रत्नज्योति दत्ता
नई दिल्ली : भारत 21वीं सदी में दुनिया की अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शक्तियों में उभरेगा। यह विश्वास रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने गुरुवार को व्यक्त किया। उन्होंने एआई को लोकतांत्रिक और सर्वसुलभ बनाने के लिए ग्लोबल साउथ के नेतृत्व में एकजुट वैश्विक पहल का आह्वान भी किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मुख्य भाषण देते हुए अंबानी ने कहा कि भारत की एआई दृष्टि “विकसित ग्लोबल साउथ” के लिए मार्गदर्शक मॉडल बन सकती है। उन्होंने तकनीकी शक्ति के केंद्रीकरण के बजाय वैश्विक सहयोग और साझेदारी पर जोर दिया।
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित और महंगी नहीं रहनी चाहिए,” अंबानी ने कहा। “भारत ऐसे भविष्य में विश्वास करता है, जहां एआई सभी के लिए उपलब्ध, किफायती और कल्याणकारी हो।”
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में यह सम्मेलन एक निर्णायक क्षण है। उनके अनुसार, एआई ‘असीम समृद्धि’ का युग ला सकता है और दुनिया के आठ अरब लोगों के लिए साझा प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
एआई अवसंरचना में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश
एआई अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अंबानी ने घोषणा की कि रिलायंस और जियो अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। इस निवेश का उद्देश्य भारत की स्वदेशी और संप्रभु एआई क्षमता विकसित करना है।
“यह सट्टा निवेश नहीं, बल्कि अनुशासित और राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित पूंजी है,” अंबानी ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि “भारत बुद्धिमत्ता किराये पर लेकर आगे नहीं बढ़ सकता।”
अंबानी ने जियो इंटेलिजेंस के तहत तीन प्रमुख पहलों की घोषणा की –
गिगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर: जामनगर में बहु-गिगावाट क्षमता वाले एआई-तैयार डेटा सेंटर का निर्माण जारी है। 2026 की दूसरी छमाही में 120 मेगावाट से अधिक क्षमता शुरू होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से गिगावाट स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
हरित ऊर्जा आधारित संचालन: कच्छ और आंध्र प्रदेश की सौर परियोजनाओं से लगभग 10 गिगावाट अधिशेष नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कर एआई अवसंरचना को टिकाऊ और किफायती बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय एज कंप्यूटिंग नेटवर्क: जियो के दूरसंचार नेटवर्क से एकीकृत एज कंप्यूटिंग प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे गांवों से महानगरों तक कम विलंबता और सस्ती एआई सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
अंबानी ने कहा कि जिस जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा, वही अब देश को “बुद्धिमत्ता युग” से जोड़ेगा और एआई सेवाओं की लागत भी मोबाइल डेटा की तरह उल्लेखनीय रूप से कम करेगा।
भारत की डिजिटल बढ़त
भारत की डिजिटल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अंबानी ने कहा कि देश में लगभग 100 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, डेटा दरें दुनिया में सबसे कम हैं, आधार के माध्यम से 140 करोड़ से अधिक डिजिटल पहचान जारी की जा चुकी हैं और प्रति माह 12 अरब से अधिक यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं। साथ ही, देश में एक लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय शक्ति, लोकतांत्रिक व्यवस्था, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, विशाल डेटा सृजन और तीव्र विकास दर भारत को वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में विशिष्ट बढ़त प्रदान करते हैं।
हर क्षेत्र में एआई का विस्तार
अंबानी ने स्पष्ट किया कि जियो इंटेलिजेंस केवल संवाद आधारित एआई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादकता, दक्षता और समावेशन को केंद्र में रखेगा। उन्होंने सभी भारतीय भाषाओं में विश्व-स्तरीय बहुभाषी एआई विकसित करने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि किसान, कारीगर और विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में तकनीक का लाभ उठा सकें।
उन्होंने जिन पहलों का उल्लेख किया, उनमें शामिल हैं—
- जियोशिक्षक: 22 भाषाओं में उपलब्ध अनुकूलनशील एआई शिक्षण सहायक।
- जियो आरोग्यएआई: पांच मिनट के भीतर प्रारंभिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान करने वाली सेवा।
- जियोकृषि: 14 करोड़ किसानों के लिए उपग्रह एवं मौसम आधारित सलाह प्रणाली।
- जियोभारतआईक्यू: सरकारी सेवाओं, कौशल विकास और आजीविका सहायता के लिए वॉयस-आधारित एआई सहायक।
इसके अतिरिक्त, जियोफ्रेम्स स्मार्ट चश्मा और जियोहॉटस्टार पर एआई-सक्षम सामग्री भारत की रचनात्मकता और सांस्कृतिक प्रभाव को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करेगी।
वैश्विक सहयोग पर जोर
अंबानी ने चेतावनी दी कि चिप्स और दुर्लभ खनिज संसाधनों का संचयन तथा वैश्विक ध्रुवीकरण असमानताओं को बढ़ा सकता है।
“एआई अपनी शक्ति साझेदारी से दिखाता है, संग्रह से नहीं; सहयोग से, संघर्ष से नहीं,” उन्होंने कहा और “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” के सिद्धांत को दोहराया।
उन्होंने देशों से आह्वान किया कि वे बुद्धिमत्ता के साथ संवेदनशीलता को जोड़ते हुए अधिक समावेशी, न्यायसंगत और समृद्ध भविष्य का निर्माण करें।





