
सीता राम शर्मा ” चेतन “
मनुष्य तब तक मनुष्य है जब तक वह अपनी मनुष्यता के साथ है ! मनुष्य मनुष्यता के साथ ही अपनी पूरी पहचान कर अपने जीवन को सार्थक कर सकता है ! मनुष्य में मनुष्यता का वह मूल गुण, मर्म, धर्म और कर्म जागृत और फलीभूत हो उसका सबसे सरल, सशक्त और सफलतादायी मार्ग अथवा माध्यम है – आध्यात्म ! अपनी पहचान के साथ दृश्य-अदृश्य संपूर्ण ब्रह्मांड के सत्य के ज्ञान-विज्ञान, पहचान और समझ का सर्वसुलभ, सरल, सार्थक और श्रेष्ठ मार्ग है – आध्यात्म ! आत्मबोध से लेकर जगतबोध की इसी आध्यात्मिक यात्रा का भारतीय पवित्र पर्व है महाकुंभ, जिसका ज्ञात-अज्ञात सत्य और तथ्य चाहे जो हो, है मनुष्यता को संस्कारित, पल्लवित, हर्षित और गर्वित करने वाला ! आत्मा से परमात्मा के मिलन और जागरण का भारतीय महोत्सव महाकुंभ अभी जारी है !
दैवीय अमृतमंथन से निकले अमृतकलश से छिटकी कुछ बूंदों का स्थान दैवीय दृष्टि से संपन्न जिन महात्माओं ने चिन्हित किया उनमें एक महत्वपूर्ण स्थान है प्रयागराज, जो दैवीय इच्छा से ही पवित्रपावनी, जीवनदायिनी मां गंगा, यमुना और गुप्त सरस्वती के संगम का स्थान बना ! जहां अभी दिव्य, भव्य महाकुंभ का महोत्सव एक दैवीय शक्ति से संपन्न देवपुत्र की राज्य व्यवस्था द्वारा करवाया जा रहा है ! महोत्सव के दौरान हुए भगदड़ के एक दुखद हादसे के बावजूद ऐसे भव्य महाकुंभ के आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी प्रशंसा और आदरसहित धन्यवाद के पात्र हैं ।
जारी महाकुंभ पवित्र सामूहिक स्नान संपूर्ण भारत के लोगों के लिए अपनी एकता और राष्ट्रीय अंखडता की भी पहचान बने, इस दूरदर्शिता के साथ आयोजित किए जा रहे महाकुंभ महोत्सव की सार्थकता को आप अपनी पूरी यात्रा में बहुत गहराई से बखूबी जान और समझ सकते हैं । राष्ट्र के कोने-कोने से आते करोड़ों लोगों के साथ भारतीय आध्यात्म से प्रभावित कई विदेशी लोगों के द्वारा भी प्रयागराज महाकुंभ में पवित्र डूबकी लगाने का सिलसिला अभी जारी है, जो महाशिवरात्रि 26 फरवरी तक जारी रहेगा ! बारह वर्ष के अंतराल में होने वाले बारह कुंभ स्नान के अंतिम स्नान को महाकुंभ स्नान माना और कहा जाता है । सौभाग्य से बसंत पंचमी के अमृत स्नान का साक्षी मैं भी रहा हूं ! मुझे लगता है अमर होने या मोक्ष पाने की बजाय अपनी मनुष्यता और अपने मानवीय संस्कारों, कर्तव्यों को निरंतर परिष्कृत, समृद्ध तथा सर्वव्यापी करते हुए अपने मानवीय शरीर की निरंतरता का अभिलाषी हर जागृत मनुष्य मनुष्यता से परिपूर्ण एक महान मानवीय संसार की कल्पना के साकार स्वरुप को जीना चाहता है ! एक ऐसा संसार, जो मानवता से समृद्ध, खुशहाल और जीवंत हो !
अंत में महाकुंभ यात्रा की अंतिम बात उस पवित्र नदी, जिसे हम मां गंगा और यमुना कहते हैं, उसकी बदहाली और गंदगी को लेकर, जो हमारी सामुहिक देन है और जिससे उन्हें मुक्त किए बिना उसमें किया गया हमारा हर स्नान अधूरा और अक्षम्य पाखंड तथा पाप ही सिद्ध होगा । मां गंगा, यमुना और गुप्त सरस्वती के मिलन स्थान त्रिवेणी, संगम में डूबकी लगाते हुए या उसकी महिमा का बखान, गुणगान करते हुए यही एक बात बार-बार मन-मस्तिष्क को विचलित करती है । आशा है हमारी राज और समाज व्यवस्था उस पर ज्यादा गंभीर और प्रयासरत होगी । फिलहाल संक्षिप्त सार विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक मानवीय महोत्सव महाकुंभ का, जो भारत को अखंड और एक भारत बनाए रखने में शत-प्रतिशत सफल हो रहा है, विश्लेषण प्रयास करते हुए इसके मुख्य आयोजक उत्तर प्रदेश के सक्षम, सशक्त और सफल मुख्यमंत्री को हार्दिक बधाई और अशेष शुभकामनाएं ! हर-हर गंगे ! जय हो गंगा मइया की ! महाकुंभ जारी है, जो नहीं गए अब उनकी बारी है ! जाइए – – –