
- गुलाबी गेंद से शानदार रिकॉर्ड के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के लिए भारत को रोकना मुश्किल
- यशस्वी के साथ केएल राहुल का पारी शुरु करना और रोहित का मध्यक्रम में खेलना लगभग तय
- हेजलवुड के चोट चलते बाहर होने से ऑस्ट्रेलिया के पलटवार की उम्मीद कम
- भारतीय बल्लेबाजों को मिचेल स्टार्क और बोलैंड से चौकस रहना होगा
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड ओवल में खासतौर पर डे नाइट टेस्ट में गुलाबी गेंद से शानदार रिकॉर्ड के बावजूद मेजबान टीम के लिए मेहमान भारत के हाथों पर्थ में पांच टेस्ट मैच की बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी के पहले टेस्ट में 295 हार की बाद उसे एडिलेड में सीरीज के दूसरे क्रिकेट टेस्ट में भी रोक पाना बेहद मुश्किल होगा। ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड ओवल में भारत से आठ टेस्ट जीते हैं। ऑस्ट्रेलिया एडिलेड में पिछले एक दशक में मात्र एक टेस्ट हारा है और वह भी भारत से 2018 में। ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड में गुलाबी गेंद से सात डे नाइट जीते हैं। वहीं भारत ने अब तक चार डे नाइट टेस्ट मैच खेले हैं तीन जीते हैं उसे इकलौती हार 2020 में विराट कोहली की कप्तानी में सीरीज के एडिलेड में सीरीज के पहले टेस्ट में दूसरी पारी में अपने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के न्यूनतम स्कोर मात्र 36 रन ढेर हो आठ विकेट से झेलनी पड़ी। भारत के लिए अच्छी खबर है कि उसके नियमित कप्तान रोहित शर्मा के टीम से जुड़ चुके हैं और शुभमन गिल बाएं अंगूठे की चोट से पूरी तरह उबर प्राइम मिनिस्टर इलेवन के खिलाफ अर्द्धशतक जड़ रंगत पा चुके हैं। भारत अब एडिलेड में पांच टेस्ट की बॉर्डर गावसकर ट्रॉफी के गुलाबी गेंद से खेले जाने वाले सीरीज के दूसरे टेस्ट में भी मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दर्ज कर उसके एडिलेड में सात डे नाइट जीतने के रिकॉर्ड को तोड़ सीरीज में 2-0 की बढ़त ले कामयाबी की नई इबारत को लिखने के मकसद से उतरेगा। भारत के लिए उत्साहवर्द्धक बात यह है कि उसके धुरंधर बल्लेबाज विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में तीन टेस्ट शतक जड़े हैं।विराट कोहली यदि एडिलेड टेस्ट में भी सेंचुरी जड़ते हैं तो फिर वह इस मैदान पर चार सेंचुरी जड़ने वाले पहले विदेशी बल्लेबाज बन जाएगें। वहीं भारत के तेज गेंदबाज बुमराह को इस साल 50 टेस्ट विकेट लेने वाला पहला गेंदबाज बनने के लिए बस एक विकेट चाहिए। विराट ही वह दुनिया में डे नाइट टेस्ट में शतक जड़ने वाले इकलौते बल्लेबाज हैं और उन्होंने यह कारनामा 2019 में बांग्लादेश के खिलाफ ईडन गार्डन में किया था। विराट कोहली और नवोदित सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के पर्थ में पहले टेस्ट में दूसरी पारी में शतक जड़ रंग में लौटने और केएल राहुल के लंगर डाल दोनों पारियों में बल्लेबाजी करने और जसप्रीत बुमराह की बतौर कप्तान अनुकरणीय गेंदबाजी से पस्त ऑस्ट्रेलिया की सीरीज में वापसी की राह मुश्किल हो गई है। ऑस्ट्रेलिया के लिए एडिलेड में सीरीज के दूसरे टेस्ट में भी खासतौर पर विराट कोहली, केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल को रोकना मुश्किल होगा । एडिलेड में सीरीज के दूसरे डे नाइट टेस्ट पहले दिन तेज बारिश और अंधड़ खेल में खलल डाल सकता है और ऐसे में मुमकिन है कि खेल दूसरे दिन शुरू लेकिन इसके बाद मौसम साफ रहने और नतीजे की पूरी उम्मीद है।
