
- मैं खुद और भारत के लिए बराबर अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं
- रत को 2024 ओलंपिक में कांसा जिताना हमेशा याद रहेगा
- संकट की इस घड़ी में भईया (तेज बहादुर) ने बहुत मदद की
- सरदार सिंह और बीरेन्द्र लाकरा को अपना आदर्श मानता हूं
- एचआईएल से भारत को भविष्य के लिए बराबर लड़के मिलेंगे
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : 26 बरस के राज कुमार पाल ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के कर्मपुर गांव में हॉकी के दीवाने स्वर्गीय तेज बहादुर की कर्मपुर हॉकी एकेडमी में अपने दोनों बड़े भाइयों जोखन पाल और राजू पाल की तरह अपने हॉकी कौशल को मांजा। अब राजकुमार पाल भारतीय पुरुष हॉकी टीम के बेहतरीन मिडफील्डर के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। भारत को 2024 में पेरिस ओलंपिक में कांसा जिताने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें एक करोड़ रुपये के इनाम के साथ पुलिस में डीएसपी बनाने की घोषणा की। भारतीय टीम ब्रिटेन के खिलाफ 2024 के पेरिस ओलंपिक क्वॉर्टर फाइनल में करीब तीन क्वॉर्टर दस खिलाड़ियों से खेलते शूटआउट में राज कुमार पाल के हॉकी की कलाकारी दिखा सबसे दर्शनीय और बेहतरीन गोल से 4-2 की जीती। बुमश्किल एक बीघा(15 बीसा) जमीन के मालिक रहे स्वर्गीय कल्पनाथ पाल और मनराजी देवी को अपने तीन बेटों जोखन पाल, राजू पाल और राज कुमार पाल का पालन पोषण करने के लिए बहुत मुश्किलों से गुजरना पड़ा। कल्पनाथ पाल ने तेज बहादुर जी का ट्रक चलाया और मनराजी देवी ने अपनी करीब एक बीघा जमीन पर घर के गुजारे लायक अनाज और सब्जी लगा कर किसी तरह अपने परिवार को चलाया। राज कुमार पाल को अपनी मां मनराजी देवी और पिता कल्पनाथ पाल का यह संघर्ष आज भी याद है। राज कुमार पाल के पिता कल्पनाथ पाल का निधन तेज बहादुर जी का ट्रक चलाते हुए एक सड़क हादसे में कर्मपुर में तीनों पाल बंधुओं -जोखन, राजू और राज कुमार- का अपने गांव की कर्मपुर हॉकी एकेडमी में हॉकी खेलना बहुत काम आया क्योंकि इसी से तीनों को नौकरी भी मिली। खुद राज कुमार पाल बताते हैं कि इस मुश्किल घड़ी में तेज बहादुर जी ने परिवार की जो मदद की उससे उन्हें बराबर मुश्किल हालात से उबरने में मदद मिली। प्रस्तुत है राज कुमार पाल से नीदरलैंड से फोन पर हुई खास बातचीत ।
राज कुमार पाल बताते हैं, ’ मेरा भारत की सीनियर हॉकी टीम के लिए खेलने का सफर खासा संघर्ष रहा। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे 2024 में पेरिस ओलंपिक में खेलने वाली भारतीय हॉकी टीम में जगह मिली और हमारी टीम इसमें अपना कांसा बरकरार रखने में सफल रही। मैं अब अगले ओलंपिक में भारत के कांसे के रंग बदल कर उसे चमकदार करना चाहता हूं। मैं खुद और भारत के लिए बराबर अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं। अब हमारी भारतीय हॉकी टीम का स्तर खासा उंचा उठा है। पहले हम ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़ी टीमों से हार जाते थे लेकिन अब हमारी भारतीय टीम दुनिया की हर बड़ी टीम को कड़ी टक्कर देती है। बड़ी टीमों के खिलाफ अब हमारा मैच बराबरी का है। मुझे 2022 में टोक्यो ओलंपिक के लिए चुने जाने की उम्मीद थी लेकिन जब मेरा नाम भारतीय टीम में नहीं आया तो बहुत निराशा हुई थी लेकिन मैंने तब खुद से कहा कि शायद मुझमें ही कोई कमी रह गई हो। मैंने पूरा ध्यान अपने खेल को और बेहतर कर अपनी खामियों को सुधारने पर दिया और आखिरी मुझे 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए भारतीय टीम में जगह मिली। 2013 -14 से ही अपने हॉस्टल के दिनों से ही मैं अपना आदर्श भारत के पूर्व कप्तान सेंटर हाफ सरदार सिंह बीरेन्द्र लाकरा को मानता हूं। मैं एरोन जेलवस्की जैसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी का मैं मुरीद हूं। भारत को 2024 के पेरिस ओलंपिक में कांसा जिताना और क्वॉर्टर फाइनल में ब्रिटेन के खिलाफ शूटआउट में गोल करना हमेशा याद रहेगा। मैं भारतीय टीम के लिए कभी आगे खेलता था कभी पीछे लेकिन अब हमारे मौजूदा चीफ कोच क्रेग फुल्टन मुझे बराबर मध्यपंक्ति में खिला रहे हैं। मैं अपना आदर्श भारत के पूर्व कप्तान सेंटर हाफ सरदार सिंह बीरेन्द्र लाकरा को मानता हूं।‘
