसरी तरफ थलपति विजय के जरिए स्टालिन को भी सियासी संदेश दे दिया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जब मंगलवार को तमिलनाडु के दौरे पर थे उस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया था , जिसने तमिलनाडु की राजनीति में नई सियासी चिंगारी भड़का दी । उनके पोस्ट ने न सिर्फ एक नाज़ुक समय में अभिनेता से नेता बने विजय का साथ दिया , बल्कि उन अटकलों को भी मजबूत किया है कि कांग्रेस, DMK के साथ अपने करीबी संबंधों के बावजूद, विजय की पार्टी TVK के साथ आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समझ बनाने पर विचार कर सकती है।दरअसल, राहुल गांधी ने तमिल सुपरस्टार विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर बड़ा बयान दिया । उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को ‘रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश’ तमिल संस्कृति पर हमला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘तमिल लोगों की आवाज दबाने’ में कभी कामयाब नहीं होंगे।
ज्ञात हो कि तमिलनाडु में कांग्रेस मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK की सहयोगी है। हाल के दिनों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ी है। कांग्रेस 234 सदस्यों वाली विधानसभा में पहले 40 सीटें चाहती थीं लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें देने के ही संकेत दिए हैं। इससे खिन्न पार्टी का एक धड़ा विजय की टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व से अनुरोध करता रहा है। दूसरी तरफ, बीजेपी AIADMK की अगुवाई वाले गठबंधन के लिए नई-नई रणनीति बना रहा है।
ऐसी सियासी परिस्थितियों में राहुल गांधी की हालिया पोस्ट एक तीर से तीन निशाने जैसा है। पहला तो उन्होंने विजय को उनकी फिल्म के मुद्दे पर समर्थन देकर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की है, दूसरा ऐसा कर उन्होंने सहयोगी DMK पर दबाव बढ़ा दिया है कि उसके पास विजय एक विकल्प हो सकते हैं और तीसरा राहुल ने भाजपा पर करारा प्रहार किया है, और उसे तमिल संस्कृति का विरोधी बताकर उसके दक्षिणी विस्तार के मंसूबों को
ऐसी सियासी परिस्थितियों में राहुल गांधी की हालिया पोस्ट एक तीर से तीन निशाने जैसा है। पहला तो उन्होंने विजय को उनकी फिल्म के मुद्दे पर समर्थन देकर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की है, दूसरा ऐसा कर उन्होंने सहयोगी DMK पर दबाव बढ़ा दिया है कि उसके पास विजय एक विकल्प हो सकते हैं और तीसरा राहुल ने बीजेपी पर करारा प्रहार किया है, और उसे तमिल संस्कृति का विरोधी बताकर उसके दक्षिणी विस्तार के मंसूबों को नाकाम करने की कोशिश की है।
तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान जारी है। विधानसभा चुनाव में राज्य की 234 सीटों में से कांग्रेस 40 सीटें चाहती है, लेकिन डीएमके इसके लिए राजी नहीं है। डीएमके सिर्फ 25 सीटें ही कांग्रेस को दे रही है, जिसे लेकर दोनों के बीच सियासी तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के करीबी सांसद माणिक टैगोर ने 35 सीटें और तमिलनाडु की सत्ता में हिस्सेदारी की मांग रखी है, जिसे डीएमके ने साफ इंकार कर दिया है।
डीएमके नेता और स्टालिन सरकार में मंत्री आई पेरियासामी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य में ‘कोई गठबंधन सरकार नहीं होगी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हमेशा एक ही पार्टी की सरकार रही है और यह परंपरा चुनावों के बाद भी जारी रहेगी। पेरियासामी ने कहा कि कांग्रेस को अपनी मांग रखने का अधिकार है, लेकिन सीएम एमके स्टालिन इस मांग को मानने के इच्छुक नहीं हैं। यह पहली बार है जब डीएमके ने कांग्रेस की मांग को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है, जो पिछले कई महीनों से जोर पकड़ रही थी।
कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग मानता है कि पार्टी को TVK के साथ गठबंधन करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। विजय की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के बीच, कांग्रेस को एक नया राजनीतिक फायदा दे सकती है। ऐसे में पार्टी के अंदर शुरुआती फीडबैक से पता चलता है कि विजय और राहुल गांधी दोनों के नेतृत्व वाले अभियान ज़मीनी स्तर पर लोगों से मज़बूती से जुड़ सकते हैं और राज्य में माहौल बदल सकते हैं।
राहुल गांधी के खुलकर विजय की फिल्म के समर्थन उतरने के बाद सोशल मीडिया पर भी दोनों के बीच दोस्ती की मांग उठने लगी है। एक्टर विजय की टीम के सोशल मीडिया हैंडल के जरिए एक पोस्ट किया गया है, जिसमें आरआरआर फिल्म का एक वीडियो शेयर कर राहुल गांधी को धन्यवाद कह गया है है। इस तरह गठबंधन के लिए भी सियासी संदेश दे दिया है।
तमिलनाडु में गठबंधन को लेकर कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है। पार्टी के सीनियर नेताओं का मानना है कि पार्टी को DMK के साथ अपने लंबे समय के गठबंधन के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनका कहना है कि इस साझेदारी ने कई सालों से स्थिरता, प्रासंगिकता और राजनीतिक लाभ दिया है। उनके मुताबिक, नई रणनीति के साथ प्रयोग करना, चाहे वह कितना भी रोमांचक लगे, उसमें जोखिम हो सकता है। इनका तर्क है कि कांग्रेस को DMK के साथ मौजूदा गठबंधन से अलग होने के बजाय, मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल करके बेहतर जगह और मौजूदा गठबंधन में मज़बूत भूमिका के लिए बातचीत करनी चाहिए।
वहीं, पार्टी का दूसरा गुट थलपति विजय के साथ गठबंधन करने की वकालत कर रहे हैं। राहुल गांधी के करीब प्रवीण चक्रवर्ती ने थलपित विजय का दिल जीतने के लिए स्टालिन सरकार को भी निशाने पर ले लिया था। प्रवीण चक्रवर्ती ने तमिलनाडु के ऋण की तुलना उत्तर प्रदेश से करते हुए कहा कि 2010 में उत्तर प्रदेश का ऋण तमिलनाडु के ऋण से दोगुने से भी अधिक था लेकिन अब तमिलनाडु सबसे अधिक बकाया ऋण और भारी ब्याज दर के साथ सबसे आगे है।
हालांकि, इस बात को लेकर कांग्रेस के तमिलनाडु चीफ ने कहा था कि यूपी की तुलना तमिलनाडु से करना अनुचित है। उत्तर प्रदेश में ‘बुलडोजर शासन’है, जहां लोगों के घर गिराए जा रहे हैं, क्या प्रवीण योगी आदित्यनाथ की आवाज बनकर बोल रहे हैं? इस तरह डीएमके के साथ डैमेज कन्ट्रोल करने की कोशिश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करते नजर आ रहे थे, लेकिन अब राहुल गांधी ने जिस तरह थलपति विजय की फिल्म का समर्थन किया है, उसके सियासी मायने बदल गए हैं।