भारतीय बल्लेबाजों को अतीत में एडिलेड में टेस्ट मैच में 2003 में दोहरा शतक जड़ने वाले राहुल द्रविड़ के साथ वीवीएस लक्ष्मण, 2008 में सचिन तेंडुलकर व वीरेंद्र सहवाग, 2012 अपने पहले और 2013 में दोनों पारियों में विराट कोहली तथा 2018 में चेतेश्वर पुजारा द्वारा जड़े शतकों और 2020 में हार के बावजूद पहली पारी में विराट कोहली की 74 रन की पारी से प्रेरणा ले इस मैदान पर उतरना चाहिए। भारत भले ही 2020 सीरीज के एडिलेड में पहले डे नाइट टेस्ट में पहली पारी में 53 रन की बढ़त लेने के बाद जोश हेजलवुड के पांच रन देकर चटकाए पांच विकेट के सामने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में टेस्ट क्रिकेट में अपने न्यूनतम स्कोर 36 पर ढेर हो मात्र तीन दिन में आठ विकेट से जरूर हारा लेकिन अब यह अतीत है। अब तक गुलाबी गेंद से खेले कुल 22 डे नाइट टेस्ट मैचों में मात्र छह ही पूरे पांच दिन चले हैं,सात चार दिन, सात तीन दिन और दो मात्र दो दिन खत्म हो गए हैं।ऐसे में बड़ा सवाल यह रहेगा कि क्या एडिलेड में सीरीज का शुक्रवार से शुरू हो रहा दूसरा डे नाइट पूरे पांच दिन तक चलेगा ? गुलाबी गेंद, उसकी काली सीम के कारण खासतौर बल्लेबाजों के लिए शाम को गोधूलि के वक्त बिजली की दूधिया रोशन में गेंद की स्विंग और ‘लेकर‘(रंग की मोटी परत) के कारण पढ़ पाना मुश्किल होता है। सच तो गुलाबी गेंद को खेलने के लिए बल्लेबाजों को अपने बल्लेबाजी कौशल के साथ तकदीर का साथ चाहिए।
भारत का एडिलेड टेस्ट में बल्लेबाजी क्रम क्या रहेगा और रनों के जूझते ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के प्रदर्शन पर एडिलेड में गुलाबी गेंद से खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट पर निगाहें रहेंगी। पर्थ में सीरीज का पहला टेस्ट जीत पांच टेस्ट मैच की बॉर्डर गावसकर ट्रॉफी में 1-0 से आगे चल रही भारतीय एकादश में ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले ज्यादा बदलाव की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनी एकादश में पूरी तरह फिट न होने के बावजूद चोट से परेशान ऑलराउंडर मिचेल मार्श को और चोट के चलते बाहर जोश हेजलवुड की जगह तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड को अपनी एकादश में शामिल करने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ा सवाल यह रहेगा कि क्या मार्श गेंदबाजी भी कर पाएंगे? गुलाबी रोहित शर्मा ने अपनी पिछली दस टेस्ट पारियों मात्र एक अर्द्धशतक जड़ा। रोहित का ऑस्ट्रेलिया में उसके खिलाफ सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 63 जो कि उन्होंने 2018 19 की सीरीज में छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते बनाया।
