सुनील कुमार महला
प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।यह दिवस मात्र एक तारीख नहीं है, अपितु यह तो हमारे देश के भाषाई आत्मसम्मान का बड़ा उत्सव है। पाठकों को बताता चलूं कि राष्ट्रीय हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है, जैसा कि भारत की संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था तथा यह मुख्य रूप से भारत में हिंदी भाषा की मान्यता पर केंद्रित है।हाल फिलहाल, यदि हम यहां पर इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्यों की बात करें तो इसमें क्रमशः हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करना,दुनिया भर में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना,अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना, संयुक्त राष्ट्र में इसे आधिकारिक भाषा बनाना तथा विदेशी लोगों में हिंदी के प्रति अधिकाधिक रुचि पैदा करना प्रमुख हैं।सरल शब्दों में कहें तो इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना और इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।हिंदी न केवल हमारे देश प्राचीन संस्कृति और ज्ञान की संवाहक है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी इसका महत्त्वपूर्ण और अहम् योगदान, भूमिका रही है। हिंदी आज हमारे देश की राजभाषा (आफिशियल लैंग्वेज) तथा भारत की प्रमुख मातृभाषा है। विश्व हिंदी दिवस के इतिहास की यदि हम यहां पर बात करें तो 10 जनवरी 1975 को नागपुर (महाराष्ट्र) में पहला ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ आयोजित किया गया था तथा इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। गौरतलब है कि वर्ष 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को प्रतिवर्ष ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि नॉर्वे में भारतीय दूतावास द्वारा पहली बार विदेश में विश्व हिंदी दिवस मनाया गया था। वास्तव में, यह उस दिन को चिह्नित करता है जब वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली) में पहली बार हिंदी बोली गई थी। यह विश्व के विभिन्न हिस्सों में स्थित भारतीय दूतावासों द्वारा भी मनाया जाता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में मॉरीशस के पोर्ट लुइस में विश्व हिंदी सचिवालय भवन का भी उद्घाटन किया गया था।हर साल इस दिवस की एक थीम या विषय रखा जाता है और वर्ष 2025 में इसका विषय ‘हिंदी: एकता और सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आवाज़’ रखी गई थी। वास्तव में, यह थीम हिंदी को एक वैश्विक संवाद, संस्कृति और एकता के माध्यम के रूप में उभारने पर केन्द्रित थी।इस वर्ष यानी कि वर्ष 2026 में इसकी थीम/विषय ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) तक’ रखी गई है।यह थीम इस बात पर जोर देती है कि हिंदी न केवल हमारी प्राचीन संस्कृति और ज्ञान की संवाहक है, बल्कि आधुनिक युग में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी पूरी तरह सक्षम और प्रगतिशील है। दूसरे शब्दों में कहें तो इसका उद्देश्य है कि हिंदी पारंपरिक रूप से एक भाषा होने के साथ तकनीक की दुनिया में भी आगे है। इस भाषा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बहरहाल पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंददास ने हिन्दी को राजभाषा बनाए जाने के क्रम में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है तथा हिन्दी हमारे देश के संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषा भी है।