अगर कांग्रेस ने अब भी सुधार नहीं किए तो वह दिन दूर नहीं जब यह पार्टी इतिहास के पन्नों तक सीमित रह जाएगी

If Congress still does not make reforms, the day is not far when this party will be confined to the pages of history

अशोक भाटिया

देखा जाय तो कांग्रेस 2014 से लगातार गलतियों पर गलतियां कर रही है । हाल कि गलती से जो हाल में उसकी किरकिरी हुई है उससे उसके ही साथी दल नाराज है और कांग्रेस से किनारा कर रहे है ।

बताया जाता है कि दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित ‘AI इंडिया समिट 2026’ में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के किए गए शर्टलेस प्रदर्शन की जमकर निंदा हो रही है। समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने भी इस प्रदर्शन की आलोचना की।सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने झांसी में मीडिया से बात करते हुए कहा कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल के सामने ऐसा नहीं करना चाहिए था। यूथ कांग्रेस को विदेशी डेलीगेट्स के सामने अपमान करने से बचना चाहिए था । उन्होंने इशारों-इशारों में आगे कहा, ‘अब जो और हंगामा (कांग्रेस यूथ का प्रदर्शन) हुआ है, मैं इसके पक्ष में नहीं हूं। भाजपा सरकार झूठ बोलती है धोखा देती है। वह अलग बात है कि हमारे बीच मतभेद हैं, हम आंतरिक लड़ाई लड़ सकते हैं। अब तो पूरा देश जान चुका है कि बीजेपी झूठ बोलती है, लेकिन ऐसा प्रदर्शन नहीं होना चाहिए था जिससे विदेशी प्रतिनिधिमंडल के सामने देश का अपमान हो।’

इससे पहले बहुजन समाजवादी पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कृत्य की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि अगर यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर का नहीं होता तो अलग बात थी, लेकिन समिट के दौरान ऐसा आचरण देश की गरिमा और छवि को धूमिल करने वाला था, ऐसा नहीं करना ही उचित होगा। मायावती ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा, ‘नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ जिसमें देश और विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे और इवेंट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खि़यों में था। इस दौरान जिन भी लोगों द्वारा अर्द्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया है जिसमें अधिकतर कांग्रेसी युवा बताए जा रहे हैं, वह अति-अशोभनीय और निन्दनीय है।’उन्होंने आगे लिखा, ‘अगर यह सम्मेलन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का नहीं होता तो अलग बात थी, लेकिन समिट के दौरान ऐसा आचरण करना यह चिन्ता की बात है अर्थात अपने देश की गरिमा और छवि को ना बिगाड़ा जाये तो

इसके बाद वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया और पूर्व आंध्र मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने भी कांग्रेस पार्टी की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दुनिया के सामने हमें एकजुट होकर नजर आना जरूरी है। उन्होंने लिखा, “कल एआई समिट में यूथ कांग्रेस ने हम सभी को शर्मिंदा किया है। हमारी राजनीति किस दिशा में जा रही है। किसी को भी कभी हमारे देश को ऐसे नीचा नहीं दिखाना चाहिए। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन दुनिया के सामने हमें आपस में एकजुट होकर ही रहना चाहिए।”

भाजपा समेत तमाम पार्टियों ने भले ही इस मुद्दे पर सरकार का साथ दिया हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी अभी भी अपनी गलती न मानते हुए अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी हुई है। कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया है कि भारत एक लोकतंत्र है और लोकतंत्र में, विरोध करने का अधिकार सभी का होता है, सभी को अपनी राय रखने का अधिकार होता है।पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन ‘लाखों गुस्साए बेरोजगार युवाओं की आवाज” थी। इस विरोध प्रदर्शन का निशाना ‘समझौता करने वाले’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। कांग्रेस ने कहा कि यूथ कांग्रेस AI समिट के खिलाफ नहीं हैं, और वे अब और चुप नहीं बैठेंगे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि देश में पिछले 12 सालों से दरारों को छिपाया जा रहा है। आज देश के नौजवानों ने उन दरारों पर चिपकाए गए इश्तेहारों को फाड़ दिया है।

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी कहना है कि आज यूथ कांग्रेस ने नौजवानों के रोष, गुस्से को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के जरिये एआई समिट में दर्ज कराया। खेड़ा ने कहा कि मीडिया का एक धड़ा इसको लेकर शोर मचा रहा है कि बहुत गलत जगह विरोध प्रदर्शन किया है। इससे देश की बदनामी हो गई। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि विरोध प्रदर्शन कहां किया जाता है? उन्होंने कहा कि विरोध वहीं होता है जहां लोगों को दिखता है। कांग्रेस नेता ने शायराना अंदाज में सरकार पर तंज कसा।

