पंकज शर्मा
हाथरस : जिले के खेरिया गांव में इन दिनों रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं। रात के अंधेरे में खेतों का सीना चीरकर बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है। प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद यह अवैध कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा, जिससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुँच रही है बल्कि कृषि योग्य भूमि भी बर्बाद हो रही है।
नियमों को ताक पर रखकर 10 फुट गहरे गड्ढे
नियमों के मुताबिक, खेत से एक सीमित गहराई तक ही मिट्टी निकाली जा सकती है, लेकिन खेरिया गांव में खनन माफिया ने कानून को किनारे कर दिया है। यहाँ 10 फुट से अधिक गहरे गड्ढे खोदकर रेत निकाली जा रही है। यह सीधे तौर पर माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का खुला उल्लंघन है।
किसानी और पर्यावरण पर संकट
इस अवैध गतिविधि से सबसे अधिक नुकसान किसानों को हो रहा है। ऊपरी उपजाऊ मिट्टी हटने से जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है और खेत गहरे गड्ढों में तब्दील हो रहे हैं, जिससे भविष्य में वहां खेती करना असंभव हो जाएगा। साथ ही, इतनी गहराई तक खुदाई होने से क्षेत्र के भूजल स्तर पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
प्रशासन बेखबर, पत्रकारों को मिल रही धमकी
हैरानी की बात यह है कि भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और जेल जैसी सख्त सजा के प्रावधान होने के बाद भी माफिया बेखौफ हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की नाक के नीचे रात भर मशीनों का शोर गूंजता है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। वहीं, इस मुद्दे को उठाने वाले पत्रकारों को भी माफिया द्वारा अंजाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं।
बिना अनुमति के राजस्व को चपत
यदि नियमानुसार खनन विभाग से अनुमति लेकर और निर्धारित शुल्क जमा कर कार्य किया जाता, तो यह राजस्व का स्रोत बनता। लेकिन ग्राम पंचायत और तहसील स्तर पर बिना किसी अनुमति के इस खेल को अंजाम देकर जिला प्रशासन को चुनौती दी जा रही है।





