इंद्र वशिष्ठ
उत्तर प्रदेश के बांदा में पॉक्सो मामलों की अदालत के स्पेशल जज ने शुक्रवार को 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने वाले रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मौत की सज़ा सुनाई है।
कोर्ट ने सरकार को हर पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपियों के घर से ज़ब्त की गई रकम पीड़ितों में बराबर बांटी जाए। सीबीआई ने 31.10.2020 को आरोपी रामभवन और दूसरे अज्ञात लोगों के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण, अश्लीलता के मकसद के लिए बच्चों का इस्तेमाल और बाल यौन शोषण सामग्री बनाने और इंटरनेट पर फैलाने के आरोपों में केस दर्ज किया। जांच के दौरान, पता चला कि आरोपियों ने 33 लड़कों, जिनमें से कुछ की उम्र तीन साल भी थी, पर गंभीर यौन हमलों समेत कई तरह के घिनौने/गलत काम किए थे। जांच में यह भी पता चला कि यौन हमले के दौरान कुछ पीड़ितों के गुप्तांगों पर चोटें आई थीं। उनमें से कुछ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ पीड़ितों की आंखें भेंगापन की समस्या से जूझ रही हैं। पीड़ित अभी भी दरिंदों की वजह से हुए मानसिक सदमे से जूझ रहे हैं। ये दरिंदे साल 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट के आसपास के इलाके में सक्रिय रहे। आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था। आरोपी बच्चों को ऑनलाइन वीडियो-गेम्स का एक्सेस देने और पैसे/गिफ्ट देने जैसे अलग-अलग तरीके अपना कर लुभाता/ फंसाता था।
जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 10.02.2021 को आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
कोर्ट ने आरोपियों के अपराधों को “रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर” पाया, जिसमें 33 नाबालिग बच्चों का सुनियोजित यौन शोषण और दुर्व्यवहार शामिल था।