वह बताते हैं, ’अब लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू हो रही हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) से हमारी भारतीय हॉकी टीम को भविष्य के लिए बराबर लड़के मिलेंगे। भारत को 2024 के पेरिस ओलंपिक में कांसा जिताना और क्वॉर्टर फाइनल में ब्रिटेन के खिलाफ शूटआउट में गोल करना हमेशा याद रहेगा। मैं भारतीय टीम के लिए कभी आगे खेलता था कभी पीछे लेकिन अब हमारे मौजूदा चीफ कोच क्रेग फुल्टन मुझे बराबर मध्यपंक्ति में खिला रहे हैं। मैं अब मिडफील्ड में ही खेल रहा हूं। मेरी खुशकिस्मती है कि मैं भारतीय हॉकी टीम के शिविर में अब एचआईएल में फ्रेंचाइजी टीम एसजी पाइपर्स दिल्ली के चीफ कोच ग्राहम रीड और सहायक कोच शिवा (शिवेंद्र सिंह) भाई के मार्गदर्शन में खेल चुका हूं। रीड मुझसे अच्छे से जानते हैं। हमारे लिए एक और बढ़िया बात यह है कि पेरिस ओलंपिक में भारत को लगातार दूसरी बार कांसा जिताने के बाद अंतर्राष्ट्रीय हॉकी के अलविदा कहने वाले पूर्व ओलंपिक गोलरक्षक पीआर श्रीजेश हमारी एसजी पाइपर्स टीम के हॉकी निदेशक और मेंटोर हैं। साथ ही हमारी टीम में एरोन जेलवस्की जैसे कई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं। श्रीजेश हमारी टीम के भारतीय टीम में ग्राहम रीड के मार्गदर्शन में पहले खेल चुका है। रीड सर के साथ शिवा (भारतीय टीम के सहायक कोच शिवेंद्र सिंह) भाई भी है और इन सभी के साथ हॉकी इंडिया लीग 2024-25 में एसजी पाइपर्स दिल्ली की टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। ‘
राज कुमार पाल बताते हैं, ‘ मेरे दोनों बड़े भाई और जोखन पाल और राजू पाल अपने शोक के लिए कर्मपुर हॉकी अकेदमी में हॉकी खेलते थे। अपने दोनो बड़े भाइयो को हॉकी खेलते देख 2008 में मैंने भी हॉकी खेलनी शुरू की। 2011 में मेरे पिता कल्पनाथ पाल का सड़क दुघर्टना में निधन हो गया। यह वाकई मेरे परिवार के लिए बहुत मुश्किल वक्त था। तेज बहादुर भाई अपने शोक से बच्चों को हॉकी खिलाते थ। 2008 में शुरू हॉकी 2011 में पिता का निधन हो गया था। दो साल काफी आर्थिक दिक्कत आई।कोई भी दिक्कत होती तो तेज बहादुर भईया बराबर आर्थिक मदद करते। जब मैं भी साई हॉस्टल लखनउ चला गया तो मेरी मां ने घर की अपनी मामूली जमीन पर खेती की और की। संकट की इस घड़ी में भईया (तेज बहादुर) ने बहुत मदद की। मेरे दोनों बड़े भाई भी हॉकी खेलने के लिए पहले सैफई हॉ्स्टल और फिर लखनउ में हॉस्टल में चले गए। 2011 ¬-12 जब मेरे भी साई स्पोटर्स हॉस्टल लखनउ जाने की बारी आई तो तब मेरी मां मनराजी देवी ने मुझसे कहा कि तुम भी हॉकी खेलने हॉस्टल जाओ। घर में पर जो भी मामूली खेली और गाय आदि है मैं खुद उसकी देखरेख कर लूंगी। मेरी मां का बहुत योगदान रहा। मैं तब हॉस्टल चला आया ।मैं जब 2012 में साई स्पोटर्स हॉस्टल आ गया। 2016 में एअर इंडिया ने मुझे छात्रवृत्ति पर रख लिया। 2016 से में दो साल एअर इंडिया के लिए खेला। एअर इंडिया में समीर दाद और अर्जुन हालप्पा ने मुझे अपना खेल बेहतर करने में बहुत मदद और मार्गदर्शन किया। हमारे गांव की कर्मपुर हॉकी एकेडमी से अब उत्तम सिंह और पवन राजभर हैं। सबसे पहले अजित पांडे 2016में बतौर स्ट्राइकर भारती की जूनियर विश्व कप कप की टीम में बतौर स्ट्राइकर खेले थे। अब भारत की जूनियर हॉकी में कर्मपुर हॉकी एकेडमी के मनोज यादव और चंदन यादव हैं।‘