प्रो. नीलम महाजन सिंह
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘नारी का सम्मान, बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, लखपति दीदी’ वगैरह की बात करते हैं। हिंदू कॉलेज के एक मामूली से, हरदीप सिंह पुरी में ऐसा क्या अनोखा है, जो वह बीजेपी का ‘ब्लू आइड स्वाइन’ बना हुआ है? उसे ताकतवर लोगों से बर्थडे मैसेज क्यों मिले, जबकि वह नाबालिग, छोटी लड़कियों के शारीरिक शोषण, सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेशन करने वाले ‘इपस्टीन फाइल्स ग्लोबल स्कैंडल’ में शामिल है, जिनकी अभी प्यूबर्टी भी नहीं हुई है? यह घिनौना और बेतुका है कि हरदीप सिंह पुरी जैसे आदमी को अभी तक अरेस्ट नहीं किया गया है। फ़िर पेट्रोलियम व नेचुरल गैस मिनिस्टर के पद से इस्तीफा देना तो दूर की बात है। उसके एक दोषी अमेरिकी सेक्स ऑफेंडर, जेफरी इपस्टीन के साथ व्यक्तिगत रिश्ते थे जिसने दुनिया भर की चेतना को झकझोर दिया है। हरदीप सिंह पुरी नाम के इस आदमी ने 2014 से 2017 के बीच बाल सेक्स अपराधी, जेफरी एपस्टीन के साथ कई ईमेल भेजे व मीटिंग की हैं। इससे एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें विपक्षी पार्टियां उनके इस्तीफे की मांग कर रही हैं, जबकि पुरी बेशर्मी से अपने कुकर्मो का बचाव कर रहा है, व कह रहे हैं कि वे ‘प्रोफेशनल थे और उस समय उन्हें एपस्टीन के क्रिमिनल बैकग्राउंड की पूरी जानकारी नहीं थी।’ ओह, यह बेवकूफ कितना मासूम है? ये डॉक्यूमेंट्स व ई-मेल्स, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने पब्लिक किए हैं। ईपस्टीन फाइल्स से पता चलता है कि पुरी, एपस्टीन से उनके मैनहट्टन टाउनहाउस में चार बार मिले था: 4 फरवरी, 2015, 6 जनवरी, 2016 और 19 मई, 2017। ई-मेल्स से पता चलता है कि इनमे अच्छी जान-पहचान थी। भारत की ‘डिजिटल इंडिया पहल, इन्वेस्टमेंट के मौके और नेटवर्किंग’ पर चर्चा भी शामिल रही है। दिसंबर 2014 के एक ईमेल में, पुरी ने एपस्टीन को लिखा, “आप अपने अनोखे आइलैंड से कब वापस आएँगें; बात करने के लिए मिलेंगें”। हरदीप सिंह पुरी का बचाव यह है कि उन्हें ईपस्टीन के अपराधों के बारे में जानकारी नहीं थी। पुरी ने बताया कि वह एपस्टीन से इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) और इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज़्म (ICM) के साथ अपने जुड़ाव के ज़रिए मिले था, जब वह ‘एक प्राइवेट नागरिक के तौर पर काम कर रहा था, न कि सरकारी अधिकारी के तौर पर’। मिस्टर पुरी, आपको एक दोषी सेक्स अपराधी व एक दलाल को भारत की मार्केटिंग करने के लिए किसने ऑथराइज़ किया था? उन्होंने तर्क दिया कि वह ‘मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया’ जैसे भारतीय बिज़नेस मौकों की वकालत कर रहा था, और उसका इन्वेस्टमेंट पर फ़ोकस था, न कि उन गैर-कानूनी कामों पर जिनमें एपस्टीन शामिल था। जेफ़री एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को “दोमुंहा” कहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत की संसद में एपस्टीन फ़ाइल्स स्कैंडल उठाया है, व पुरी पर “मीटिंग्स की हद के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाया है, कि 62 ईमेल एक्सचेंज और 14 मीटिंग्स हुईं”, व मोदी सरकार