
- वंदना ने भारत के लिए सबसे ज्यादा 320 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल 158 गोल किए
- अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने का सही समय था
- वंदना हैं जीवट व संकल्प के साथ भारतीय हॉकी को लगातार नई बुलंदियों पहुंचाने की कहानी
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : हरिद्वार में बीएचईएल से एकदम सटे छोटे से गांव रोशनाबाद से आकर भारत ही नहीं दुनिया की सर्वकालीन सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर के रूप में करीब डेढ़ दशक तक छाई रहने कय32 बरस की वंदना कटारिया ने मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा दिया। वंदना कटारिया भारत की अपनी तरह कामयाब स्ट्राइकर रही पूर्व कप्तान रानी रामपाल की समकालीन उनके भारत के लिए कामयाब अंतर्राष्ट्रीय हॉकी करियर की सबसे बड़ी सहयात्री रही।वंदना कटारिया को 2021 में अर्जुन अवॉर्ड और 2022 में पदमश्री से नवाजा गया। वंदना को 2014 में हॉकी इंडिया के बलबीर सिंह सीनियर अवॉर्ड और 2021 मं हॉकी इंडिया उत्कृष्ट योगदान के लिए हॉकी इंडिया प्रेसिडेंट अवॉर्ड 2021 और 2022 धनराज पिल्लै अवॉर्ड से नवाजा गया, वंदना कटारिया को भारत के लिए सबसे ज्यादा 320 अंतर्राष्ट्रीय हॉकी हॉकी मैच खेल 158 गोल करने का गौरव हासिल है।रानी रामपाल ने 24 अक्टूबर, 2014 को भारत के लिए 254 अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेल 120 गोल कर अंतराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहा था। वंदना कटारिया की हॉकी यात्रा भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में सबसे ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने और गोल करने के साथ प्रेरणादायक विरासत , जीवट व संकल्प के साथ भारतीय हॉकी को लगातार नई बुलंदियों पहुंचाने की कहानी है। वंदना कटारिया अपनी समकालीन रानी रामपाल की तरह भारत की वंदना कटारिया 2020 के टोक्यो ओलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हैट्रिक जमा भारत के लिए इन खेलों में महिला हॉकी में यह कारनामा करने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनने का गौरव पाया था। वंदना हैट्रिक से भारत ने दक्षिण अफ्रीका पर जीत के साथ क्वॉर्टर फाइनल में स्थान बनाया। भारत ने गुरजीत के गोल से क्वॉर्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया लेकिन सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से 1-2 हारने के बाद रानी रामपाल की कप्तानी में गुरजीत कौर के दो और वंदना कटारिया के एक गदेल के बावजूद 2020 के ओलंपिक में कांस्य पदक में ब्रिटेन से 3-4 से हार कर चौथे स्थान पर रहा था। । वंदना भारत की 2013 में जूनियर महिला हॉकी विश्व कप में कांसा जीतने वाली टीम की स सदस्य तो रही ही उन्होंने टूर्नामेट में सबसे ज्यादा गोल किए थे।
द.अफ्रीका के खिलाफ ओलंपिक में हैट्रिक सबसे भावुक क्षण
अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने वाली वंदना कटारिया ने भारत के लिए अपना अंतिम मैच फरवरी, 2024-25 में बीते महीन एफआईएच प्रो हॉकी लीग में भुवनेश्वर में खेला। वंदना कटारिया ने कहा,‘अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने का फैसला लेना आसान नहीं था, लेकिन मैं जानती हूं यह अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने का सही समय था। हॉकी मेरी जिंदगी रही है और भारत की जर्सी पहन भारत के लिए खेलना सबसे बड़ा सम्मान है। हर यात्रा का अपना तय रास्ता होता है। मैं हॉकी के प्रति गर्व, पयार के इसे अलविदा कह रही हूं। भारतीय हॉकी सही हाथों में है और मैं हमेशा इसकी समर्थक रहूंगी। मैं भारतीय हॉकी टीम के लिए अपनी डेढ़ दशक की यात्रा में अपने हॉकी उस्तादों, अपनी साथियों , सपोर्ट स्टाफ, हॉकी इंडिया और परिवार के साथ उन सभी हॉकी प्रेमियों जिन्होंने बरसो मेरा सर्थन किया आभारी हूं। मेरे लिए अपने प्रशंसकों का मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए हर शब्द बेहद अहम है।