‘अपेक्षित मौन’ का उद्घोष : विश्व पुस्तक मेले में शब्दों का उत्सव

Evocation of the 'expected silence': A celebration of words at the World Book Fair

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली : विश्व पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का नहीं, विचारों और संवेदनाओं का भी उत्सव है। इसी उत्सव के बीच 15 जनवरी 2026 को भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में लेखक संदीप तोमर की लघुकथा-संग्रह ‘अपेक्षित मौन और अन्य लघुकथाएँ’ का विमोचन एक आत्मीय और स्मरणीय क्षण बन गया।

गरिमामय मंच पर उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकारों—बलराम, बलराम अग्रवाल, आलोक पुराणिक, रामकिशोर उपाध्याय, डॉ. भावना शुक्ल, अर्चना चतुर्वेदी और डॉ. रीतू अग्रवाल—की उपस्थिति ने इस आयोजन को साहित्यिक विश्वास और संवाद का रूप दे दिया। वक्ताओं ने संग्रह को समय के शोर में छिपे मौन की पहचान कराने वाला दस्तावेज़ बताया।

पुस्तक में संकलित लघुकथाएँ समाज के उन पक्षों को उजागर करती हैं, जो अक्सर शब्दों से परे रह जाते हैं—जहाँ चुप्पियाँ बोलती हैं और मौन अर्थ रचता है। वक्ताओं ने कहा कि यह संग्रह न केवल लघुकथा विधा की सशक्त उपस्थिति दर्ज करता है, बल्कि पाठक को भीतर तक विचलित करने की क्षमता भी रखता है।

पटना स्थित स्पर्श प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक विश्व पुस्तक मेले जैसे व्यापक साहित्यिक मंच पर पाठकों से रूबरू हुई—जो लेखक के रचनात्मक सफ़र का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह अवसर न केवल एक पुस्तक के विमोचन का था, बल्कि समकालीन हिंदी साहित्य में लघुकथा की निरंतर सशक्त होती भूमिका का भी साक्ष्य बना।