
भारत अपना अभियान चीन के खिलाफ मैच से करेगा
कप्तान ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत का फिट होना भारत के लिए अच्छी खबर
- भारत के गोलरक्षक पाठक को दिखानी होगी पूरी मुस्तैदी
-स्ट्राइकर अभिषेक, मंदीप और सुखजीत जलवा दिखाने को तैयार
पुरुष हॉकी एशिया कप
29 अगस्त से 7 सितंबर, 2025 राजगीर, बिहार
पूल ए : भारत, जापान, चीन और कजाकिस्तान
पूल बी : दक्षिण कोरिया, मलयेशिया, बांग्लादेश और चीनी ताइपे।
भारत के पूल ए के मैच
29 अगस्त वि चीन, 31 अगस्त वि जापान, 1 सितंबर वि कजाकिस्तान।
सुपर 4 मैच 3 से 6 सितंबर। फाइनल : 7 सितंबर
सत्येन्द्र पाल सिंह
दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में एफआईएच रैंकिंग में आठवें नंबर पर काबिज मेजबान तीन बार खिताब जीत चुके भारत के लिए शुक्रवार से राजगीर में शुरू हो रहा पुरुष हॉकी एशिया कप इम्तिहान की घड़ी है। भारत की निगाहें हर हाल में एशिया कप जीत 14 से 30 अगस्त, 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड में होने वाले एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने पर लगी हैं। बेशक भारत हॉकी एशिया कप जीतने का सबसे प्रबल दावेदार है और जीतना भी चाहिए लेकिन उसे अति आत्मविश्वास से बचना होगा। भारत चौथी बार एशिया कप हॉकी खिताब हर हाल में एफआईएच हॉकी विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई कर क्वॉलिफायर खेलने से बचना चाहेगा। भारत के लिए अच्छी खबर है कि एफआईएच प्रो लीग के यूरोपीय चरण मे चोट के चलते आठ में मात्र पांच मैच खेलने वाले उसके कप्तान और ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह अब पूरी तरह फिट हैं । सोने पर सुहागा यह है कि भारत स्ट्राइकर अभिषेक नैन , सुखजीत सिंह और मंदीप सिंह पूरे रंग में हैं और एशिया में अपना जलवा दिखाने को तैयार है। भारत अपनी रैकिंग, कौशल और दमखम के लिहाज एशिया कप में शिरकत करने वाली सबसे बेहतर टीम है और उसे सब कुछ भुला इस समय अपना ध्यान केवल और केवल हॉकी एशिया कप जीतने पर लगाना होगा। भारत अपना अभियान एफआईएच रैंकिंग में 23 वें स्थान पर काबिज चीन के खिलाफ शुक्रवार को पूल ए के मैच से करेगा।चीन अब तक केवल एक बार 2008 में बतौर मेजबान ओलंपिक में खेली है और तब वह 11 वे स्थान पर रही थी जबकि 2018 के एफआईएच हॉकी विश्व कप मे दसवें स्थान पर रही थी। चीन की रणनीति अपने किले की मजबूत चौकसी के साथ अचानक जवाबी हमले बोल अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को चौंकाने की रहती है और ऐसे में भारत को इससे चौकस रहना होगा।
बीते एक बरस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह एफआईएच प्रो लीग में चोटों के चलते भारत के 16 मैचों में से मात्र 9 मैच ही खेले। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि उसका हाल ही बरसों में अपने सभी एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है। भारत ने 2023 के एशियाई खेलों से 2024 की एशियन चैपियंस ट्रॉफी तक 14 मैचों मे 94 गोल दागे हैं। चीफ हॉकी कोच क्रेग फुल्टन और कप्तान हरमनप्रीत सिंह के सभी प्रयोगों को विराम दे अब भारत को एशिया कप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर भारत को खिताब जिता सीधे 2026 के विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई