पृथ्वी पर जीवन के आधार स्तंभ हैं वन

Forests are the pillars of life on Earth

पृथ्वी पर विद्यमान जैव विविधता के अलावा वन भी समस्त मानव जाति के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसीलिए लोगों को वनों के महत्व के प्रति जागरूक करने, इनके संरक्षण के लिए समाज का योगदान हासिल करने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 21 मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस’ मनाया जाता है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन दशकों में विश्वभर में करीब एक अरब एकड़ क्षेत्र में वन नष्ट हो गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस प्रतिवर्ष एक खास विषय के साथ मनाया जाता है और इस बार का विषय है ‘वन और अर्थव्यवस्थाएं’।

योगेश कुमार गोयल

पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता केवल मनुष्य या अन्य जीवों के अस्तित्व पर निर्भर नहीं करती बल्कि वृक्षों और वनों की उपस्थिति भी उतनी ही अनिवार्य है। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में जंगलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वन केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं बल्कि वे असंख्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास, भोजन और सुरक्षा के आधार भी हैं। पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे आवश्यक तत्व ऑक्सीजन है और इसका सबसे बड़ा स्रोत वन ही हैं। पेड़-पौधे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसे ऑक्सीजन में परिवर्तित करते हैं, जिससे पृथ्वी का पर्यावरण संतुलित बना रहता है।

वनों का महत्व केवल ऑक्सीजन तक सीमित नहीं है। वे वर्षा चक्र को बनाए रखने, तापमान को नियंत्रित करने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता को संरक्षित रखने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। वृक्षों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से थामे रखती हैं, जिससे भारी वर्षा के दौरान भी भूमि का क्षरण कम होता है और बाढ़ जैसी आपदाओं की संभावना घटती है। जंगलों की उपस्थिति पृथ्वी की जैव विविधता को जीवंत बनाए रखने में भी अहम है क्योंकि अनेक वनस्पतियां और जीव-जंतु केवल जंगलों में ही पनप सकते हैं।

दुर्भाग्य से बीते कुछ दशकों में दुनिया भर में वनों की अंधाधुंध कटाई ने इस प्राकृतिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बढ़ती आबादी, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और विकास परियोजनाओं के कारण जंगलों का क्षेत्र लगातार सिकुड़ता जा रहा है। इसके साथ ही जंगलों में लगने वाली भीषण आग भी वनों के विनाश का बड़ा कारण बन रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार पिछले लगभग तीन दशकों में विश्व भर में करीब एक अरब एकड़ वन क्षेत्र समाप्त हो चुका है। एक समय पृथ्वी की लगभग आधी भूमि वनों से आच्छादित थी लेकिन आज यह क्षेत्र घटकर लगभग 30 प्रतिशत रह गया है। वनों के लगातार घटते क्षेत्र का असर मानव जीवन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जलवायु परिवर्तन, असामान्य मौसम, सूखा, बाढ़ और तापमान में वृद्धि जैसी समस्याएं उसी का परिणाम हैं। यदि वनों की संख्या कम होती रही तो भविष्य में स्वच्छ वायु, उपजाऊ मिट्टी और शुद्ध जल जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का संकट भी गहरा सकता है।

इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी दुनिया में लोगों को वनों के महत्व के प्रति जागरूक करने और उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से हर वर्ष 21 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2012 में इस दिवस को औपचारिक रूप से घोषित किया था। इसके बाद से हर वर्ष यह दिवस संयुक्त राष्ट्र वन मंच और खाद्य एवं कृषि संगठन के सहयोग से मनाया जाता है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यूरोप में वनों की तेजी से हो रही कटाई को लेकर चिंता के कारण 1971 में यूरोपीय कृषि परिसंघ की बैठक में वन दिवस मनाने का विचार सामने आया था। अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर हर वर्ष एक विशेष विषय भी निर्धारित किया जाता है, जिसके माध्यम से वनों के महत्व को नए दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाता है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस की थीम ‘वन और अर्थव्यवस्थाएं’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य यह रेखांकित करना है कि वन केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं बल्कि वैश्विक आर्थिक समृद्धि के महत्वपूर्ण आधार भी हैं।

वन जल संसाधनों की रक्षा करते हैं, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं और अनेक परागण करने वाले जीवों को आश्रय देते हैं, जो कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। विशेष रूप से वन-आधारित समुदायों और आदिवासी समाजों के जीवन में जंगलों का महत्व अत्यधिक है। इसके साथ ही जंगल कार्बन को अपने भीतर संग्रहित करके जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी सहायक होते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि पूरी दुनिया मिलकर वनों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए। 2021 में ग्लासगो में आयोजित जलवायु सम्मेलन में सौ से अधिक देशों ने वर्ष 2030 तक वनों की कटाई को रोकने का संकल्प लिया था। यदि इस संकल्प को गंभीरता से लागू किया जाए और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण तथा वन संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए तो पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वास्तव में वन केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, पृथ्वी पर जीवन के आधार स्तंभ हैं। यदि इन्हें बचाने के लिए समय रहते प्रभावी प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य की कल्पना करना कठिन हो जाएगा।