
अंबिका कुशवाहा ‘अम्बी’
कविता लिखना सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति का गहरा माध्यम है। वरिष्ठ युवा लेखक नृपेन्द्र अभिषेक नृप द्वारा रचित काव्यसंग्रह “एहसास कभी मिटा नहीं करते” एक अनमोल और उत्कृष्ट कृति है, जो हृदय की भावनाओं को सजीव करती है और पाठक के मन को तृप्त करती है। नृपेन्द्र जी ने अपनी लेखनी की ताकत से पूर्व में ही साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और अपनी जादुई रचनाओं के माध्यम से पाठकों के हृदय में हमेशा विराजमान रहे हैं।
नृपेन्द्र जी के काव्यसंग्रह “एहसास कभी मिटा नहीं करते” में उन्होंने अपने स्मरण, अनुभव, भावनाएँ और विचारों को बहुत ही सुंदर और आकर्षक तरीके से व्यक्त किया है। उन्होंने कविता के छंदों और अलंकारों को मनमोहक ढंग से सजाया है, जो पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस काव्यसंग्रह में जीवन के सभी रूपों का दर्शन मिलता है, जो सामाजिक मुद्दों, संघर्ष, प्रेम, स्मृति, उम्मीद और आत्म-खोज जैसे विषयों पर केंद्रित है। उन्होंने इस संग्रह को सरल और स्पष्ट शब्दों से अलंकृत किया है, जिससे पाठक इसे आसानी से पढ़कर समझ सकते हैं।
काव्यसंग्रह की प्रत्येक कृति में कवि की गहरी भावनाओं के साथ सुस्पष्ट अभिव्यक्तियाँ मौजूद हैं।पुस्तक का शीर्षक “एहसास कभी मिटा नहीं करते” अपने आप में जीवन को समेटे हुए है। एहसास एक ऐसी भावना है जो हमारे अनुभवों और यादों का हिस्सा बन जाती है। इस तरह लेखक शीर्षक के चुनाव के लिए प्रशंसा के पात्र हैं। इस काव्यसंग्रह में कुल 75 कविताएँ सुंदर भाषा-शैली के साथ शोभायमान हैं। संग्रह की प्रथम कविता ‘शहर की सहर’ गाँव की समरसता और शहरों के संघर्ष को दर्शाती है। पंक्ति—
“शहरों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में, सब पीछे ही छूटते जाते हैं।”
यह पंक्ति शहरी जीवन की आलोचना करती है, जिसमें लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा में अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्यों और मूल्यों को भूल जाते हैं।
कविता ‘दोस्ती का अक्स’ की प्रथम पंक्तियाँ—
“जब भी गिरा हूँ राह में, वो संभालता रहा,
बुरे वक्त में भी हर दर्द का मर्ज खोजता रहा।
खामोशियों में भी उसने सुनी है बात मेरी,
बिन कहे भी हर गम मेरा वो बाँटता रहा।”
ये पंक्तियाँ सच्ची दोस्ती की गहरी भावनाओं से भरी हैं। यहाँ दोस्त वह है जो हर परिस्थिति में साथ देता है—चाहे वह मुश्किल वक्त हो या खामोशी का पल। वह न केवल सहारा बनता है, बल्कि बिना कहे भी आपके दुख को समझता और बाँटता है। यह सच्ची दोस्ती की भावना का प्रतीक है—निस्वार्थ, संवेदनशील और अटूट।
कविता ‘उसकी यादें क्यों हैं’ अपने प्रिय के वियोग में गहरी भावनाओं को व्यक्त करती है। इसकी पंक्तियों में मौजूद विरह का दर्द पाठक के हृदय को छूता है।
वहीं, “बेरोजगार बेहाल है” कविता देश में व्याप्त बेरोजगारी और सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार करती है। साथ ही, यह दिन-रात मेहनत करने वाले की दुर्दशा को बयान करती है। यह कविता उत्तेजना से भरी है और लेखक ने अपनी कलम का जादू बखूबी चलाया है।
‘उन्हें अब वक्त नहीं’ कविता असंवेदनशील होते रिश्तों पर प्रकाश डालती है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि लोग कैसे सिर्फ स्वार्थपूर्ति तक ही रिश्तों को महत्व देते हैं। कुल मिलाकर, इस काव्यसंग्रह की प्रत्येक कविता गहरे मनोभावों और संवेदनाओं से भरी हुई लाजवाब लेखनी का नमूना है।
नृपेन्द्र अभिषेक नृप का काव्यसंग्रह “एहसास कभी मिटा नहीं करते” एक ऐसी कृति है जो न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए अनमोल उपहार है, बल्कि हर उस पाठक के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो जीवन के विभिन्न रंगों को गहराई से समझना चाहता है। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, सादगी और गहनता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है, जो इस संग्रह को विशिष्ट बनाता है। यह काव्यसंग्रह पाठकों को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करता है और भावनाओं के उस संसार में ले जाता है, जहाँ एहसास सचमुच कभी मिटते नहीं। निस्संदेह, यह पुस्तक हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है और नृपेन्द्र जी की सशक्त लेखनी का प्रमाण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रासंगिक रहेगी।
पुस्तक: एहसास कभी मिटा नहीं करते
लेखक: नृपेन्द्र अभिषेक “नृप”
प्रकाशन: लायंस पब्लिकेशन, ग्वालियर (M.P)
मूल्य: 180 रुपये
प्रथम संस्करण : April 2025