ओलंपिक खेल वाकई खास और 2020के ओलंपिक में हैट्रिक जमा अपनी भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका पर 4-3से जीत दिलान क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचना मेरे हॉकी करियर का सबसे भावुक क्षण था, मैं आपने देश के लिए सब कुछ झोंक देना चाहती थी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ओलंपिक में हैट्रिक जमाना मेरे हॉकी करियर का सबसे भावुक क्षण था। इससे भी ज्यादा अहम यह बताना था कि हम अंतर्राष्ट्रीय हॉकी टीमों के साथ कदमताल कर सकते है।’
भारतीय हॉकी टीम के आक्रमण की धड़कन रही वंदना : दिलीप तिर्की
भारत के चार ओलंपिक खेलने वाले पूर्वकप्तान हॉकी इंडिया के अध्यक्ष डॉ.दिलीप तिर्की ने वंदना के भारतीय हॉकी में योगदान को सराहते हुए कहा, ‘ वंदना मात्र गोल स्कोरर ही नहीं भारतीय हॉकी टीम के आक्रमण की धड़कन, अनुकरणीय हॉकी की बानगी दिखाने वाली खिलाड़ी और पूरी शिद्दत से टीम के लिए खेलनी वाली हाकी खिलाड़ी रही वंदना की अग्रिम पंक्ति में मौजूदगी खासतौर पर दबाव की स्थिति में खासतौर पर भारत का पलड़ा भारी कर देती थी। भारतीय हॉकी को वैश्विक मंच पर बुलंइी पर पहुंचाने में वंदना का अहम योगदान रहा। वंदना ने भारतीय हॉकी की आने वाली पीढ़ियों के लिए मानक कायम किया। हॉकी इंडिया को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। हम उनके शानदार भविष्य की कामना करते हैं।
वंदना का टोक्यो का ओलंपिक प्रदर्शन बरसो याद किया जाएगा : भोलानाथ
हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा, ‘वंदना की हॉकी यात्रा बेहद प्रेरक रही। वंदना ने अपने शुरुआती दिनों से लेकर भारतीय हॉकी की धुरंधर खिलाड़ी बनन तक गजब का कौशल और प्रतिबद्धता दिखाई । वंदना का अहम मैचों खासतौर पर टोक्यो ओलंपिक में अहम प्रदर्शन बरसो याद किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह वंदना जीवट, उत्कृष्टता व प्रेरणा की ऐसी विरासत छोड़ गई हैं भारतीय महिला हॉकी के आने वाले सितारों का मार्गदर्शन करेंगी।
शानदार रहा है वंदना करियर
वंदना कटारिया भारत की 2016 में रियो ओलंपिक में शिरकत करने वाली तथा 2020 में टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रहने वाली टीम के साथ 2018 और 2022 के एफआईएच महिला हॉकी विश्व, तीन राष्ट्रमंडल खेलों (2014, 20018 व 2022) के राष्ट्रमंडल खेलों और तीन एशियाई खेलों (2014, 2018, 2022) के एशियाई खेलों में शिरकत करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की अहम सदस्या रही भारतीय हॉकी को बुलंदियों पर पहुंचाने में वंदना कटारिया की भूमिका बेहद अहम रही।वंदना ने भारत को दो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी (2016 व 2023) में स्वर्ण व2022 में एफआईएच महिला नेशंस कप जिताने अहम योगदान किया, वह 2018 में भारत की एशियाई खेलों तथा 2013 में जापान तथा 2018 में डोंगी में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीतने वाली महिला हॉकी टीम की अहम सदस्य रही। वह 2022 में सय रहीं खेलों, 2014 और 2022 के एशियाई खेलों तथा 2021–22 में एफआईएच प्रो लीग में कांसा जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रही।