से उनके इस्तीफ़े की मांग की है। बीजेपी इस पुरी का बचाव क्यों कर रही है? यह विवाद एपस्टीन के नेटवर्क के ग्लोबल लोगों पर असर के बारे में चल रही एक बड़ी बहस का हिस्सा है, जिसमें भारत में विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यह संपर्क “मौजूदा सरकार की छवि खराब करता है”। शर्म की बात है कि एनडीटीवी की एक पत्रकार, पद्मजा जोशी, एपस्टीन का बचाव कर रही थी। क्या होता अगर यही शारीरिक, यौन शोषण तुम्हारे साथ होता पद्मजा जोशी? यह भारत के मीडिया हॉउस की बेशर्मी है जिन्होंने अपने चैनलों से एपस्टीन फाइल्स स्कैंडल को गुप्त रखा है। इसके विपरीत, ‘पिंप पुरी’ के इंटरव्यू न्यूज़ चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं! यह बहुत ही बेतुकी शरारत है। एपस्टीन के ईमेल में पुरी की मीटिंग्स, एक सहयोगी के लिए वीज़ा मदद वगैरह दिखाई गई हैं। जयराम रमेश व पवन खेड़ा दोनों ही अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के ईमेल के ज़रिए ‘हरदीप बाबा’ का पर्दाफाश कर रहे हैं, जो अब पब्लिक डोमेन में हैं। हरदीप सिंह पुरी के दोस्त अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा, “मैं चाहता हूं कि आप मेरे लिए एक लंबी, स्वीडिश गोरी लड़की दें!” क्या टीना मुनीम अंबानी अपने पति के सेक्स ट्रैफिकर के साथ शामिल होने की बात सुन रही हैं या अनदेखा कर रही हैं? मीडिया कुछ सवाल उठा रहा है। हरदीप ने एपस्टीन के साथ कम से कम 14 मीटिंग क्यों कीं? उसने 62 ईमेल क्यों भेजे? हरदीप सिंह पुरी एक दागी आदमी का दोस्त था; जिसने अपने फायदे के लिए एक पीडोफाइल, एक सीरियल रेपिस्ट, एक सेक्स ट्रैफिकर और एक हत्यारे से दोस्ती की। हरदीप पुरी जैसा ‘कोई खास आदमी’ एपस्टीन के साथ भारत की सरकारी पॉलिसी क्यों सांझा कर रहा था? एपस्टीन के नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाला कोई भी व्यक्ति सिर्फ इसलिए यह दावा नहीं कर सकता कि वह बेगुनाह है क्योंकि उसने उसके अपराधों में शारीरिक रूप से हिस्सा नहीं लिया। ‘दी हिंदू’ अखबार से बात करते हुए, पुरी ने कहा, “मैंने एपस्टीन के साथ मीटिंग नहीं की”, हरदीप पुरी, सौ झूठ से एक सच नहीं बनेगा। इसके अलावा, पुरी ने 2014 में 5, 6, 8, और 9 जून; 19, 23, 24 सितंबर; और 9, 10 अक्टूबर को एपस्टीन के साथ अपनी मीटिंग में क्या चर्चा की?” हरदीप सिंह पुरी की मीटिंग्स 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद हुईं और 2017 तक चलती रहीं। इसका क्या कनेक्शन है? सवाल यह उठता है कि जून 2014 में हरदीप पुरी ने किस हैसियत से एपस्टीन के साथ मीटिंग की थी? माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स का दिल्ली में AI ऐआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने का तय प्रोग्राम, एपस्टीन फाइल्स स्कैंडल में उनका नाम आने की वजह से कैंसिल कर दिया गया। