आत्ममंथन – क्या नोएडा के युवा इंजीनियर युवराज की मौत से सिस्टम लेगा सबक?

Introspection - Will the system learn a lesson from the death of Noida's young engineer Yuvraj?

दीपक कुमार त्यागी

माफ़ करना युवराज इक्कीसवीं सदी के आधुनिक ताकतवर भारत में सिस्टम के पास आज भी अत्याधुनिक जीवन रक्षक संसाधनों का भारी अभाव है।

नोएडा के युवा साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने देश के सिस्टम में व्याप्त लापरवाही पूर्ण सोच व खामियों की एकबार फिर से पोल खोलने का कार्य कर दिया है। दुर्घटना के बाद किसी के घर का चिराग सिस्टम की लापरवाही से पूरी वीरता से लड़ते हुए कुंभकर्णी नींद में सो रहे सिस्टम को जगाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर गया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही उत्तर प्रदेश के सिस्टम में हड़कंप मचा हुआ है, जिसके चलते ही तत्काल नोएडा प्राधिकरण ने इस घटना की जांच कराने की घोषणा कर दी थी और प्रारंभिक जांच के आधार पर अपनी गाज गिराते हुए एक इंजीनियर की नौकरी से समाप्ति तक की कार्रवाई कर दी, वहीं युवराज के पिता ने भी एफआईआर दर्ज करवाई है, और नोएडा प्रशासन ने भी दो लापरवाह बिल्डरों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई है, जिस पर पुलिस जांच करके आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं इस दुखद घटना का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करते पांच दिन में जांच रिपोर्ट तलब करने आदेश दिए हैं, एसआईटी के गठन के तुरंत बाद ही नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. (आईएएस) को हटा कर प्रतिक्षा सूची में रख दिया गया है।

लेकिन इस घटना के बाद लगता है कि ऐसी भयंकर लापरवाही वाली स्थिति में क्या कभी भारत को विश्वगुरु बनाया जा सकता है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि भारत को विश्वगुरु बनाने के सपना को धरातल पर साकार होते हुए देखना हर देशभक्त भारतीय का अपना सपना है। लेकिन देश के सिस्टम में बैठे हुए कुछ लोगों का लापरवाही पूर्ण व भ्रष्टाचार युक्त आचरण इस में सबसे बड़ा बाधक है, अगर ऐसा ही चलता रहा तो यह सपना धरातल पर कैसे मूर्तरूप लेगा, यह एक बड़ा सवाल हर देशभक्त भारतीय के जहन में अक्सर घूमता रहता है। नोएडा में सिस्टम में बैठे कुछ लोगों की लापरवाही का एक उदाहरण शुक्रवार की रात नोएडा में हुई एक कार दुर्घटना के बाद देखने को मिला, जिस तरह से नोएडा में दिलो-दिमाग को झकझोर देने वाली दर्दनाक घटना घटित हुई, उसने दुनिया में हमें उपहास का पात्र बना दिया है, क्योंकि देश एक तरफ़ तो चंद्रमा व मंगल तक अंतरिक्ष की ऊंचाई को छूने का कार्य कर रहा है, वहीं सागर की गहराइयों को चीरते हुए तल तक जा रहा है, लेकिन सिस्टम को बचाव का पूरा समय मिलने के बावजूद भी सिस्टम में बैठे हुए कुछ लोगों की अनिर्णय की स्थिति या लापरवाही के चलते देश के भविष्य 27 वर्षीय युवा इंजीनियर को जमीन पर भी नहीं बचा पा रहा है, जो ठीक नहीं है। यहां आपको बता दें कि इंजीनियर युवराज मेहता की शुक्रवार की रात 12:05 पर अनियंत्रित कार नोएडा में दुर्घटना के बाद एक नाले की दीवार को तोड़ते हुए बिल्डर के द्वारा बेसमेंट के लिए खोदकर छोड़े गए गहरे गड्ढे में गिर गई थी और समय रहते ही युवराज ने फोन करके 12.25 बजे घटना स्थल के पास ही स्थित अपने घर पर पिता को अपने साथ हुई दुर्घटना की जानकारी दी थी। जिसके बाद युवराज के पिता ने भी पुलिस को समय रहते हुए अवगत करा दिया था। सूत्रों के अनुसार 12.41 पर कंट्रोल रूम से कोतवाली प्रभारी के पास फोन आया था, जिसके चलते ही घटनास्थल पर कुछ समय के बाद ही 12.50 पर पुलिस फोर्स और दमकल कर्मी और 1.15 पर एसडीआरएफ की टीम पहुंच गयी थी। युवराज की जान बचाने के लिए सिस्टम ने प्रयास भी शुरू कर दिए थे, लेकिन अफसोस ना जाने क्यों वहां मौजूद सिस्टम विफल रहा और
1.45 पर बेसमेंट में भरे पानी में युवा इंजीनियर युवराज कार समेत डूब गया। 1.55 बजे गाजियाबाद से एनडीआरएफ टीम घटनास्थल पर पहुंची थी, लेकिन शायद जबतक युवराज को काल ने अपना ग्रास बना लिया था, जिसके बाद युवराज की तलाश शुरू हुई, 4.30 बजे युवराज के शरीर को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

