अशोक भाटिया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच अक्सर टकराव देखने को मिलता है, जिसे लेकर भाजपा उन पर केंद्र का अपमान करने के आरोप लगाती रही है। हाल ही में, सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान हुए कथित कुप्रबंधन और उनसे न मिलने के आरोपों को लेकर भाजपा ने ममता पर संविधान के अपमान का आरोप लगाया, जिसे ममता ने भाजपा की राजनीतिक साजिश बताया।
हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान उनके स्वागत और प्रोटोकॉल को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। चर्चा इस बात को लेकर है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न तो स्वयं राष्ट्रपति के स्वागत के लिए पहुंचीं और न ही अपनी ओर से किसी मंत्री को नामित किया। प्रोटोकॉल के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री का खुद मौजूद रहना अनिवार्य नहीं होता लेकिन परंपरा और शिष्टाचार के तहत उनकी अनुपस्थिति में किसी मंत्री को स्वागत के लिए भेजा जाता है।
ऐसा पहली बार नहीं है कि ममता ने केंद्र सरकार व उसके मंत्रियों का अपमान किया हो । इसके पहले कही ही कई उदहारण है जैसे पीएम की बैठकों में न जाना: चक्रवात के दौरान या कोविड समीक्षा बैठकों में ममता बनर्जी द्वारा समय पर न पहुँचने या बैठक बीच में छोड़कर जाने जैसी घटनाओं को केंद्र सरकार ने ‘सहकारी संघवाद’ के खिलाफ और अपमानजनक माना है। सीबीआई और केंद्रीय एजेंसियों को रोकना: राज्य में सीबीआई की कार्यवाही को रोकने या केंद्रीय जांच एजेंसियों को राज्य में आने से पहले अनुमति अनिवार्य करने के फैसलों को भी केंद्र के प्रति अविश्वास और असंवैधानिक रवैया माना गया। राज्यपाल के साथ टकराव: पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के साथ उनका निरंतर टकराव भी केंद्र-राज्य संबंधों में खटास और अपमान के तौर पर देखा गया।
गोरतलब है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय की ब्लू बुक के तहत तय होती हैं। इसी दस्तावेज में वीवीआईपी दौरों के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल और स्वागत की पूरी व्यवस्था का उल्लेख होता है।इस दस्तावेज में इन वीवीआईपी के दौरे के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल और स्वागत से जुड़े सभी दिशा-निर्देश तय होते हैं। इसकी क्रमांकित प्रतियां संबंधित अधिकारियों को दी जाती हैं और जिला स्तर पर यह जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुख के पास रहती है।
क्या होता है राष्ट्रपति का प्रोटोकॉल प्रोटोकॉल के अनुसार आम तौर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री इन गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हैं। यदि मुख्यमंत्री उपलब्ध न हों, तो वे अपने किसी मंत्री को इसके लिए नामित करते हैं।प्रोटोकॉल अधिकारियों के अनुसार, इन दौरों से पहले यह सूची तैयार कर ली जाती है कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या राज्य की सीमा पर कौन-कौन गणमान्य व्यक्ति स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे। यह सूची राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के कार्यालय को भेजी जाती है और उनकी मंजूरी के बाद ही अंतिम व्यवस्था तय होती है।
ममता का न आना यह पहली बार नहीं है । ऐसे कई मौके रहे हैं जब मुख्यमंत्री किसी कारण से स्वागत के लिए मौजूद नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने अपने किसी मंत्री को नामित किया। उदाहरण के तौर पर, सितंबर 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मथुरा दौरे के दौरान न तो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद थीं और न ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। उस समय मुख्यमंत्री योगी ने अपने मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी को राष्ट्रपति के स्वागत के लिए भेजा था।इसी तरह, उत्तर प्रदेश में 2014 से 2017 के बीच जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के दौरे पर आते थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उपलब्ध नहीं होते थ तो वे अपने किसी मंत्री को स्वागत के लिए नामित कर देते थे। यही व्यवस्था उस समय के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दौरों के दौरान भी अपनाई गई थी।
पश्चिम बंगाल में अब तक ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिला है जब प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का स्वागत न तो मुख्यमंत्री ने किया हो और न ही किसी मंत्री ने। मई 2021 में चक्रवात यास के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य दौरे के दौरान भले ही ममता बनर्जी ने उनकी अध्यक्षता वाली समीक्षा बैठक में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन वह एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने जरूर पहुंची थीं।