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर को एक सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिज़ीज हो गई थी। भारतीय जनता पार्टी के नेता हरदीप पुरी व जेफरी एपस्टीन के बीच हाल ही में जारी ईमेल एक्सचेंज, हालांकि बिजनेस नेटवर्किंग व इन्वेस्टमेंट चर्चाओं तक ही सीमित थे, ने बीजेपी के पहले के दावे को ध्वस्त किया कि एपस्टीन के मैसेज में पुरी का दिखना आम “नेम ड्रॉपिंग” से ज़्यादा कुछ नहीं था। इन ईमेल को अमेरिकन जस्टिस डिपार्टमेंट ने 30 जनवरी, 2026 को जून 2014 से जून 2017 तक दोषी अमेरिकी सेक्स अपराधी से जुड़ी हजारों फाइलों, वीडियो व फोटो के साथ ‘पब्लिक’ किया है। रिकॉर्ड से एपस्टीन के न्यूयॉर्क घर पर कम से कम चार कन्फर्म मीटिंग व पुरी को सिलिकॉन वैली के इन्वेस्टर्स से जोड़ने की एपस्टीन की लगातार कोशिशों का भी पता चलता है। उस समय पुरी किसी भी पब्लिक ऑफिस में नहीं था। एक करियर डिप्लोमैट, वह इंडियन फॉरेन सर्विस से रिटायर हो चुका था और न्यूयॉर्क में इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (एक थिंक-टैंक) के लिए काम कर रहा था। वह 2014 में बीजेपी में शामिल हुआ व सितंबर 2017 में नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री के तौर पर (किसी भी सदन का सदस्य नहीं था) शामिल हुआ। एपस्टीन के अपराध की हद 2018 के आसपास सामने आई, जब फाइनेंसर पहले से ही एक दोषी और रजिस्टर्ड सेक्स अपराधी था, जिसने 2008 में फ्लोरिडा में एक विवादित ‘प्ली एग्रीमेंट’ के तहत नाबालिगों से प्रॉस्टिट्यूशन के लिए लालच देने के आरोपों में दोषी होने की बात मानी थी। बदनामी के बावजूद, वह ‘अमरीका में अमीर व मशहूर लोगों के लिए पावर ब्रोकर’ के तौर पर काम करता रहा; जिनमें से ज़्यादातर ने अब उसके साथ जुड़ने पर अफ़सोस जताया है। असल में, विदेश मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘एपस्टीन एक दोषी अपराधी था’; इसका ज़िक्र उसकी 2008 की सज़ा के बारे में था। उसे जुलाई 2019 में नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग के फेडरल आरोपों में फिर से गिरफ्तार किया गया, लेकिन एक महीने बाद, हिरासत में उसने आत्महत्या कर ली। अमरीकी जस्टिस हाउस ओवरसाइट कमेटी ने बातचीत जारी कीमहै, जिसमें एपस्टीन ने यू.न. जनरल असेंबली के दौरान होने वाले इवेंट्स में जिन इंटरनेशनल हस्तियों को बुलाया था, उनमें “हरदीप पुरी (भारत)” का ज़िक्र किया था। मैसेज से पता चला कि अनिल अंबानी सेक्स अपराधी का इस्तेमाल कर रहा था। अनिल अंबानी, आपको भारत के पीएम का प्रतिनिधि बनने के लिए किसने अधिकृत किया है? एपस्टीन ने लेटेस्ट खुलासों के आधार पर पुरी को लिंक्डइन के फाउंडर से जोड़ा। एपस्टीन ने पुरी को लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन के भारत आने के लिए तैयारी के बारे में लिखा। पुरी ने 23 जून, 2014 को जवाब दिया, “जेफरी, दिल्ली लौटने पर आपका मैसेज देखा। रीड हॉफमैन के दौरे में मदद/सुगमता करने में खुशी होगी।” 24 सितंबर, 2014 को, एपस्टीन ने लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन को एक इंट्रोडक्टरी ईमेल भेजा, जिसमें बस इतना लिखा था, “रीड – हरदीप। हरदीप रीड, हरदीप भारत में आपके आदमी हैं।” इस इंट्रोडक्शन के बाद मैसेज की बाढ़ आ गई क्योंकि हॉफमैन व पुरी ने सिलिकॉन वैली में मिलने का इंतज़ाम किया। हॉफमैन ने गर्मजोशी से जवाब दिया, पुरी से कहा कि “जेफरी की लोगों में बहुत अच्छी पसंद है” व कैलिफोर्निया या बाद में भारत में मिलने का ऑफर दिया। आखिरकार उन्होंने अक्टूबर 2014 की शुरुआत में सिलिकॉन वैली में मीटिंग तय की। अपनी मीटिंग के बाद, पुरी ने 13 नवंबर, 2014 को