भारत में 2025 की सुर्खियां की गुंजाहट

India's 2025 headlines resonate

प्रो. नीलम महाजन सिंह

सभी पाठकों, मित्रों और आप के परिवार को नूतन वर्ष 2026 की तहे दिल से मुबारकबाद। 2025 खत्म होने पर ज़्यादातर लोग नए साल के संकल्प तय करने में व्यस्त हैं। हर नया साल बदलाव का वादा करता है। इस साल, भारत तेज़ी से आगे बढ़ा, फिर भी कुछ सुर्खियां अत्यंत चिंतित करने वाली रहीं हैं। कुछ मामलों में, नाम, तारीखें व जगहें बदल गईं, लेकिन कहानियाँ नहीं बदलीं। एक ओर हावी बीजेपी, भटकती कांग्रेस, दिल्ली की ज़हरीली हवा, वहीं पाकिस्तान से जुड़ा आतंकवाद विशेष रहे। नेताओं के ‘सेक्सिस्ट बयान’, भाषा-युद्ध व नाम बदलने की होड़ नकारात्मक वातावरण बना रहे हैं।

2055 में, बीजेपी ने एक बार फ़िर साबित कर दिया कि भारत की ‘डिफ़ॉल्ट सेटिंग भगवा ही है’। पार्टी ने दिल्ली व बिहार दोनों में ज़बरदस्त जीत हासिल की। ये दोनों राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य हैं। बीजेपी ने दिल्ली में अपना सूखा खत्म किया व 27 साल बाद सत्ता में वापसी की। उसने 70 विधानसभा सीटों में से 48 सीटें; लगभग 46% वोट शेयर के साथ जीतीं। मौजूदा आम आदमी पार्ट सरकार 22 सीटों पर सिमट गई व उसे लगभग 44% वोट मिले। बिहार में जहाँ एनडीए सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही थी, वहीं गठबंधन ने 243 में से 202 सीटों के साथ विधानसभा में जीत हासिल की। ​​बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पार्टी को लगभग 21% वोट शेयर मिला। महाराष्ट्र में, बीजेपी के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ ने 288 में से 207 नगर परिषदों व नगर पंचायत सीटों पर जीत हासिल करके सबसे बड़ा बहुमत हासिल किया। कांग्रेस एक बार फ़िर खुद को रिवाइव करने में नाकाम रही। कांग्रेस इस साल दोनों विधानसभा चुनाव हार गई। अगर बीजेपी की स्क्रिप्ट जानी-पहचानी रही, तो कांग्रेस भी वैसी ही रही। दिल्ली के चुनावों में खाता भी खोलने में नाकाम रहने के बाद, पार्टी ने अप्रैल 2025 में अहमदाबाद में अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमिटी की मीटिंग की। वहीं पुराने मुद्दे उठाए गए: बूथ लेवल से संगठन को फिर से बनाने की बात, पार्टी की विचारधारा को बीजेपी विरोधी बयानबाजी से आगे ले जाना व हिंदी बेल्ट में खोई हुई ज़मीन वापस पाना, मुख्य मुद्दे रहे। बिहार में कांग्रेस सिर्फ 6 सीटें जीत पाई व उसे 8.7% वोट शेयर मिला।

चुनाव दर चुनाव, पूरे साल एनालिसिस में वही शब्द सामने आते रहे: ‘बिखरी हुई, गुटबाजी से भरी’, ‘ज़मीनी स्तर पर कोई जुड़ाव नहीं’ आदि।

अन्य सुर्ख़ियों में: क्या मिस्टर रोहित-विराट-धोनी का आखिरी गेम है? 2025 क्रिकेट से आधुनिक दिग्गजों के रिटायर्मेंट पर ध्यानाकर्षित रहा है। टी-20 फॉर्मेट से रिटायरमेंट की घोषणा के बाद, रोहित शर्मा और विराट कोहली ने कम मैच खेले। हालांकि, हर मैच, सीरीज़, या फॉर्म में गिरावट या आराम ने “क्या यह उनका आखिरी मैच है पर, बहस छेड़ दी। महेंद्र सिंह धोनी, जो लंबे समय से इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन अभी भी चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खास हैं, हर (IPL) आई.पी.एल. मैच में रिटायरमेंट की गॉसिप में बने रहे। खास सुर्खियों में दिल्ली का प्रदूषण है। हमेशा की तरह, इस सर्दी में भी दिल्ली ‘गैस चैंबर’ बनी हुई है। शहर का (AQI) ए.कयू.आई. लगातार कई दिनों तक ‘गंभीर से “खतरनाक’ रेंज में बना रहा। (GRAP) ग्रेप प्रतिबंध बार-बार लगाए गए, जो स्टेज 1, 2, 3 व 4 से गुज़र रहे हैं। एक एनालिसिस से पता चला कि दिसंबर के बीच तक (AQI) लेवल 1500 से ऊपर बना रहा।

