‘आखर थोरे’ में डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ की पाँच लघुकथाएँ शामिल, देश के 51 लघुकथाकारों में मिली जगह

Five short stories by Dr. Priyanka Saurabh are included in 'Akhar Thore' and are listed among the 51 short story writers of the country

रविवार दिल्ली नेटवर्क

हिसार की प्रख्यात दैनिक संपादकीय लेखिका एवं राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ को हिंदी लघुकथा के प्रतिष्ठित संग्रह ‘आखर थोरे’ में स्थान मिला है। वरिष्ठ कथाकार बलराम अग्रवाल के संपादन में प्रकाशित यह कृति दुनिया की 100 शब्दों की लघुकथाओं पर आधारित दूसरी बड़ी पुस्तक मानी जा रही है। इसमें देशभर के 51 चयनित लघुकथाकारों की रचनाएँ संकलित हैं।

इस महत्वपूर्ण संग्रह में डॉ. प्रियंका सौरभ की पाँच लघुकथाएँ— ‘अधूरी चिट्ठी’, ‘रसोई की दीवारें’, ‘दहेज के पंख’, ‘घर लौटती स्त्री’ और ‘बिंदी का रंग’—शामिल की गई हैं। ये लघुकथाएँ स्त्री-संवेदना, सामाजिक असमानता, पारिवारिक रिश्तों और ग्रामीण जीवन की सच्चाइयों को संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करती हैं।

डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ हिंदी और अंग्रेज़ी—दोनों भाषाओं में समान दक्षता के साथ लेखन करती हैं। अब तक उनके 10,000 से अधिक संपादकीय, लेख और विचार-आलेख देश-विदेश के प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकों में काव्य संग्रह ‘दीमक लगे गुलाब’, ‘चूल्हे से चाँद तक’ और ‘मौन की मुस्कान’, बाल साहित्य ‘परियों से संवाद’ और ‘बच्चों की दुनिया’, निबंध संग्रह ‘समय की रेत पर’ व ‘निर्भयें’, अंग्रेज़ी पुस्तक ‘Fearless’, लघुकथा संग्रह ‘आँचल की चुप्पी’ तथा नवीन कृति ‘खिड़की से झांकती ज़िंदगी’ शामिल हैं।

‘आखर थोरे’ में उनका चयन लघुकथा विधा में उनकी सशक्त साहित्यिक उपस्थिति और रचनात्मक योगदान को रेखांकित करता है। इस उपलब्धि पर साहित्यिक जगत में उन्हें हार्दिक बधाइयाँ दी जा रही हैं।