दरअसल कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या नेतृत्व की कमी है। राहुल गांधी को युवा नेता के तौर पर पेश किया गया, लेकिन वे जनता से जुड़ने में नाकाम रहे। उनकी सबसे बड़ी गलती यह रही कि वे राजनीति को गंभीरता से नहीं ले सके। 2014 में “आलू से सोना बनाने” वाला बयान हो या चुनाव प्रचार के दौरान छुट्टियां मनाना ऐसे कई मौके आए जब राहुल की छवि एक गैर-गंभीर नेता की बनी। वे न तो पार्टी संगठन को मजबूत कर पाए और न ही चुनावी रणनीति में कोई नया प्रयोग किया।राहुल गांधी की दूसरी बड़ी गलती थी, युवा नेताओं को आगे न बढ़ाना। ज्योतिरादित्य सिंधिया, हिमंता बिस्वा सरमा जैसे कई युवा नेता कांग्रेस छोड़कर चले गए क्योंकि उन्हें पार्टी में उचित सम्मान नहीं मिला।

कांग्रेस पार्टी का पूरा ढांचा गांधी परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है। पार्टी में लोकतांत्रिक तरीके से नेता नहीं चुने जाते। चाहे कोई कितना भी मेहनत करे, अगर वह गांधी परिवार के करीब नहीं है तो उसे महत्वपूर्ण पद नहीं मिलता। इस “रॉयल फैमिली” वाली छवि ने पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचाया है। आम जनता को लगता है कि यह पार्टी सिर्फ एक परिवार की संपत्ति है।

1990 के दशक तक कांग्रेस का हर गांव, हर मोहल्ले में मजबूत संगठन था। लेकिन आज वह संगठन लगभग खत्म हो चुका है। कांग्रेस कार्यकर्ता अब सक्रिय नहीं रहे। दूसरी तरफ, भाजपा ने RSS के माध्यम से जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन खड़ा कर लिया है। कांग्रेस के पास न तो कार्यकर्ता हैं और न ही उन्हें प्रेरित करने का कोई विचार।

मोदी सरकार ने राष्ट्रवाद, विकास और हिंदू पहचान के मुद्दों को बहुत प्रभावी तरीके से उठाया। कांग्रेस इसका कोई प्रभावी जवाब नहीं दे पाई। पार्टी ने अपनी राजनीति में कोई नई सोच नहीं विकसित की। वे न तो विकास के मुद्दे पर भाजपा को चुनौती दे पाए और न ही अपनी धर्मनिरपेक्षता की बात को नए तरीके से पेश कर पाए। हर चुनाव में कांग्रेस सिर्फ “मोदी विरोध” करती दिखी, लेकिन अपना कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं रख पाई।

आज के दौर में गठबंधन की राजनीति बहुत जरूरी है, लेकिन कांग्रेस इसमें बहुत कमजोर साबित हुई है। बिहार में ही देखें तो राजद और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर काफी विवाद हुआ। कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस को खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगता है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन से फायदा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस दोनों ही कांग्रेस को गंभीर सहयोगी नहीं मानते।

भाजपा ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार में बहुत निवेश किया है। हर मंच पर भाजपा के समर्थक सक्रिय हैं। लेकिन कांग्रेस इस मोर्चे पर बहुत पीछे है। युवा वोटरों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया सबसे जरूरी माध्यम है, और यहां कांग्रेस की मौजूदगी नगण्य है।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोलगेट घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, यूपीए-2 सरकार के दौरान हुए इन घोटालों ने कांग्रेस की छवि बुरी तरह खराब कर दी। हालांकि बाद में कई मामलों में आरोपी बरी हो गए, लेकिन जनता के मन में जो नकारात्मक छवि बन गई, वह आज तक बनी हुई है। कांग्रेस इस छवि को बदलने में नाकाम रही।

कांग्रेस पार्टी के सामने अस्तित्व का संकट है। अगर पार्टी को फिर से खड़ा होना है तो उसे कई कठोर फैसले लेने होंगे। सबसे पहले, पार्टी को गांधी परिवार की छाया से बाहर निकलना होगा और लोकतांत्रिक तरीके से नेतृत्व चुनना होगा। दूसरा, जमीनी संगठन को फिर से मजबूत करना होगा। तीसरा, आधुनिक संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग करना होगा।लेकिन सबसे जरूरी है एक नई विचारधारा और एजेंडा विकसित करना। कांग्रेस को यह बताना होगा कि वह देश को कहां ले जाना चाहती है। सिर्फ भाजपा की आलोचना करने से काम नहीं चलेगा।बिहार की हार एक और चेतावनी है। अगर कांग्रेस ने अब भी सुधार नहीं किए तो वह दिन दूर नहीं जब यह पार्टी इतिहास के पन्नों तक सीमित रह जाएगी। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के पास अब भी वक्त बचा है?