कराने की बारी है। कोई उलटफेर न हुआ तो बेशक भारत जरूर अपने घर में पुरुष हॉकी एशिया कप जीत कर 2026 के एफआईएच हॉकी विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई कर लेगा। गोलरक्षक पीआर श्रीजेश के पेरिस ओलंपिक में भारत को लगातार दूसरी बार कांसा जिताने के बाद अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने के बाद मौजूदा गोलरक्षक कृष्ण बहादुर पाठक के एफआईएच प्रो हॉकी लीग में ढीले प्रदर्शन के बाद एशिया कप में उन्हें मुस्तैदी दिखानी होगी अन्यथा भारत की पूरी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
आखिरी क्षण में गोल खाने से बचने की जरूरत
वहीं भारत एफआईएच प्रो लीग 2024-25 के यूरोपीय चरण में नीदरलैंड, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम के खिलाफ कुल आठ मैच खेला और बेल्जियम से मात्र अंतिम व आठवां मैच जीत लगातार सात मैच बेहद करीबी संघर्ष में हार आठवें स्थान पर रह कर किसी से इससे बाहर होने से बच गया। भारतीय टीम एशिया कप से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया में उससे चार मैचों की मैत्री हॉकी सीरीज 1-3 से हार चुकी है। भारत एफआईएच प्रो लीग में ज्यादातर मैचों में मात्र एक गोल से हारा। भारत ने एफआईएच प्रो लीग के यूरोपीय चरण में आठ मैचों में 26 गोल खाए और रक्षापंक्ति की चूक उसे भारी पड़ी । भारत की रक्षापंक्ति के खिलाड़ियों ने डी में खासतौर पर टैक्लिंग में हड़बड़ी में गड़बड़ी कर बरारबर गेंद गंवाई। यही कारण रहा कि भारत ने आठ में सात में हार एक गोल से मिली और इसमें पांच गोल उसने आखिरी क्वॉर्टर में खाए। लगा कि भारत आखिरी क्षणों में गोल खाने की पुरानी बीमारी से फिर पीड़ित हो गया। भारत को एशिया कप में आखिरी क्षण में गोल खाने से बचने की जरूरत होगी। एक बड़ी बात यह रही कि भारत के कप्तान हरमनप्रीत सिंह पेरिस ओलंपिक के बाद खासतौर पर उंगली की चोट के चलते एफआईएच प्रो लीग के आठ मैचों में से पांच में बाहर रहे। इससे भारत की रक्षापंक्ति तो दबाव मे आई ही खासतौर पर पेनल्टी कॉर्नर पर उनके ड्रैग फ्लिकर के रूप में कौशल की कमी भी मैदान पर अखरी। दरअसल आगे हमले बोलने पर कुछ जोखिम उठाने की भारत की रणनीति करगर नहीं रहे। दरअसल हरमनप्रीत के पांच मैचों में बाहर रहने पर पेनल्टी कॉर्नरों का बतौर ड्रैग फ्लिकर जुगराज सिंह, अमित रोहिदास और संजय पूरा लाभ उन्हें गोल में तब्दील नहीं कर पाए। भारत के अन्य ड्रैग फ्लिकरों का चीफ कोच क्रेग फुल्टन बचाव करते हुए कहते हैं कि उन्हें अभी और पेनल्टी कॉर्नरों का अधिकतम इस्तेमाल कर इन्हें और गोल में बदलने के लिए अभी और अनुभव चाहिए। भारत को प्रो लीग के यूरोपीय चरण में मैच में आधा दर्जन या इससे अधिक पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन भारत के वेरिएशन इन पर कारगर नहीं रहे।एफआईएच प्रो लीग मे भारत के प्रदर्शन को देखने के लिए दो नजरिए हो सकते हैं कि एक यह कि इससे उसे एशिया कप के लिए खुद को बेहतर ढंग से तैयार होने का मौका मिला। वहीं इसके उलट कुछ आलोचकों की राय यह है कि इससे भारत के मनोबल पर असर पड़ेगा। खैर इस बहस से बचना ही बेहतर है।
भारत के लिए अब प्रयोग करने की गुजांइश नहीं