जिसके बाद देशवासी हतप्रभ हैं कि इक्कीसवीं सदी के आधुनिक भारत में आखिर ऐसे कैसे काम चलेगा। मृतक के पिता के आरोप, मीडिया की रिपोर्ट व सूत्रों के अनुसार 27 वर्षीय युवा इंजीनियर युवराज ने कड़ाके की ठंड में जान बचाने की एक लंबी जद्दोजहद के दौरान डूबने से पहले कार की छत पर अपने पिता, सिस्टम के लोगों व अन्य लोगों के सामने लगभग 80-90 मिनट तक पूरे हौसले के साथ संघर्ष किया था। जबकि युवराज को बचाने के लिए पुलिस, दमकल विभाग और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीमें समय रहते मौकें पर मौजूद थी, लेकिन अफसोस तीनों विभाग की टीम भी मिलकर युवराज को नहीं बचा पायी। जिसके बाद से पिता व प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप हैं कि कुछ महत्वपूर्ण संसाधनों के अभाव और बचाव टीम के कड़ाके की ठंड के चलते उचित प्रयासों के अभाव के चलते ही युवा युवराज की जान बचाने में विफलता हाथ लगी है, जिसकी सत्यता का एसआईटी की जांच में जल्द ही खुलासा हो जायेगा। मुख्यमंत्री योगी के द्वारा गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद पुलिस व प्रशासन के अन्य लोगों पर गाज गिरनी तय है।

लेकिन अब इक्कीसवीं सदी के आधुनिक शक्तिशाली भारत के हुक्मरानों व सिस्टम के सामने विचारणीय तथ्य यह है कि देश के दिल राजधानी दिल्ली से सटे क्षेत्र में नोएडा में डूबने से पहले कार की छत पर 80-90 मिनट तक एक 27 वर्षीय युवा जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहता है और वहीं उस युवा को बचावकर्मियों की लगभग 80 कर्मियों की एक लंबी चौड़ी टीम मिलकर भी नहीं बचा पाए, यह स्थिति बेहद ही चिंताजनक व विचारणीय है। कार दुर्घटना के बाद डूबकर जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की यह कहानी दिल को झकझोर देने वाली और बेहद दर्दनाक है कि कैसे 27 वर्षीय युवराज मेहता ने खुद को अंतिम समय तक बचाने की भरसक कोशिश की थी, उसने दुर्घटना के बाद भी जबरदस्त हिम्मत से काम लिया। पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरने के बाद भी वह कड़ाके की ठंड में संघर्ष करते हुए कार की छत पर चढ़ने में कामयाब रहा था, उसके बाद अपने पिता को फोन करके हादसे की सूचना दी थी और डूबने से पहले युवराज जान बचाने की उम्मीद में लगभग 80-90 मिनट तक कार की छत पर खड़े होकर के वहां उपस्थित पिता व सिस्टम के लोगों से जल्दी जान बचाने की गुहार लगाता रहा, जो स्थिति बहुत ही हृदयविदारक थी। सूत्रों के अनुसार उस वक्त तक पुलिस, दमकल कर्मी व एसडीआरएफ की बचाव टीम मौके पर थी, एक बेबस लाचार पिता अपने घर के चिराग को बचाने के लिए सिस्टम से गुहार लगा रहा था, लेकिन अफसोस करीब 80 कर्मचारी मिलकर भी युवराज की जान नहीं बचा पाए। बाद में बचाव अभियान के असफल होने के कई कारण चर्चाओं में हैं उस दिन कोहरा बहुत ज्यादा ही था, जो बात एकदम सत्य है, जिसके चलते घटना स्थल पर बहुत ज्यादा अंधेरा था, बचाव कर्मियों के पास घटनास्थल पर उपलब्ध रस्सियों-सीढ़ियों की लंबाई कम थी, जिसके चलते युवराज तक बचाव कर्मी पहुंचने में विफल रहे और बाद में स्थल पर नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के पहुंचने के बाद ही युवराज के शव को बाहर निकाला गया।

युवराज के पिता, दोस्तों और मौके पर उपस्थित लोगों का आरोप है कि इस घटना ने वहां पर उपस्थित पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ की टीम के पास संसाधनों की कमी, कर्मियों की लापरवाही और मानवीय संवेदनहीनता को देशवासियों के सामने लाने का कार्य किया है 80 लोगों की भारी-भरकम ट्रेंड टीम के किसी एक भी सदस्य ने बेसमेंट के ठंडे पानी में उतरकर के युवराज की जान बचाने का साहस तक नहीं जुटाया, वहीं सूत्रों के अनुसार एक राह चलते हुआ अनट्रेंड डिलीवरी देने वाला युवक रस्सी बांध कर कड़ाके की ठंड में बेसमेंट के सरियों की चिंता किये बिना पानी में उतर गया था, उसने युवराज तक पहुंचने का प्रयास किया था, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। वहीं अफसोस घटनास्थल पर उपस्थित पुलिस, दमकल व एसडीआरएफ के पास इस आपदा से निपटने के संसाधन कम पड़ गए थे, जिसके चलते देश का भविष्य एक 27 वर्षीय युवा साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज जनमानस के जहन में अनेक सवाल छोड़ते हुए दुनिया को अलविदा कह गया, एक घर का चिराग संघर्ष करते हुए बुझ गया। लेकिन जिस तरह से इस पूरे मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया उससे लगता है कि इस मामले में अभी बहुत सारे लोगों पर गाज गिरनी तय है। हालांकि उससे अब युवराज तो वापस आना वाला नहीं है, लेकिन एक आम देशवासी के नाते हम लोग यह उम्मीद करते हैं कि इस तरह की घटना से सिस्टम भविष्य में सबक अवश्य लें, ऐसी भयंकर लापरवाही देश में फिर कभी किसी के घर का चिराग ना बुझे, देश के हुक्मरान व सिस्टम पूरे देश में एक ऐसा आधुनिक संसाधनों युक्त कारगर सरकारी तंत्र अवश्य विकसित कर लें जो एक-एक जान की अहमियत अवश्य समझें।