विकसित भारत-2047 की तर्ज पर विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य को पूरा करने का विजन कैसे होगा पूरा?

How will the vision of achieving the goal of Developed Rajasthan-2047 on the lines of Developed India-2047 be fulfilled?

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

राजस्थान की भजन लाल सरकार की वित्त मंत्री उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी अगले सप्ताह राज्य विधानसभा में प्रदेश का वर्ष 2025-26 का वार्षिक बजट प्रस्तुत करेगी। भजन लाल सरकार का यह दूसरा बजट होगा। इस बजट में राज्य सरकार का सर्वाधिक ध्यान भारत की स्वतंत्रता की 100 वीं वर्षगांठ 15 अगस्त 2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की कल्पना को पूरा करने के लिए प्रदेश के चहुमुखी विकास के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अधिकाधिक अवसर तलाशना तथा गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण की योजनाओं को लागू करना होगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी विकसित भारत-2047 की तर्ज पर भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र के अनुरुप विकसित राजस्थान-2047 का नारा देते हुए राजस्थान की अर्थ व्यवस्था को अगले पांच साल में दोगुना कर 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख केन्द्र की मोदी सरकार के साथ कदम ताल करने का फैसला लिया हैं। इसके अनुसरण में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अपने शासन काल के पहले ही वर्ष में राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इनवेस्टमेंट समिट का आयोजन कर अपने इरादे जता दिए हैं। इस समिट में करीब 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। इन निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने से राज्य के कई क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी और अगले चार वर्षों में राजस्थान में रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास भी सुनिश्चित होगा।

भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान देश का सबसे बड़ा प्रान्त है और यहां की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में एशिया के सबसे बड़े रेगिस्तान में बसी छितराई आबादी एवं अरावली पहाड़ियों के मध्य में बसे पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों के साथ ही पूरे राज्य में अधिकांश ब्लॉक्स के डार्क जॉन मे होने से सतही एवं भूमिगत जल की नितान्त कमी,गुणवत्ता युक्त पेयजल की कमी,पाकिस्तान से लगी एक हजार किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं तथा आए दिन आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे अनावृष्टि के कारण सूखा एवं अकाल की स्थिति बनना और अब ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणामों की वजह से होने वाली कई परेशानियां,असमय वर्ष,ओलावृष्टि, बाढ़,कीटपतंगों के खेतों में खड़ी फसलों पर होने वाले हमले जैसी अनेक चुनौतियां हैं जोकि राज्य के विकास में बाधक और प्रगति की दृष्टि से अपेक्षाकृत पिछड़ा बनाती रही हैं। इसके अलावा महिलाओं में शिक्षा का अनुपात का काम होना ,मातृ मृत्यु दर और बच्चों की मृत्यु दर आदि राष्ट्रीय औसत से अधिक होना भी पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण रहा है। साथ ही प्रदेश के पश्चिमी भाग में विशाल मरुस्थलीय क्षेत्रों में विकास कार्यों पर आने वाली निर्माण लागत और सेवा लागत भी अन्य प्रदेशों के मुकाबले बहुत अधिक है। राज्य के सुदूर रेगिस्तानी और पहाड़ी आदिवासी क्षेत्रों में सड़क,पानी,बिजली,चिकित्सा,शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाना कोई आसान काम नहीं है और इन पर होने वाला खर्चा भी अन्य प्रदेशों की तुलना में बहुत अधिक आता है। स्वतंत्रता के बाद से केन्द्र सरकार से राजस्थान को पहाड़ी और सीमावर्ती प्रदेशों की तरह विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कांग्रेस और भाजपा की हर सरकार करती आई है,लेकिन पिछले 75 वर्षों में यह मांग कभी पूरी नहीं हों पाई हैं। यहां तक कि प्रदेश में पानी की कमी से हर साल गर्मियों में होने वाले त्राहिमाम के बावजूद राजस्थान के करीब आठ करोड़ लोगों के सूखे कंठ की प्यास बुझाने के लिए वांछित केन्द्रीय सहायता अभी तक नहीं मिल पाई हैं। यह सही है कि आजादी के बाद राजस्थान को विश्व की सबसे बड़ी इन्दिरा गांधी नहर परियोजना की सौगात अवश्य मिली लेकिन पंजाब आदि प्रदेशों से आने वाले दूषित पानी के कारण यह वरदान अनेक बार प्रदेश की उर्वरा युक्त भूमि और खेतों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही जहरीले पानी की वजह से होने वाले जान लेवा रोगों के कारण अनेक लोगों और पशुओं की मृत्यु का कारण बन अभिशाप भी बना है।

हालांकि पिछले कई दशकों में राजस्थान ने इन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद विकास के मामले ऊंची छलांग लगा बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आने में सफलता हासिल की है। आज प्रदेश में अच्छी सड़के , बेहतर रेल कनेक्टिविटी और हवाई सेवाओं का विकास हुआ है। विशाल बांधों के निर्माण, जल और बिजली के गैर परंपरागत स्त्रोतों के विकास और कई परम्परागत उद्योग धंधों के साथ ही कई नए उद्योग धंधों के आगमन से प्रदेश की दशा और दिशा में सुधार हुआ है लेकिन राजस्थान जैसे विशाल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए राजस्थान को केन्द्र की सरकार से सहानुभूति पूर्वक केंद्रीय अनुदान और सहयोग की दरकरार हैं।

राजस्थान की भजन लाल सरकार ने पूर्वी राजस्थान में पेयजल और सिंचाई की पीकेसी ईआरसीपी राम सेतु परियोजना तथा राज्य के शेखावाटी अंचल में यमुना जल पहुंचाने का दृढ़ संकल्प लिया है। यदि सच्चे अर्थों में ये महत्वाकांशी परियोजनाये सफलता पूर्वक जमीनी हकीकत बनती है तो पश्चिमी राजस्थान में हुए कायाकल्प की तरह प्रदेश के चहुमुखी विकास की दिशा में मील का एक नया पत्थर साबित होंगी।

देखना है राजस्थान की भजन लाल सरकार विकसित भारत-2047 की तर्ज पर विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य को पूरा करने का विजन कैसे पूरा करेंगी?