फ्लाइट्स में देरी हुई, स्कूल ऑनलाइन हो गए, कंस्ट्रक्शन पर बैन वापस आ गया, व मास्क पहने बच्चों, गायब होते इंडिया गेट व ग्रे आसमान की जानी-पहचानी तस्वीरें फीड्स पर छा गईं। एक्सपर्ट्स ने एक बार फिर उसी ‘कॉकटेल’ का ज़िक्र किया: सर्दियों में हवा का उलटा होना, कम हवा, गाड़ियों और इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं, और पराली जलाना, सभी प्रदूषण का कारण हैं। एक दशक की लगभग किसी भी सर्दी से कॉपी-पेस्ट की हुई लग रही थी: “दिल्ली का दम घुट रहा है”, “दिल्ली गैस चैंबर बन गई है”, “दिल्ली की हवा लाल हो गई है”; जैसे न्यूज ब्रेकिंग सुनने को मिले। अन्य महत्वपूर्ण हेडलाइन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से गिरते रुपये के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा था: “मैं इसे रुपये का गिरना नहीं मानूंगी, मैं इसे डॉलर का मज़बूत होना मानूंगी।” 2025 में, रुपये ने चुपचाप अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमज़ोरी के नए रिकॉर्ड बनाए। कुछ स्थिरता के बाद, यह दिसंबर में अब तक के सबसे निचले स्तर ₹91 रुपये पर आ गया। अब तक रुपया 5-6% गिर चुका है, जिससे यह इस साल एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई है।

अन्य महत्वपूर्ण सुर्खियों में, इस बीच, एनालिस्ट इस गिरावट के लिए बड़े ट्रेड डेफिसिट, विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो व डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं।

पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखा और भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ मुंहतोड़ जवाब मिला। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के पास, आतंकवादी हमले में 26 नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें ज़्यादातर हिंदू पर्यटक थे। जांच में पता चला कि हमले का मास्टरमाइंड ‘लश्कर-ए-तैयबा का एक गुट, ‘दी रेजिस्टेंस फ्रंट’ था। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के साथ कड़ा जवाब दिया, जिसमें मिसाइलों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी ढांचे को नष्ट कर दिया। इस्लामाबाद ने एक बार फ़िर ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया, जबकि उसके सेना के मेजर आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल होते देखे गए। “आतंकवाद ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव पैदा किया” यह हेडलाइन दु:खद रूप से साबित हुई।

इस साल हमने नेताओं को पुरानी ‘सेक्सिस्ट टिप्पणियां’ करते देखा। राजनीतिक विवादों की कोई ऐसी शैली है जो कभी फैशन से बाहर नहीं होती, तो वह है हमारे नेताओं की महिला विरोधी टिप्पणियां। बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने प्रियंका गांधी के बारे में एक सेक्सिस्ट टिप्पणी करके हंगामा खड़ा कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस व आप नेताओं ने इसे ‘गहरी महिला विरोधी मानसिकता’ का सबूत बताया।

बिधूड़ी ने कहा था, “लालू ने बिहार में कहा था कि वह हेमा मालिनी के गालों जैसी सड़कें बनाएंगे, लेकिन उन्होंने झूठ बोला, वह ऐसा नहीं कर सके। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि जिस तरह हमने ओखला और संगम विहार में सड़कें बनाई हैं, उसी तरह हम कालकाजी की सभी सड़कें प्रियंका गांधी के गालों जैसी बनाएंगे।” शर्मनाक!
केरल में, एक CPI(M) सीपीआई नेता ने पंचायत सीट जीत की रैली निकाली और कहा कि “महिलाएं सिर्फ पतियों के साथ सोने के लिए होती हैं”।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में हिजाब पहनी महिला का नकाब खींचकर विवाद खड़ा कर दिया। बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने सी.एम. नीतीश के इस काम का बचाव करते हुए कहा कि कुमार ने एक “अभिभावक की तरह व्यवहार किया और महिला या तो नौकरी कर सकती है या भाड़ में जा सकती है”। इस साल बिहार में भी ऐसे कई पल देखने को मिले। राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने भी नीतीश के बारे में एक भद्दा कमेंट किया, यह इशारा करते हुए कि वह महिलाओं की रैली में “महिलाओं को घूरने” जा रहे हैं। नीतीश की महिला संवाद यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “नयन सेकने जा रहे हैं।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी एक गैंगरेप केस के बाद अपनी सरकार का बचाव करते हुए पीड़िता को ही दोषी ठहराने के कारण आलोचनाओं में घिर गईं। ममता ने पूछा, “वह आधी रात को बाहर क्यों थी?” “नेता की सेक्सिस्ट टिप्पणियों से बवाल” वाली हेडलाइन लगभग हर महीने आ रहीं हैं। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान, जब केंद्र सरकार ने विकसित भारत – रोज़गार जीविका मिशन (ग्रामीण) यानी (VB-G RAM G) बिल पेश किया, जिसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (MGNREGA) की जगह ली; तो विपक्षी दल भाजपा की निंदा करते रहे।

‘सलमान खान और राहुल गांधी की शादी कब होगी?’
दोनों ही ‘एलिजिबल बैचलर’ बने रहे। भले ही भारत युद्ध, रुपये और हवा की क्वालिटी पर बहस कर रहा था, लेकिन पॉप-पॉलिटिकल कल्चर में एक हल्की लेकिन अहम बात बनी रही: भारत के हमेशा कुंवारे रहने वाले लोगों की शादी की स्थिति को लेकर जुनून। खैर! अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक युद्धाभ्यास हो रहे हैं, जिसमें रूस-यूक्रेन व इजरायल-हमास (गाजा) प्रमुख हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस वर्ष विश्व में शांति और सौहार्दपूर्ण परिस्थितियों से वासुदेव कुटुम्बकम का माहौल बने।

प्रो. नीलम महाजन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, अंतर्राष्ट्रीय सामयिक विशेषज्ञ, दूरदर्शन व्यक्तित्व, सॉलिसिटर फॉर ह्यूमन राइट्स संरक्षण व परोपकारक