पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026आदिवासी खिलाड़ियों के लिए प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन मौका : दिलीप तिर्की

First Khelo India Tribal Games 2026 is a great opportunity for tribal players to showcase their talent: Dilip Tirkey

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 109 स्वर्ण पदक दांव पर

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : आदिवासी खेल प्रतिभाओं को पहचान देने के मकसद से छत्तीसगढ़ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (केआईटीजी) 2026 की मेजबानी करेगा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारत सरकार की खेलो इंडिया पहल के तहत स्थापित एक राष्ट्रीय खेल मंच है। इन खेलों का मकसद देश भर के आदिवासी समुदायों से खेल प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें संवारना और उन्हें सम्मानित करना है। ये खेल भारत के आदिवासी क्षेत्रों को खेल प्रतिभा का विशाल, काफी हद तक अनछुआ भंडार मानने की मान्यता पर आधारित, है। इनका मकसद सर्वोच्च स्तर पर आदिवासी एथलीटों को प्रतिस्पर्धी अनुभव दिलाने के साथ सदियों में इन समुदायों में पल्लवित स्वदेशी खेल परंपराओं का सम्मान करना है । खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश शिरकत करेंगे और इनमें कुल नौ खेल -जिसमें सात प्रतिस्पर्द्धी खेल (हॉकी , फुटबाल, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती) और दो प्रदर्शनी खेलो (मलखंब और कबड्डी)- होंगे। प्रतिस्पर्द्धी खेल -तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे। मलखंब और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल प्रदर्शनी खेलों के रूप में होंगे। लगभग 3800 प्रतिभागी इन खेलों में भाग लेंगे, जो 3 अप्रैल को समाप्त होंगे। ये खेल रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा शहरों में खेले जाएंगे।

खेलो इंडिया ट्राइबल खेलों में 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। बुधवार से शुरू हो रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की बाबत भारत के लिए सबसे ज्यादा चार ओलंपिक खेलने वाले पूर्व ओलंपिक कप्तान दिलीप तिर्की, भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे और फर्राटा धावक अनिमेष कुजूर ने कहा , ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स खेलो में करियर बनाने और आदिवासी समुदाय से उभरे कई दिग्गजों का अनुकरण करने के लिए एक बेहतरीन मंच है।’

हॉकी ओलंपियन और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) मीडिया से कहा, ‘ मुझ सहित हम सभी के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि देश में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल खेल होने जा रहे हैं। सभी नौजवान और आदिवासी खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और खेलों में आगे बढ़ने और देश के लिए खेलने का यह बेहतरीन मौका है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य भारत को खेल राष्ट्र बनाना है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सभी युवा खेलों से जुड़े और कोई न कोई खेल खेलें। हमारे सभी आदिवासी खिलाड़ियों और बच्चों को भी खेलों के जरिए अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए, देश के लिए खेलना चाहिए,करियर बनाना चाहिए ।प्रधानमंत्री का 2036 के ओलंपिक खेलों और एक विकसित भारत के लिए यह विजन है कि हमारा देश एक युवा और खेल-प्रेमी राष्ट्र बने। वहीं माननीय खेल मंत्री डॉ.मनसुख मांडविया भी चाहते हैं खेलों के जरिए हमारे एथलीट, खासतौर पर आदिवासी एथलीट बेहतर करियर बना सके। अपना जीवन बेहतर बनाने के साथ देश की नुमाइंदगी कर सके। मेरा यह पक्का विश्वास है कि हर आदिवासी बच्चे का कोई न कोई सपना होता है। मैं खुद आदिवासी परिवार से आता हू। मैं खेलों में हॉकी के जरिए आज इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं। मेरा मानना इन खेलों में शिरकत करने वाले सभी आदिवासी बच्चों का भविष्य उज्जवल है। इससे पहले भी कई आदिवासी एथलीट भारत की नुमाइंदगी कर हमारे आदिवासी समाज का प्रतीक बन चुके हैं।

मेजबान छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और असम जैसे चार प्रमुख राज्यों का इन खेलों में सबसे बड़ी नुमाइंदगी और इसमें इनके हर राज्य के सौ सौ से ज्यादा एथलीट शिरकत करेंगे। इन खेलों में पुरुष और महिला एथलीट की नुमाइंदगी होगी। ऐसा लेंगिक समानता को जारी रखने और ओलंपिक चार्टर को ध्यान में रख कर किया गया है। खेलों इंडिया ट्राइबल खेलों में कुल दांव पर कुल 106 स्वर्ण पदक ों में सबसे ज्यादा 34 स्वर्ण पदक एथलेटिक्स में दांव पर होंगे। इसके बाद तैराकी में 24, कुश्ती में 18 ,भारोत्तोलन में 16, तीरंदाजी में 10 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। हॉकी और फुटबॉल दो टीम गेम्स होंगे और ये रायपुर में होंगे। एथलेटिक्स मुकाबले जगदलपुर में कुश्ती मुकाबले सरगुजा में होंगे।

100 और 200 मीटर की दौड़ के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी और भारतीय एथलेटिक्स की सनसनी अनिमेष कुजूर ने साई मीडिया से कहा,‘ भारत में कई ऐसी जगह हैं जहां खेल नहीं पहुंच पाए हैं। यही खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और और खास बना देता है। मैं सरकार के छत्तीसगढ़ में खेलों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आदिवासी क्षेत्रों के युवा खेल प्रेमियों को एक साथ लाने की इस पहल के लिए किए प्रयासों का सम्मान करता हूं।’