प्रो. आरके जैन “अरिजीत”
जब किसी देश के गांव बदलते हैं, तभी उसका भविष्य बदलता है। आज भारत के गांवों में ऐसा ही ऐतिहासिक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। कभी पंचायत कार्यालयों में धूल खाती फाइलें, महीनों तक रुके भुगतान और विकास योजनाओं पर उठते सवाल आम थे। लेकिन अब वही ग्राम पंचायतें डिजिटल व्यवस्था के बल पर नई पहचान बना रही हैं। ईग्रामस्वराज पोर्टल के माध्यम से ₹3 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान होना केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि गांवों में बदलती व्यवस्था का मजबूत प्रमाण है। यह सफलता बताती है कि अब विकास का धन कागजों में नहीं अटकता, बल्कि सीधे जरूरत और काम तक पहुंचता है। भारत के गांव अब केवल विकास की प्रतीक्षा नहीं कर रहे, बल्कि स्वयं विकास की दिशा तय कर रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बदलाव ने पंचायतों के कामकाज का पूरा स्वरूप बदल दिया है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित ईग्रामस्वराज पोर्टल, ई-पंचायत अभियान का एकीकृत मंच है, जहां योजना, बजट, लेखा, निगरानी और भुगतान की पूरी प्रक्रिया एक साथ पूरी होती है। पहले ग्राम पंचायतों को अलग-अलग रजिस्टर, विभागीय मंजूरी और कागजी कार्यवाही पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे समय अधिक लगता था और गड़बड़ी की आशंका भी बनी रहती थी। अब पंचायतें गांव की जरूरत के अनुसार योजना बनाती हैं, उसे पोर्टल पर दर्ज करती हैं और काम पूरा होते ही भुगतान जारी कर देती हैं। सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली से जुड़ाव के कारण हर लेन-देन तुरंत दर्ज होता है और उसका पूरा विवरण सुरक्षित रहता है।
जहां कभी गांवों में विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रहती थीं, वहीं आज वही गांव डिजिटल बदलाव की मिसाल बन रहे हैं। मार्च 2026 तक ईग्रामस्वराज पोर्टल से ₹3 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है। केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही ₹53,342 करोड़ का हस्तांतरण हुआ। यह बताता है कि गांवों ने डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपनाया है। आज 2,59,798 पंचायती राज संस्थाएं और 1.60 करोड़ से अधिक विक्रेता इस मंच से जुड़े हैं। साथ ही 2,55,254 ग्राम पंचायतें अपनी विकास योजनाएं पोर्टल पर अपलोड कर चुकी हैं। इतनी बड़ी भागीदारी सिद्ध करती है कि ग्रामीण भारत अब तकनीक से दूर नहीं, बल्कि उसके साथ आगे बढ़ रहा है। गांवों की चौपाल से पंचायत भवन तक अब डिजिटल सोच पहुंच चुकी है।
जहां पहले पंचायतों के खर्च और योजनाएं लोगों से छिपी रहती थीं, वहीं अब हर जानकारी सबके सामने है। यही इस व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है—पारदर्शिता और जवाबदेही। पहले गांवों में यह जानना कठिन था कि पंचायत को कितनी राशि मिली और वह कहां खर्च हुई। योजनाओं की जानकारी अक्सर कुछ लोगों तक सीमित रहती थी। अब ईग्रामस्वराज पोर्टल पर हर पंचायत का पूरा हिसाब उपलब्ध है। कोई भी नागरिक देख सकता है कि किस योजना के लिए कितनी राशि मिली, कितना खर्च हुआ और कौन-सा काम किस स्थिति में है। इससे ग्राम सभा केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि निगरानी और निर्णय का मजबूत मंच बन गई है। जनता को जानकारी मिलते ही पंचायतों की जवाबदेही बढ़ती है और लोकतंत्र की जड़ें गहरी होती हैं।
सबसे बड़ा बदलाव गांव की अर्थव्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पहले छोटे दुकानदारों, स्थानीय ठेकेदारों और सेवा देने वालों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार उन्हें पंचायत कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। अब भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। समय पर धन मिलने से छोटे व्यवसायियों का भरोसा बढ़ा है और गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता अभियान, विद्यालय मरम्मत और सामुदायिक भवन जैसे कार्य अब पहले से अधिक तेजी से पूरे हो रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ा है और गांवों की अर्थव्यवस्था को नया सहारा मिला है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदलाव केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज को नई शक्ति दे रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पंचायत सहायता प्रणाली अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इससे गांव के लोग अपनी भाषा में पंचायत की कार्यवाही और योजनाओं को आसानी से समझ पा रहे हैं। पहले कठिन सरकारी भाषा और प्रक्रियाओं के कारण महिलाएं, किसान और युवा पंचायत से दूर रहते थे। अब वही लोग सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। महिलाएं घर बैठे योजनाओं की जानकारी देख रही हैं, किसान विकास कार्यों की स्थिति समझ रहे हैं और युवा पंचायत के निर्णयों पर नजर रख रहे हैं। इस प्रकार ईग्रामस्वराज केवल डिजिटल मंच नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी का नया आधार बन गया है।
यह सफलता जितनी बड़ी है, उसका सफर उतना ही कठिन रहा है। देश के अनेक दूरस्थ गांवों में इंटरनेट की कमी, अनियमित बिजली और डिजिटल जानकारी का अभाव बड़ी बाधाएं थे। शुरुआत में कई पंचायत प्रतिनिधि और कर्मचारी नई व्यवस्था को समझ नहीं पा रहे थे। लेकिन लगातार प्रशिक्षण और सरल प्रणाली ने यह मुश्किल दूर कर दी। पंचायत प्रतिनिधियों को तकनीकी प्रशिक्षण मिला, गांवों तक डिजिटल उपकरण पहुंचे और पोर्टल को इतना आसान बनाया गया कि कम पढ़े-लिखे लोग भी इसका उपयोग कर सकें। यही कारण है कि आज 2.5 लाख से अधिक पंचायतें इस मंच से जुड़ चुकी हैं। यह साबित करता है कि मजबूत संकल्प के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है।
आज ईग्रामस्वराज पोर्टल गांवों में आए परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। यह केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। आने वाले समय में सरकारी ई-बाजार से जुड़ाव, तात्कालिक विवरण पट और उन्नत निगरानी जैसी सुविधाएं इसे और प्रभावी बनाएंगी। इससे पंचायतों के कामकाज में अधिक तेजी, पारदर्शिता और विश्वसनीयता आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिजिटल शासन अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंच चुका है। ग्राम पंचायतें सशक्त होंगी, तभी देश सशक्त होगा। और जब हर नागरिक अपनी पंचायत के कामकाज पर नजर रखेगा, तभी सच्चे अर्थों में स्वराज स्थापित होगा—ऐसा स्वराज जो पारदर्शी, जवाबदेह और जनता के हाथों में हो।