भारत दुनिया के अपने समय के बेहतरीन गोलरक्षक रहे पिछले लगातार दो ओलंपिक में कांसा जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले गोलरक्षक पी आर श्रीजेश, स्ट्राइकर ललित उपाध्याय के अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने तथा रंग में नहीं होने के कारण चलते चतुर स्कीमर शमशेर सिंह, नीलकांत शर्मा और स्ट्राइकर गुरजंट सिंह के टीम से बाहर रहने पर इन पाचों के बिना हॉकी एशिया कप में खेलने उतरेगा। भारत ने जकार्ता में 2022 में पिछले एशिया कप में अपने 18 मे 15 एकदम नए खिलाड़ियों के साथ अनुभवी बीरेंद्र लाकरा की कप्तानी व कोच सरदार सिंह के मार्गदर्शन में एकदम नई टीम भेजी थीं। तब भारत ने अपने पूल ए के मैच में जापान से 2-5 से हारने के उसे सुपर 4 में 2-1 से हराया और इसके बाद राज कुमार पाल के इकलौते गोल से उस पर जीत दर्ज कर तीसरे स्थान पर रहा था। भारत के लिए अब हॉकी एशिया कप में प्रयोग करने की गुजांइश नहीं है और उसका सबसे पहला मकसद अपने पूल ए में शीर्ष पर रहने के साथ सुपर 4 में स्थान बनाना है। फिर सुपर 4 में शीर्ष दो रहकर फाइनल में स्थान बनाने की होगी। भारत को खासतौर पर अपने पूल में जापान और चीन से तथा बहुत मुमकिन है कि सुपर 4 में सबसे ज्यादा पांच बार खिताब चुकी मौजूदा चैंपियन दक्षिण कोरिया और हमेशा से परेशान करती रही जवाबी हमले बोल कर चौंकाने का दम रखने वाली लेकिन अपनी फिटनेस को लेकर जूझ रही मलयेशिया से चौकस रहने की जरूरत है।
भारत ने चुनी है मजबूत टीम
भारत ने पुरुष हॉकी एशिया कप के लिए अनुभवी व मजबूत टीम चुनी है। भारत के खुद कप्तान हरमनप्रीत सिंह और जुगराज सिंह के रूप में दो बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हैं ही अमित रोहिदास के रूप में पेनल्टी कॉर्नर रोकने के लिए सबसे मुस्तैद ‘रशर’हैं। मेजबान भारत की ताकत अनुभवी मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, राज कुमार पाल के साथ नवोदित आक्रामक मिडफील्डर राजिंदर सिंह हैं। भारत के हमलों का दारोमदार अनुभवी मंदीप सिंह, अभिषेक,सुखजीत सिंह, शिलानंद लाकरा के साथ फ्रीमैन के रूप मे दिलप्रीत सिंह हैं।
कसौटी पर होंगे गोलरक्षक पाठक
एफआईएच प्रो लीग में भारत के गोलरक्षक कृष्ण बहादुर खासतौर पर हवा में लंबे स्कूप से डी में पहुंची गेंद को रोकने में जूझते नजर आए। अपने पूर्ववर्ती गोलरक्षक पीआर श्रीजेश के अपनी मुस्तैदी से पेरिस ओलंपिक में भारत को लगातार दूसरी बार ओलंपिक में कांसा जिताने के बाद अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने के बाद कृष्ण पाठक के सामान्य कद का खासतौर पर लंबे कद के यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई स्ट्राइकरों ने लाभ उठाकर एफआईएच प्रो लीग में उन्हें छका कर गोल कर गोल दागे। सूरज करकेरा मुस्तैद तो दिखे लेकिन दबाव में वह भी उनहां ऐसे में भारत के नंबर 1 गोलरक्षक के रूप में गोलरक्षक पाठक कसौटी ापर होंगे। भारत को एशिया कप जीतना तो उसकी गोलरक्षकों सहित खुद कप्तान हरमनप्रीत सिंह, सुमित, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह के साथ संजय को खासतौर पर जवाबी हमले बोल गोल करने के लिए ख्यात दक्षिण कोरिया, मलयेशिया और जापान के खिलाफ पूरी तरह चौकस रहना होगा। साथ ही अपने गोल पर हमले के समय भारतीय स्ट्राइकरों पीछे आकर अपने फुलबैक की किले की चौकसी में मदद करनी होगी जिससे कि वे मैन टू मैन मार्किंग कर अपने किले की चौकसी कर सके।
