भारत-यूके व्यापार संबंधों को नई मजबूती, संसदीय समिति की अहम बैठक

India-UK trade relations get a new boost, important parliamentary committee meeting

हरीश शर्मा

नई दिल्ली : संसद भवन परिसर में भारत की वाणिज्य संबंधी विभागीय स्थायी समिति ने यूनाइटेड किंगडम की संसद की बिजनेस एंड ट्रेड कमेटी के प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिटेन के सांसद लियाम बर्न ने किया।

बैठक में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों, लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन पर आधारित साझेदारी को रेखांकित किया गया। हाल ही में प्रधानमंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) को द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कदम बताया गया। समिति ने विश्वास जताया कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना हो सकता है।

बैठक में यह भी बताया गया कि भारत, ब्रिटेन का 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि ब्रिटेन भारत का 14वां सबसे बड़ा साझेदार है। साथ ही, ब्रिटेन भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक है। वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने ब्रिटेन में 106 परियोजनाओं में निवेश कर 6,067 नए रोजगार सृजित किए, जिससे वह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा एफडीआई स्रोत बना हुआ है।

समिति की अध्यक्ष डोला सेन ने कहा कि भारतीय व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु टैरिफ संरचना में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि आधारित, श्रम-प्रधान और पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विशाल जनसंख्या के कारण एक बड़ा बाजार है और यहां उद्योग स्थापित करने के लिए श्रम, भूमि और बुनियादी ढांचे की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही, उन्होंने कानूनों के सख्त पालन की आवश्यकता पर बल दिया।

ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख लियाम बर्न ने भारतीय संसद को “महान संसद” बताते हुए कहा कि यह समझौता हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों में से एक है और इसका लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए।

बैठक सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों ने आपसी सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।