साथ ही, अनुच्छेद 351 ‘हिंदी भाषा के विकास के लिये निर्देश’ से संबंधित है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 से लेकर 351 तथा अनुच्छेद 120 तथा अनुच्छेद 210 भी हिंदी से संबंधित हैं। यहां पाठकों को बताता चलूं कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 343 भारत संघ की राजभाषा के निर्धारण से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके पहले खंड (343-1) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ‘संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।’ इसके साथ ही, सरकारी कार्यों में उपयोग किए जाने वाले अंकों का स्वरूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3 आदि) होगा। कहना ग़लत नहीं होगा कि यह अनुच्छेद भारत की भाषाई विविधता को स्वीकार करते हुए हिंदी को केंद्र सरकार के आधिकारिक कामकाज की मुख्य भाषा के रूप में स्थापित करता है। अनुच्छेद 343 के अन्य खंडों में संक्रमणकालीन (ट्रांजिशनल) व्यवस्था भी दी गई है। गौरतलब है कि संविधान के लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) भारतीय संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि अगले 15 वर्षों तक यानी कि 1965 तक संघ के सभी आधिकारिक कार्यों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग भी पहले की तरह जारी रहेगा, ताकि प्रशासनिक स्तर पर कोई बाधा न आए। हालांकि, संसद को यह शक्ति दी गई थी कि वह 15 वर्ष की अवधि के बाद भी कानून बनाकर अंग्रेजी के प्रयोग को जारी रख सकती है, जिसके परिणामस्वरूप बाद में ‘राजभाषा अधिनियम, 1963 पारित किया गया। सरल शब्दों में कहें तो अनुच्छेद 343 वह संवैधानिक आधार है जो हिंदी को भारत की प्रशासनिक और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ता है।बहरहाल, हिंदी भाषा की कई ऐसी अनूठी विशेषताएं हैं जो इसे विश्व की अन्य भाषाओं से अलग और वैज्ञानिक बनाती हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी ध्वन्यात्मकता है; यानी इसे जैसा लिखा जाता है, ठीक वैसा ही बोला भी जाता है। हिंदी की लिपि, देवनागरी, अत्यंत व्यवस्थित है, जिसमें स्वर और व्यंजनों को वैज्ञानिक आधार पर वर्गीकृत किया गया है। यह एक अत्यंत उदार,सरल,सहज, वैज्ञानिक शब्दावली लिए हुए बहुत ही शानदार भाषा है, जिसने समय के साथ संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ-साथ अरबी, फारसी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय बोलियों के शब्दों को भी अपने भीतर सहजता से समाहित किया है।व्याकरण की दृष्टि से देखें तो हिंदी में संज्ञा और क्रिया का गहरा संबंध होता है और इसमें लिंग (स्त्रीलिंग-पुल्लिंग) व वचन के आधार पर क्रिया का रूप बदल जाता है, जो भाषा को एक लयबद्धता प्रदान करता है। साथ ही, हिंदी में संबोधन के लिए ‘तू’, ‘तुम’ और ‘आप’ जैसे शब्दों का वर्गीकरण हमारे समाज की शिष्टता और रिश्तों की मर्यादा को दर्शाता है। अपनी सरलता और व्यापकता के कारण ही यह न केवल साहित्य की भाषा है, बल्कि आज के दौर में तकनीक और सिनेमा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उल्लेखनीय है कि हिंदी शब्द का जन्म फारसी भाषा से हुआ है, जिसका अर्थ है ‘सिंधु नदी के किनारे का क्षेत्र’। 11वीं सदी में जब तुर्की आक्रमणकारी भारत आए, तो उन्होंने यहाँ की भाषा को ‘हिंदी’ नाम दिया। हिंदी की विकास यात्रा सदियों पुरानी है; यह प्राचीन काल में ‘अपभ्रंश’ के रूप में प्रचलित थी, जिसका प्रमाण हमें कालिदास के नाटकों में भी मिलता है। आज हम जिस देवनागरी लिपि का प्रयोग करते हैं, वह भी लगभग 11वीं शताब्दी के आसपास अस्तित्व में आई थी।वर्तमान में, हिंदी भारत की राजभाषा है और देश के प्रशासनिक कार्यों में अंग्रेजी के साथ इसका प्रमुख स्थान है। इसकी लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि गिरमिटिया मजदूरों और सांस्कृतिक प्रवास के कारण यह मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम और नेपाल जैसे कई देशों में भी सम्मान के साथ बोली जाती है।