प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ब्लू बुक के नियम काफी सख्त होते हैं और इनमें मामूली विचलन भी कई स्तरों पर सवाल खड़े कर सकता है। ऐसे में राष्ट्रपति के स्वागत को लेकर बंगाल में पैदा हुआ यह विवाद राजनीतिक और प्रोटोकॉल दोनों ही स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा विवाद उसे भी जानना जरुरी है । बत्ताया जाता है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जो मूल रूप से बिधाननगर में आयोजित होने वाला था। हालांकि, सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी अन्य कारणों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बिधाननगर की जगह बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशैपुर में कार्यक्रम आयोजित किया।राष्ट्रपति शनिवार दोपहर जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो वहां केवल कुछ ही लोग उपस्थित थे। सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए मौजूद थे। इस पर राष्ट्रपति ने कहा कि ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन की तरह हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। मुझे नहीं पता कि वह नाराज हैं या नहीं। खैर, यह महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम का स्थल बदलने पर भी सवाल उठाया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अगर कार्यक्रम बिधाननगर में होता, तो बेहतर होता। वहां काफी जगह थी और काफी लोग आ सकते थे। लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। आज का कार्यक्रम ऐसे स्थान पर हो रहा है, जहां लोगों के लिए आना मुश्किल है। शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहती और इसलिए उन्हें यहां आने से रोका गया।
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा राजनीति के लिए राष्ट्रपति के पद का इस्तेमाल कर रही है। कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा इतनी नीचे गिर गई है कि वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नाम लेकर पश्चिम बंगाल को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
इस दौरान सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि वे राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन चुनाव के समय भाजपा के कहने पर राजनीति में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का संवैधानिक पद है और उन्हें राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जब मणिपुर और अन्य भाजपा शासित राज्यों में आदिवासी समुदाय के लोगों पर अत्याचार हुए, तब राष्ट्रपति ने उस पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि आदिवासियों के मुद्दे पर भाजपा दोहरा रवैया अपनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को शायद पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय के लिए किए गए विकास कार्यों की सही जानकारी नहीं है। सीएम ममता बनर्जी के अनुसार उनकी सरकार ने राज्य में आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं के तहत कई महत्वपूर्ण काम किए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी यह मुद्दा उठाया और कहा कि आज देश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, और कल पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने देश की राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू का घोर अपमान किया है। द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी परंपरा के एक बड़े उत्सव में शामिल होने के लिए बंगाल गई थीं। इस पर ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही पत्र लिखकर बताया था कि संबंधित निजी संगठन राष्ट्रपति स्तर का कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम नहीं है, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रपति ने अपने विवेक से निमंत्रण स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की व्यवस्था और उसमें आई कमियों के लिए आयोजक और एयरपोर्ट अथॉरिटी जिम्मेदार हैं, राज्य सरकार नहीं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री हर चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाते हैं और राज्य का अपमान करते हैं।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में कोलकाता के मेयर मौजूद थे, जबकि वह खुद लोगों के अधिकारों को लेकर धरने में शामिल थीं। उन्होंने कहा कि हमारे मेयर वहां मौजूद थे। मैं धरने पर थी, ऐसे में मैं वहां से कैसे जा सकती थी? धरना शुरू होने से पहले मुझे इस कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी। मैं यहां लोगों की लड़ाई लड़ रही हूं।