एपस्टीन व हॉफमैन दोनों को एक विस्तृत ईमेल भेजा, जिसमें भारत के बढ़ते इंटरनेट सेक्टर में इन्वेस्टमेंट के मौकों के बारे में बताया गया था। मैसेज में हॉफमैन के साथ 3 अक्टूबर को सिलिकॉन वैली में हुई बातचीत का ज़िक्र था व एपस्टीन के इस विचार का ज़िक्र था कि ‘हॉफमैन को जल्द से जल्द’ भारत आना चाहिए। ईमेल में, पुरी ने भारत के 200 मिलियन इंटरनेट यूज़र बेस पर ज़ोर दिया, जो हर महीने पाँच मिलियन यूज़र की दर से बढ़ रहा है, व 2018 तक इसके 500 मिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “डिजिटल इंडिया” पहल के बारे में डिटेल में बताया और लिंक्डइन के 28 मिलियन भारतीय रिज्यूमे की तुलना लोकल कॉम्पिटिटर नौकरी.कॉम के 38 मिलियन से की। पुरी ने लिखा, “जेफ / रीड, मैंने ऊपर अपनी फाइंडिंग्स को शॉर्ट में इसलिए बताया है ताकि जेफ के इस विचार को सपोर्ट कर सकूँ कि भारत का दौरा जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।” उसने एपस्टीन के ‘गुडी गुडी’ कम व इंटरनेट बेस्ड एंटरप्रेन्योरियल आइडियाज़ ज़्यादा’ के सुझाव का ज़िक्र करते हुए कहा: “मैं तैयार हूँ।” इस बातचीत के मकसद के बारे में पूछे जाने पर, पुरी ने दी वायर न्यूज़ नेटवर्क को बताया कि वह भारत में बिज़नेस के मौकों की वकालत कर रहा था। उसने कहा, “2014 में, मैं कह रहा हूं, यह सरकार इनोवेशन पर ध्यान देगी, यह सरकार मेक इन इंडिया करेगी, और लिंक्डइन के 28 मिलियन यूज़र हैं, भारत की रीजनल भाषाओं का ज़िक्र किया, इसमें पोटेंशियल हो सकता है।” पुरी अपने नवंबर 2014 के ईमेल को एक “एनालिसिस बताया कि मोदी के तहत सरकार” इनोवेशन और मेक इन इंडिया पर ध्यान देगी, और ज़ोर दिया कि यह उनका “पर्सनल एनालिसिस” था। सभी मीटिंग एपस्टीन के असिस्टेंट लेस्ली ग्रॉफ के ज़रिए तय की गई थीं और एपस्टीन के 9 ईस्ट 71st स्ट्रीट स्थित घर पर हुईं। 9 जनवरी, 2015 को तय एक मीटिंग कैंसिल कर दी गई क्योंकि एपस्टीन अब न्यूयॉर्क में नहीं थे। पुरी ने लिखा, ‘कृपया मुझे बताएं कि आप अपने अनोखे द्वीप से कब वापस आ जाएं’। एपस्टीन के पुरी और हॉफमैन से संपर्क करने के एक महीने बाद, उन्होंने पुरी को ईमेल करके पूछा कि क्या उनका सहायक भारतीय वाणिज्य दूतावास में किसी से बात कर सकता है और भारत में शादी में शामिल होने के लिए वीजा प्राप्त कर सकता है। इसके बाद, पुरी ने न्यूयॉर्क में पूर्व भारतीय वाणिज्य दूत और दक्षिण सूडान के राजदूत प्रमोद बजाज से अनुरोध किया कि वे देखें कि क्या वह “इसे प्राथमिकता के आधार पर करवा सकते हैं”। एपस्टीन ने 24 अक्टूबर 2014 को भारतीय समय में सुबह लिखा: “हरदीप, मुझे एक एहसान चाहिए, मेरे सहायक को जल्दी वीजा की जरूरत है ताकि वह भारत में शादी में शामिल हो सकें, क्या वाणिज्य दूतावास में कोई है जिससे वह बात कर सकें?” पुरी ने यह कहकर जवाब दिया कि बजाज, जिनके बारे में उन्होंने कहा “अब मेरे साथ काम करते हैं” और जिन्हें उन्होंने ईमेल थ्रेड में कॉपी किया, वे “इसे व्यवस्थित करेंगे”। “परमोद, आभारी रहूंगा यदि आप इसे प्राथमिकता के आधार पर करवा सकें इसके तुरंत बाद, बजाज ने एपस्टीन को कॉक्स एंड किंग्स ग्लोबल सर्विसेज़ की वेबसाइट दिखाई, जो उस समय यू.