एन जी भट्ट
हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का एक महीने के भीतर तीसरी बार नई दिल्ली दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस दौरान उन्होंने महीने में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई केंद्रीय मंत्रियों से भी विस्तृत वार्ता की। इन बैठकों को औपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे राजस्थान के विकास को गति देने की एक रणनीतिक पहल के रूप में देख रहे है। साथ ही राजस्थान में संभावित मंत्रिपरिषद के विस्तार से भी जोड़ कर देख रहे है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने पिछले दिल्ली दौरे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष से भी मिले थे, इसलिए मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन के कयास को हवा मिल रही है। हालांकि राजस्थान में आने वाले महीनों में स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी होने है। इधर इन दोनों देश के उत्तर पूर्वी और दक्षिण राज्यों में विधानसभा चुनाव का माहौल उफान पर है।
वर्तमान में संसद का बजट सत्र चल रहा है जिसमें इसी माह आम बजट को भी पारित किया जाना है। वैसे भी राज्य और केंद्र के बीच समन्वय किसी भी बड़े विकास मॉडल की आधारशिला होता है। विशेष रूप से तब,जब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकारे हो, तो अपेक्षाएं और भी बढ़ जाती हैं। मुख्यमंत्री के लगातार दिल्ली दौरे इस बात का संकेत हैं कि राजस्थान की डबल इंजन सरकार विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र से अधिकतम सहयोग प्राप्त करने के प्रयास में सक्रिय है। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में बुनियादी ढांचे, जल संसाधन, ऊर्जा, रेल और सड़क परियोजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। राजस्थान जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविधता वाले राज्य के लिए ये क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मरुस्थलीय क्षेत्रों में जल संकट, सीमावर्ती,पहाड़ी और आदिवासी जिलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी और औद्योगिक विकास की आवश्यकता जैसे मुद्दे लंबे समय से चुनौती बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री शर्मा ने राज्य में चल रही प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ नई योजनाओं के लिए भी केन्द्र सरकार से समर्थन मांगा है। यह भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने राजस्थान को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने के उद्देश्य से विशेष पैकेज और नीतिगत सहायता की मांग रखी है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी इस दौरान चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्रियों से हुई बैठकों का महत्व भी कम नहीं है। अलग-अलग मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित कर राज्य सरकार परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय जैसे विभागों के साथ चर्चा से स्पष्ट है कि राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दे रही है। इससे न केवल प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
जानकारों के अनुसार राजनीतिक दृष्टि से भी इन दौरों के कई मायने हैं। यह दौरे ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य सरकार अपना आधे से अधिक कार्यकाल पूरा कर चुकी है तब जनता के बीच विश्वास कायम करना उसके लिए सत्ता में पुनः लौटने के लिए परम आवश्यक है। केंद्र सरकार के साथ मजबूत तालमेल दिखाकर भजन लाल सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह विकास के मुद्दों पर गंभीर है और राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, केवल बैठकों और घोषणाओं से विकास संभव नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की है। राजस्थान में कई परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं, जिनका समय पर पूरा होना बहुत जरूरी है। यदि इन बैठकों के परिणामस्वरूप परियोजनाओं को स्वीकृति मिलती है और उनका क्रियान्वयन तेजी से होता है, तभी इन दौरों का वास्तविक लाभ सामने आएगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मुख्यमंत्री को अब इन बैठकों के ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। समयबद्ध कार्य योजना, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके साथ ही, राज्य स्तर पर प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है, ताकि केंद्र से मिलने वाली सहायता का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
अतः मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरे से राजस्थान के विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत मिले हैं। यदि केंद्र और राज्य के बीच यह समन्वय इसी तरह बना रहता है और योजनाओं को धरातल पर उतारा जाता है, तो आने वाले समय में राजस्थान विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है,इसमें कोई सन्देह नहीं है।