हिन्दी न केवल भारत की पहचान है, बल्कि यह वर्तमान में एक शक्तिशाली वैश्विक भाषा के रूप में उभर चुकी है। वर्ष 2025-26 के नवीनतम आंकड़ों (जैसे एथनोलॉग) के अनुसार, हिन्दी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बनी हुई है, जिसके बोलने वालों की कुल संख्या लगभग 60.9 करोड़ (609 मिलियन) से अधिक पहुँच गई है। वैश्विक स्तर पर अंग्रेजी (1.5 अरब) और मंदारिन या मैंडरिन/चीनी (1.2 अरब) के बाद हिन्दी का ही स्थान आता है। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर में हिन्दी के प्रसार की गति पिछले कुछ दशकों में अत्यंत तीव्र रही है, और जैसा कि इस आलेख में ऊपर भी चर्चा कर चुका हूं कि आज यह फिजी, मॉरीशस, नेपाल और गयाना जैसे देशों के अलावा अमेरिका और खाड़ी देशों में भी बड़े प्रवासी समुदाय द्वारा बोली जाती है।भारत के संदर्भ में बात करें, तो हिन्दी देश की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषा है। 2011 की जनगणना के बाद से हिन्दी भाषियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है और वर्तमान अनुमानों के अनुसार, भारत की लगभग 44% से 53% आबादी हिन्दी को अपनी पहली, दूसरी या तीसरी भाषा के रूप में उपयोग करती है। डिजिटल क्रांति ने भी हिन्दी को काफी बढ़ावा दिया है; इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हिन्दी सामग्री की मांग और खपत में भारी उछाल आया है। कितनी अच्छी बात है कि आज हिंदी का प्रयोग केवल बोलचाल या साहित्य तक सीमित न रहकर जीवन के लगभग-लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में व्यापक रूप से हो रहा है। प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र में हिंदी भारत की राजभाषा के रूप में केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों और संसदीय कार्यों का मुख्य आधार है। यह हमारे लिए गौरवान्वित महसूस करने की बात है कि आज शिक्षा के क्षेत्र में भी नई शिक्षा नीति (नेशनल एजुकेशन पालिसी) के आने के बाद अब इंजीनियरिंग और चिकित्सा (मेडिकल) जैसे तकनीकी विषयों की पढ़ाई भी हिंदी में शुरू हो चुकी है। मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में तो हिंदी का वर्चस्व निर्विवाद है; बॉलीवुड फिल्में, हिंदी समाचार चैनल और विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने इसे न केवल भारत के कोने-कोने तक, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय बना दिया है।तकनीकी और डिजिटल क्रांति ने हिंदी के प्रयोग को एक नई दिशा दी है। आज सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) के क्षेत्र में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियां अपने सर्च इंजन, वॉइस असिस्टेंट (जैसे सिरी और एलेक्सा) और कीबोर्ड में हिंदी को प्रमुखता दे रही हैं। ई-कॉमर्स और विज्ञापन की दुनिया में ग्राहकों से जुड़ने के लिए हिंदी सबसे प्रभावी माध्यम बन गई है। इसके अलावा, न्यायालयों में स्थानीय भाषा के बढ़ते प्रयोग और व्यापारिक जगत में ‘मार्केटिंग’ के लिए हिंदी के बढ़ते चलन ने इसे एक ‘रोजगारपरक भाषा’ (लैंग्वेज आप एंप्लोयमेंट) के रूप में स्थापित कर दिया है। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा डिजिटल जनगणना 2026-27 की तैयारी की जा रही है, जिससे आने वाले समय में हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के और भी सटीक व अद्यतन आंकड़े सामने आएंगे। अंत में यही कहूंगा कि विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) वैश्विक मंच पर हिंदी की बढ़ती शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना और दुनिया भर में इसके प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना है। आज जब हिंदी ज्ञान, विज्ञान और तकनीक की भाषा बनकर उभरी है, तो यह दिवस हमें याद दिलाता है कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही हम वैश्विक नागरिक के रूप में अपनी पहचान सशक्त बना सकते हैं।





