
सुनील कुमार महला
जल मनुष्य ही नहीं इस धरती के समस्त प्राणियों व वनस्पतियों की मूलभूत आवश्यकता है। जल बिना जीवन संभव नहीं है। वास्तव में,पंचतत्व जीवन के लिए आधार माने गए हैं। उसमें से एक तत्व जल भी है। एक शोध के मुताबिक आज जिस रफ्तार से जंगल खत्म हो रहे हैं उससे तीन गुना अधिक रफ्तार से जल के स्रोत सूख रहे हैं। नीति आयोग के ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स)’ की माने तो भारत के लगभग 600 मिलियन से अधिक लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में इस बात का भी अंदेशा जताया गया है कि साल 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति की तुलना में दोगुनी हो जाएगी। बहरहाल,पाठकों को बताता चलूं कि हाल ही हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 120वें एपिसोड के जरिए देश की आम जनता से रूबरू हुए। गौरतलब है कि’मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समर वेकेशन और जल संचय को लेकर खास संदेश दिया है।उन्होंने ‘मन की बात’ के दौरान देशवासियों को ‘जल संरक्षण’ का महत्वपूर्ण संदेश दिया है। पाठकों को बताता चलूं कि पीएम मोदी ने कहा, ‘गर्मी के मौसम में पानी बचाने का अभियान भी शुरू हो जाता है। विभिन्न जगहों पर वाटर हॉर्वेस्टिंग का काम शुरू हो गया है। इसके लिए अलग-अलग संस्थाएं काम करती हैं। इस बार भी ‘कैच द रेन अभियान'(वर्षा जल संचयन) के लिए कमर कस ली गई है। ये अभियान सरकार का नहीं बल्कि जनता का अभियान है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर ‘जल शक्ति अभियान: कैच-द-रेन’ को प्रारंभ किया गया था। यह अभियान 22 मार्च से 30 नवंबर 2021 ( मानसून पूर्व एवं मानसून अवधि) तक ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में चलाया गया था तथा इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण एवं जल संचयन संरचनाओं का निर्माण करना तथा जागरूकता फैलाना है, ताकि वर्षा जल का उचित भण्डारण किया जा सके।अब प्रधानमंत्री जी ने पुनः इसकी बात की है, जो जल संरक्षण में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात कही है कि ‘प्रयास यही है कि जो प्राकृतिक संसाधन हमें मिले हैं, उन्हें अगली पीढ़ी तक हमें पहुंचाना है। इस अभियान के तहत पिछले कुछ सालों में देश के कई हिस्सों में जल संरक्षण के कई दिलचस्प काम हुए हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘ पिछले 7-8 साल में नए बने टैंक, तालाब और अन्य ‘वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर'(जल पुनर्भरण संरचना) से 11 बिलियन(1100 करोड़) क्यूबिक मीटर से भी ज्यादा पानी का संरक्षण हुआ है।’ बहरहाल, कहना ग़लत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जल संरक्षण पर जोर देकर देश की जनता को सही समय पर एक सही संदेश देने का काम किया है। वास्तव में, पिछले सात-आठ वर्षों में जल संरक्षण के विभिन्न उपायों के जरिये 1100 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी बचाने में सफलता मिली, यह बात देश की आम जनता को कहीं न कहीं जल संरक्षण के प्रति उत्साहित व प्रेरित करेगी। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज जल संरक्षण बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्यों कि बढ़ती आबादी व बढ़ते औधोगिकीकरण की जरूरतों को तभी पूरा किया जा सकता है,जब हम जल की बूंद-बूंद बचायेंगे। हम अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर भरपूर मात्रा में जल संरक्षण कर सकते हैं। मसलन हम केवल तभी फ्लश करें जब ऐसा करना ज़रूरी हो।नहाने की बजाय हमें जल्दी से शॉवर लेना चाहिए। वास्तव में,शॉवर या पाइप से नहाने की बजाय बाल्टी से स्नान करना चाहिए।हमें यह चाहिए कि जब भी हम ब्रश व दाढ़ी (शेव) करें तब नल को बंद कर दें।अपशिष्ट जल को सिंक में फेंकने के बजाय, उसे बचाकर रखा जा सकता है और अन्य कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।टपकता नल, बहता शौचालय या टपकता पाइप भारी मात्रा में पानी की बर्बादी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए हर लीकेज को ठीक रखें। पानी को कभी भी बहता हुआ नहीं छोड़ा जाना चाहिए। वर्षा जल संचयन बहुत ही महत्वपूर्ण और जरूरी है।भूमिगत जल की रिचार्जिंग तथा व्यय को रोका जाना चाहिए।