एस. में भारत के मिशन के साथ पार्टनरशिप करने वाली ऑथराइज़्ड सर्विस प्रोवाइडर थी, व अपने असिस्टेंट से कहा कि वह अपना वीज़ा एप्लीकेशन ऑनलाइन भरें और फर्म के ऑफिस में एक हार्ड कॉपी जमा करें। उसने कहा, “जैसे ही यह हो जाए, प्लीज़ हमें बताएं और हम आगे का प्रोसेस आसान कर देंगे।” उनके खिलाफ़ कई आरोप वहां हुई एक्टिविटीज़ से जुड़े थे। पुरी व एपस्टीन के बीच आखिरी बार जून 2017 में बातचीत हुई थी, जब पुरी ने लिखा था, “जेफ़, अगर आप शहर में वापस आ रहे हैं, तो मैं बात करने के लिए आना चाहूंगा। मैं 10 तारीख तक यहीं हूं।” एपस्टीन ने जवाब दिया, “कल फ़ोन? मैं 15 तारीख को लौटूंगा।” नॉर्वे के डिप्लोमैट तेर्जे रॉड-लार्सन ने IPI आई पी आई के हेड के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जब यह पता चला कि उनके एपस्टीन के साथ लिंक थे। थिंक टैंक को 2011 और 2019 के बीच एपस्टीन के फाउंडेशन से $650,000 का डोनेशन चंदा मिला था, जिसे बाद में बोर्ड ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग व सेक्सुअल असॉल्ट के पीड़ितों की मदद करने वाले प्रोग्राम को उतनी ही रकम डोनेट करने का फैसला किया। रीड हॉफमैन ने पहले एपस्टीन से मिलने की बात मानी थी, लेकिन कहा था कि उन्हें इस बात का अफसोस है। 2019 के एक बयान में, हॉफमैन ने कहा कि वह 2015 में MIT व दूसरे कनेक्शन के ज़रिए एपस्टीन से मिले थे। नवंबर 2025 में, प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने एपस्टीन फाइलों में बताए गए डेमोक्रेट्स की जांच का आदेश दिया, जिसमें खास तौर पर हॉफमैन का नाम लिया गया। ट्रंप ने कहा, “मेरी राय में, हॉफमैन की जांच होनी चाहिए,” और उन्हें “एक घटिया इंसान” कहा। जस्टिस डिपार्टमेंट की रिलीज में एपस्टीन की 2019 में फेडरल कस्टडी में मौत से पहले की एक्टिविटीज़ से जुड़े लाखों पेज के डॉक्यूमेंट्स शामिल हैं, जब वह सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में ट्रायल का इंतजार कर रहे थे। ईमेल में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, सीआईए के पूर्व निदेशक बिल बर्न्स, अमेरिका के पूर्व ट्रेजरी सचिव लैरी समर्स और यूरोप परिषद के महासचिव थोरबजर्न जगलैंड सहित अन्य प्रमुख व्यक्तियों का संदर्भ है। पुरी ने फरवरी 2013 में भारतीय विदेश सेवा से सेवानिवृत्त होने तक 2009 से संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। भारत ने 2011 से 2012 तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक अस्थायी सीट संभाली थी। कितनी बेशर्मी है, एक ऐसे देश में जहां एक महिला को देवी व नवदुर्गा के रूप में पूजा जाता है, जहां एक बच्ची को सरकारी नारे मिल रहे हैं, एक आपराधिक यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन एक राजनयिक तक पहुंचने का साधन बन गया? भारतीय विदेश सेवा को जागना चाहिए, और राष्ट्रवाद की शपथ लेनी चाहिए व दलाली, नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी, वेश्यावृत्ति और झूठी गवाही में शामिल नहीं होना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी को मेरी सलाह है कि हरदीप सिंह पुरी का इस्तीफ़ा लें, जांच हो और भारत को सच पता चले। आखिर यह इंसानियत के खिलाफ़ एक बहुत बड़ा जुर्म है, जिसकी जांच अमेरिका की (FBI)
एफबीआई पहले से ही कर रही है। यह भारत का एक समझदारी भरा कदम होगा।