एडिलेड टेस्ट से तुरुप के तेज गेदबाज जोश हेजलवुड की ‘रहस्यमय चोट‘ के चलते बाहर होने और तुरुप के बल्लेबाज मरनस लबुशेन के रंग में नहीं होने और पहले टेस्ट की शर्मनाक हार से घायल ऑस्ट्रेलिया के पलटवार कर भारत से दूसरे टेस्ट में जीतने की आस लगाना मौजूदा हाल में मुनासिब कम लगता है। भारत के हौसले बुलंद हैं ही कप्तान रोहित शर्मा और अब फिट शुभमन गिल के उपलब्ध होने से दोनों की एडिलेड में दूसरे टेस्ट में भारत की एकादश में वापसी तय है। केएल राहुल के पर्थ टेस्ट की मुश्किल पिच पर दोनों पारियों में नौजवान सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के साथ खासतौर पर दूसरी पारी 201 रन से ज्यादा की भागीदारी करने के बाद भारत के अपनी सलामी जोड़ी में बदलाव की कोई उम्मीद ही नहीं है। ऐसे में शुभमन गिल तीसरे और रोहित शर्मा हॉकी के सेंटर हाफ की तरह भारतीय बल्लेबाजी की धुरी के रूप में चौथे और विराट कोहली संभवत: बड़े अंतराल के बाद पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते दिखे। रोहित और शुभमन गिल की वापसी से देवदत्त पड्डीकल और ध्रुव जुरैल को भारतीय एकादश से बाहर बैठना पड़ेगा। भारतीय शीर्ष क्रम को एडिलेड में खास तौर पर खासतौर पर डेनाइट टेस्ट में सबसे ज्यादा अब तक कुल 39 विकेट चटका सबसे कामयाब रहे तेज गेंदबाज ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क और हेजलवुड की जगह ऑस्ट्रेलियाई में शामिल अपने गृह मैदान पर खेलने जा रहे तेज गेंदबाज बोलैंड से जरूर चौकस रहना होगा। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान तेज गेंदबाज पैट कमिंस नई गेंद से अपना कौशल दिखा अपनी टीम को एडिलेड में जीत दिला सीरीज में एक एक की बराबरी दिलाने को बेताब होंगे।
नियमित कप्तान रोहित शर्मा के अपने बेटे के जन्म के समय अपनी पत्नी के साथ रहने के चलते उपलब्ध न होने पर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कप्तान के रूप में अनुकरणीय गेंदबाजी कर भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ में सीरीज के पहले टेस्ट मैच में 295 रन से बड़ी जीत दिला कर अपनी टीम को हर वक्त सिर माथे बैठाने वाले और खासतौर पर भारतीय टीम को कमतर आंकने का हर कारण खोजने वाले ऑस्ट्रेलिया मीडिया का मुंह बंद करा दिया। मेजबान भारत के अपने घर में मेहमान न्यूजीलैंड से तीन टेस्ट की सीरीज 0 -3 से हारने के बाद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट क्रिकेटरों और क्रिकेट मीडिया ने उसका मर्सिया पढ़ने के साथ विराट कोहली को चुका हुआ मान खारिज कर अपनी ऑस्ट्रेलियाई टीम के पांच टेस्ट की बॉर्डर गावसकर ट्रॉफी 5-0 से जीतने की भविष्य कर दी। यशस्वी जायसवाल और विराट कोहली के पर्थ में पहले टेस्ट की दूसरी पारी में जड़े शतकों और मैन ऑफ द’ मैच रहे जसप्रीत बुमराह के सामने ऑस्ट्रेलिया ने जिस तरह घुटने टेके उससे मेजबान टीम के मीडिया के पास अब बचने के लिए कोई बहाना नहीं है।
गुलाबी गेंद के स्विंग और सीम मूवमेंट के सामने बल्लेबाजी मुश्किल
डे नाइट टेस्ट मैच में लाल की जगह इस्तेमाल की जानी गुलाबी गेंद की चमक ज्यादा बिजली के दूधिया प्रकाश में देर तक बरकरार रखती है और गेंद बल्लेबाज के अनुमान से कहीं जल्दी उसके बल्ले पर पहुंचती है। सांझ को गोधूलि वेला में गेंद गजब की स्विंग और सीम से मूव होती है। गुलाबी गेंद के सामने बल्लेबाजी करना बल्लेबाजों के लिए खासा मुश्किल होता है। साथ ही ‘लेकर’ इस्तेमाल के चलते गेंद शुरू के ओवर में ज्यादा स्विंग होती ही है और लाल गेंद की तुलना में सीम मूवमेंट भी ज्यादा होता है। लाल गेंद की सफेद गेंद से सिलाई की बजाय गुलाबी गेंद में सिलाई काले धागे से की जाती है। गुलाबी गेंद पर ‘लेकर’ के अतिरिक्त कोट के चलते पिच पर गिरने के बाद गेंद ज्यादा से फिसल आती ही है और जब बल्ले से टकराती है तो ज्यादा भारी महसूस होती है।