पाक के हटने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा
भारत एशिया कप में सभी इसमें शिरकत करने वाली एफआईएच रैंकिंग की सबसे हॉकी टीम है और अपने घर में खेल रही है। भारत को सबसे ज्यादा अब तक पांच बार एशिया कप खिताब जीत चुकी दक्षिण कोरिया के साथ जापान, मलयेशिया और चीन से जरूर चौकस रहने की जरूरत है क्योंकि ये सभी टीमें अतीत में परेशान करती रही हैं। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत के पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर कर उसके आतंकी ठिकाने तबाह करने बाद अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा की गारंटी की दुहाई दे पाकिस्तान हॉकी एशिया कप से हट गया है। यूं भी पाकिस्तानी हॉकी टीम इस समय बेहद कमजोर है और ऐसे में उसके एशिया कप में शिरकत न करने से इसकी अहमियत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दरअसल पाकिस्तान की हॉकी टीम अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही और एशिया कप से हटने से उसकी 2026 के हॉकी विश्व कप में खेलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब तक बेल्जियम और नीदरलैंड बतौर मेजबान, स्पेन के 2024-25 एफएचआई प्रो लीग में तीसरे तथा ऑस्ट्रेलिया 2023-24 के एफआईएच प्रो लीग चैंपियन के नाते और सीधे और न्यूजीलैंड को ओशनिया से तथा जर्मनी ने 2025 की यूरो चैंपियनशिप के चैंपियन के नाते ,अर्जेंटीना ने पैन अमेरिकी चैंपियन के नाते अब तक कुल सात टीमें 2026 के हॉकी विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई कर चुकी है। पैन अमेरिकन कप और यूरो चैंपियनशिप के बाद अमेरिका, कनाडा, चिली, फ्रांस, इंग्लैड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, आयरलैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड के रूप में दस टीमें, एशिया कप के बाद दूसरे से छठे स्थान पर रहने वाली पांच और अफ्रीका से एक टीम के रूप मे 16 टीमें पुरुष हॉकी विश्व कप क्वॉलिफायर्स 2026 में विश्व कप में बाकी नौ स्थानों के लिए भिड़ेगी।
भारत का पहला मकसद है सुपर 4 में पहुंचना
2022 में जकार्ता में हुए पुरुष एशिया कप से दस खिलाड़ियों ने भारत के लिए अपने सीनियर अतर्राष्ट्रीय हॉकी करियर का आगाज किया था। पाकिस्तान ने असमंजस बनाए रखने के बाद अंतत: ओमान के साथ एशिया कप से हटने का फैसला किया। भारत का पहला मकसद है सुपर 4 में पहुंचना है। भारत अपने अभियान का आगाज इसके पहले दिन पूल ए में 23 वें नंबर पर काबिज चीन के खिलाफ मैच से 29 अगस्त को करेगा फिर दूसरे मैच में 31अगस्त को जापान , 1 सितंबर को आखिरी पूल मैच में कजाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। पूल मैचों के बाद दोनों पूल की शीर्ष दो दो टीमें 3 से 6 सितंबर सुपर 4 में खेलेंगी। सुपर 4 में शीर्ष दो में रहने वाली टीमें सात सितंबर को फाइनल खेलेंगी।
पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 के लिए भारत की 18 सदस्यीय टीम :
गोलरक्षक : कृष्ण बहादुर पाठक, सूरज करकेरा।
रक्षापंक्ति : सुमित, जर्मनप्रीत सिंह, संजय, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह।
