मुंबई (अनिल बेदाग) : भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा और निर्णायक पल सामने है। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की प्रतिष्ठित प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट अब हॉलीवुड की दिग्गज म्यूज़िक और कंटेंट कंपनी यूनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप (इंटरनेशनल) के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की ओर बढ़ चुकी है। यह करार न सिर्फ एक बिज़नेस डील है, बल्कि भारतीय कंटेंट को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी माना जा रहा है।
पिछले कई महीनों से दोनों कंपनियों के बीच इस साझेदारी को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। यूनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप लंबे समय से भारतीय फिल्म और कंटेंट मार्केट में अपनी मौजूदगी को और मज़बूत करना चाहता था, और एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ यह समझौता उनके लिए भारत में नए अवसरों के दरवाज़े खोलता है। वहीं एक्सेल के लिए यह गठजोड़ उनके उस दीर्घकालिक विज़न के अनुरूप है, जिसके तहत वे अपने प्रोडक्शन स्केल और ग्लोबल पहुंच को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं।
इस डील की सबसे खास बात यह है कि यह माइनॉरिटी हिस्सेदारी पर आधारित है। यानी यूनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप एक्सेल एंटरटेनमेंट में केवल सीमित हिस्सेदारी लेगा, जबकि कंपनी का नियंत्रण, क्रिएटिव आज़ादी और मुख्य स्वामित्व पूरी तरह से फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के पास ही रहेगा। फिल्मों और कंटेंट से जुड़े सभी प्रमुख फैसलों पर एक्सेल की ही निर्णायक भूमिका बनी रहेगी।
इस ऐतिहासिक साझेदारी की आधिकारिक घोषणा एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जाएगी, जिसमें महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है। यह सहयोग माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न से भी जुड़ता है, जिसमें भारतीय रचनात्मकता और कंटेंट को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की बात कही गई है।
गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय पर हो रही है, जब एक्सेल एंटरटेनमेंट अपने 25 शानदार साल पूरे कर रहा है। साल 2001 में दिल चाहता है जैसी कल्ट फिल्म से शुरू हुआ यह सफ़र आज डॉन फ्रेंचाइज़ी, ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा, गली बॉय और फुकरे जैसी यादगार फिल्मों तक पहुंच चुका है। वहीं ओटीटी की दुनिया में भी एक्सेल ने मिर्ज़ापुर, मेड इन हेवन और दहाड़ जैसे सुपरहिट और चर्चित शोज़ के ज़रिए अपनी मज़बूत पहचान बनाई है।
एक्सेल एंटरटेनमेंट और यूनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप की यह साझेदारी निस्संदेह भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के भविष्य की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है—जहाँ देसी कहानियाँ अब और भी दमदार तरीके से ग्लोबल मंच पर गूंजेंगी।





