‘गीता धाम मंदिर’ वसुंधरा में धूम-धाम से मना हनुमान जन्मोत्सव

Hanuman Jayanti celebrated with great pomp at 'Geeta Dham Mandir' Vasundhara

दीपक कुमार त्यागी

गाजियाबाद : हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर ‘गीता धाम मंदिर’ सेक्टर 5 वसुंधरा गाजियाबाद में हनुमान जी का जन्मदिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया गया। इस अवसर सभी भक्तो ने हनुमत पाठ कीर्तन के साथ प्रसाद का आनंद लिया।

इस अवसर पर हनुमान जी के जन्म की सूक्ष्मकथा पर बोलते हुए ‘शिव गुरु चिंतन धारा फाउंडेशन’ के अध्यक्ष व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य पंडित शिव चरण शर्मा (पंडित शिवगुरु) ने हनुमान जी का दिव्य जन्म रहस्य से भक्तों को अवगत करवाया। पंडित शिव चरण शर्मा (पंडित शिवगुरु) ने बताया कि त्रेतायुग में भगवान शिव ने भगवान विष्णु के राम अवतार में सेवा करने हेतु स्वयं अंश रूप में जन्म लेने का संकल्प किया था। उसी समय, एक अप्सरा अंजना (जो शापवश वानरी बनी थीं) और उनके पति केसरी (वानरराज) ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तप किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वरदान दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे। पवन देव का दिव्य सहयोग उसी समय अयोध्या में राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ कर रहे थे। उस यज्ञ का दिव्य प्रसाद (खीर) वायु देव के माध्यम से माता अंजना तक पहुँचा। उस प्रसाद के प्रभाव से और शिवजी के अंश से चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ। बाल्यकाल की अद्भुत लीला जन्म लेते ही उनमें अद्भुत शक्ति थी। एक दिन उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने के लिए आकाश में छलांग लगा दी। यह देखकर इन्द्र ने वज्र से प्रहार किया, जिससे उनकी ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी। इसी कारण उनका नाम पड़ा हनुमान (हनु + मान = जिनकी ठोड़ी विशेष है)

देवताओं के वरदान से इस घटना के बाद सभी देवताओं ने हनुमान जी को अनेक शक्तियाँ दीं, उन्हें असीम बल और बुद्धि, रोग और भय से मुक्ति देने की शक्ति अमरता का वरदान किया, वैसे भी आध्यात्मिक संकेत (गूढ़ अर्थ) के अनुसार हनुमान जी केवल एक देव नहीं, बल्कि भक्ति (राम के प्रति समर्पण) शक्ति (अद्भुत बल) बुद्धि (ज्ञान और विवेक) इन तीनों का संगम है।