मध्यपंक्ति : राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, विवेक सागर प्रसाद।
अग्रिम पंक्ति : मनदीप सिंह, शिलानंद लाकरा, अभिषेक , सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह।वैकल्पिक खिलाड़ी : नीलम संजीप खेस, सेल्वम कार्ति।
‘एशिया कप जीत सीधे विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई करना चाहते हैं ‘
हमने एफआईएच प्रो लीग में अपने अभियान में बहुत कुछ सीखा। हम अपनी कमजोरियों का पता लगातार उनको दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। हम एशिया कप जीत सीधे2026के हॉकी विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई करना चाहते हैं और मुझे अपनी तैयारियों पर पूरा विश्वास है। मैं एफआईएच प्रो लीग में जब खेलने गया तो पूरी तरह फिट था लेकिन वहा मुझे उंगली में चोट गई लेकिन मैंने मैदान पर मौजूद नहीं रहने के बावजूद अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई। चोट खेल का हिस्सा हैं।चोट बेशक निराश करती है लेकिन हॉकी वैयक्तिक खेल नहीं है बल्कि यह टीम खेल है और आपको इसमें एक टीम के रूप में खेलना पड़ता है।मैं अब अपनी चोट से पूरी तरह उबर गया हूं और पूरी तरह फिट हूं। हमारा एशिया कप से पहले साई में शिविर बहुत बढ़िया रहा। हमारी एशिया कप के लिए तैयारी अच्छी रही है और इसके लिए हमें जिन चीजों पर मेहनत करनी थी हमने की है। मुझे उम्मीद है कि हम एशिया कप में शनिवार को अपने मैच में चीन के खिलाफ पूरी शिद्दत से उतरेंगे।बतौर ड्रैग फ्लिकर हम अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम के रशर के साथ गोलरक्षण और कुल मिला कर पूरे पेनल्टी कॉर्नर रक्षण का विश्लेषण करते हैं और फिर इसमें कमी तलाश कर उसे भुनाने की कोशिश करते हैं। सबसे अहम है निरंतर अभ्यास।हमारी सीनियर भारतीय हॉकी टीम में चार पांच ड्रैग फ्लिकर हैं। हम सभी साथ साथ पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रग फ्लिक लगाने का अभ्यास करते हैं। हमने बरसों में बतौर ड्रैग फ्लिकर जो कुछ सीखा उसे मैं उस अनुभव को साथी ड्रैग फ्लिकरों के साथ बांटने की कोशिश करता हूं। हर ड्रैग फ्लिकर की अपनी शैली होती है। बस जरूरी है अपनी थोड़ा तालमेल बैठा अपनी तकनीक सुधारना। मेरा मानना है कि अनुभव के साथ हमारे ड्रैग फ्लिकर और बेहतर होंगे और ज्यादा मौके मिलने के साथ और बेहतर होते जाएंगे। हमारे लिए एशिया कप से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैत्री हॉकी सीरीज खेलना तैयारी के लिहाज से अच्छा रहा। हमने इसमें अपने जिन खिलाड़ियों को आजमाना था उन्हें आजमाया। हम ऑस्ट्रेलिया से आखिरी दो में एक मैच जीते और एक कड़े संघर्ष में हारे। हॉकी में डी यानी सर्किल में जब आप प्रतिद्वंद्वी पर हमला बोलते हैं तो आपकी कोशिश मौके को भुना कर गोल करने की होनी चाहिए। जब आप पर हमला होता तो आपको पूरी मजबूती के साथ अपने किले की चौकसी करनी चाहिए। जहां तक पाकिस्तान के एशिया कप में न खेलने आने की बात है तो उसके खिलाफ मैच खासा रोचक और कभी कभी तनाव व दबाव वाला भी होता है। पाकिस्तान के खिलाफ मैच के लिए दर्शकों में भी उत्सुकता रहती है अब न सही आगे तो उसके खिलाफ हॉकी मैदान पर मुलाकात होगी।
– हरमनप्रीत सिंह, भारत के हॉकी कप्तान
पुरुष हॉकी एशिया कप , राजगीर
शुक्रवार : भारत वि . चीन, दोपहर 3 बजे से