सब्ज़ियों/फलों आदि को धोने के बाद बचा पानी बाग-बगीचे में डालना चाहिए। जल संरक्षण के लिए हमें स्मार्ट सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। मसलन,टपकन टैंक/ड्रिप/स्प्रिंकल सिंचाई के उपयोग से सिंचाई जल के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है।फसल उगाने के तरीकों का प्रबंधन करके; जैसे कि कम जल क्षेत्रों में ऐसे पौधों का चयन करके जिनकी पैदावार के लिए कम पानी की जरूरत हो, काफी मात्रा में जल संरक्षण किया जा सकता है।कार को बाल्टी के पानी से धोना या कमर्शियल कार वॉश का इस्तेमाल करना चाहिए।ड्राइववे, फुटपाथ, और सीढ़ियों को पानी से धोने के बजाय साफ़ करना चाहिए। कहना ग़लत नहीं होगा कि घरेलू स्तर पर जल का उचित व संयमित उपयोग एवं उद्योगों में पानी के चक्रीय उपयोग जल संरक्षण में सहायक हो सकते हैं।जल का सदुपयोग कैसे करना है, इस दिशा में जन-जागरूकता बढ़ायी जाने की आवश्यकता है।प्राचीन भारत में जल संरक्षण के लिए कई उपाय अपनाए जाते थे।इनमें जोहड़ ,बावलियां(बावड़ियां), कुएं, तटबंध, जलाशय, और जलग्रहण क्षेत्र शामिल हैं, इनका पुनरूद्धार किया जाना चाहिए। यह ठीक है कि आज सरकार व विभिन्न संस्थाएं जल संरक्षण के लिए नीतिगत स्तर पर उल्लेखनीय कार्य कर रहें हैं, लेकिन अभी भी इस दिशा में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज विभिन्न जल स्त्रोतों की समय-समय पर साफ-सफाई की जरूरत है।जल निकायों के जीर्णोद्धार और पुनरुद्धार,जल संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना,जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना तथा जल संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना और जल संरक्षण के लिए लोगों को जोड़ना बहुत ही महत्वपूर्ण और जरूरी है। आज जरूरत इस बात की है कि विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं के साथ आम आदमी भी जल संरक्षण के लिए आगे आए और कृतसंकल्पित होकर कार्य करें। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज के समय हमारे देश में पानी को बचाने के वैसे उपाय नहीं किए जा रहे हैं जैसे कि आवश्यक हैं। ऊपर जानकारी दे चुका हूं कि वर्षा जल संचयन करके हम जल संरक्षण में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं। आज वर्षा ऋतु में बहुत सा जल बेकार चला जाता है। सरकार और समाज की यह कोशिश होनी चाहिए कि वर्षा जल का अधिकाधिक संग्रह किया जा सके, क्योंकि भारत उन देशों में प्रमुख है जहां जल संकट एक बड़ी समस्या के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। कहना ग़लत नहीं होगा कि भारत में जल संकट एक गंभीर समस्या है। वास्तव में इस जल संकट के कई कारण हैं, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, भूजल दोहन, और जल निकायों का प्रदूषण।इस समस्या से लाखों करोड़ों लोगों की ज़िंदगी और आजीविका दोनों समान रूप से प्रभावित हो रही है।यह अनुमान लगाया गया है कि भारत 2025 तक पानी की कमी वाला देश बन जाएगा, इसलिए जल संरक्षण आवश्यक है। जल धरती का एक असीमित नहीं बल्कि सीमित संसाधन है और इसका विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है।जल संरक्षण के प्रयासों को कितनी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, इसे इससे समझा जा सकता है कि भारत में दुनिया की 17 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, जबकि उसके उपयोग के लिए उपलब्ध जल चार प्रतिशत से भी कम है। यह एक कटु व बड़ा सत्य है कि देश में अत्यधिक जल दोहन तथा अकुशल प्रबंधन के कारण भू-जल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है और इसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में देश को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।नीति आयोग के अनुसार, वर्तमान में स्वच्छ जल की अपर्याप्त पहुँच के कारण लगभग 60 करोड़ भारतीय गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं तथा इसके कारण प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख लोगों की मृत्यु होती है।स्पष्ट है कि जल संरक्षण की चिंता पूरे वर्ष की जानी चाहिए। अंत में यही कहूंगा कि जल संरक्षण का काम केवल सरकार और उसकी एजेंसियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। यह हम सबकी साझा व नैतिक जिम्मेदारी है और इसका निर्वहन इसी रूप में किया जाना चाहिए। वास्तव में भू-जल प्रबंधन, कुशल सिंचाई प्रबंधन एवं वर्षा जल संचयन उपायों को अपनाकर भविष्य के जल संकट को कम किया जा सकता है।