अदृश्य रफ्तार: क्यों जरूरी है पृथ्वी की निरंतर धुरी पर दौड़?

Invisible Speed: Why is the Earth's constant rotation on its axis necessary?

दिलीप कुमार पाठक

पृथ्वी घूर्णन दिवस हर साल 8 जनवरी को मनाया जाता है, जो हमें हमारे ग्रह की उस निरंतर गति की याद दिलाता है जिसे हम महसूस तो नहीं कर पाते, लेकिन जिसका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

यह दिन वैज्ञानिक जिज्ञासा और सत्य की खोज का प्रतीक है, जो सदियों के अंधविश्वास को तोड़कर वैज्ञानिक तथ्यों की स्थापना को समर्पित है। सदियों पहले तक मनुष्य का यह मानना था कि पृथ्वी स्थिर है और सूर्य सहित सभी खगोलीय पिंड इसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं। लेकिन विज्ञान की प्रगति के साथ यह स्पष्ट हुआ कि हमारी पृथ्वी न केवल सूर्य की परिक्रमा करती है, बल्कि अपनी धुरी पर भी निरंतर घूमती रहती है। इसी घूर्णन गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन और रात का चक्र चलता है, जो जीवन की लय को निर्धारित करता है। इस वैज्ञानिक सत्य की गहराई में जाएं तो हम पाते हैं कि पृथ्वी की यह घूर्णन गति केवल समय का मापदंड नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व का आधार भी है। आज के आधुनिक युग में जब हम 2026 में प्रवेश कर चुके हैं, विज्ञान हमें यह समझने में मदद करता है कि पृथ्वी लगभग 1670 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही है। इतनी तीव्र गति के बावजूद हमें झटका महसूस नहीं होता, क्योंकि हम और हमारा वायुमंडल भी इसी गति का हिस्सा हैं। यह घूर्णन ही है जो समुद्र के जल स्तर को संतुलित रखता है और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के साथ तालमेल बिठाकर हमें धरातल पर टिकाए रखता है। इसके बिना पृथ्वी का आकार भी वैसा नहीं होता जैसा आज हम देखते हैं, क्योंकि घूर्णन के कारण ही यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है।

इस विशेष दिवस का इतिहास फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने 1851 में एक ऐतिहासिक प्रयोग के माध्यम से पृथ्वी के घूमने के प्रमाण प्रस्तुत किए थे। फौकॉल्ट ने पेरिस के पेंथियन की छत से एक लंबा पेंडुलम लटकाया था और दुनिया को यह दिखाया कि समय के साथ पेंडुलम के दोलन की दिशा बदल रही है। यह बदलाव पेंडुलम के कारण नहीं, बल्कि पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण हो रहा था। उनके इस सफल प्रदर्शन ने खगोल विज्ञान की दुनिया में एक नई क्रांति ला दी और आम जनमानस के लिए इस सत्य को स्वीकार करना आसान बना दिया। आज फौकॉल्ट पेंडुलम दुनिया भर के कई विज्ञान संग्रहालयों में देखा जा सकता है, जो हमें निरंतर पृथ्वी की गति का स्मरण कराता रहता है।

पृथ्वी की घूर्णन गति हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह न केवल दिन-रात का निर्माण करती है, बल्कि पृथ्वी के तापमान को भी संतुलित रखती है। यदि पृथ्वी घूमना बंद कर दे, तो इसके एक हिस्से में हमेशा चिलचिलाती गर्मी और दूसरे हिस्से में जमा देने वाली ठंड होगी, जिससे जीवन का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। इसके अलावा, पृथ्वी के घूमने से उत्पन्न होने वाला ‘कोरियोलिस प्रभाव’ समुद्र की लहरों और वायुमंडल में हवाओं की दिशा को नियंत्रित करता है। मौसम का बदलना, बादलों की गति और महासागरीय धाराओं का प्रवाह, ये सभी पृथ्वी के निरंतर घूमने का ही परिणाम हैं। यह घूर्णन ही पृथ्वी के चारों ओर उस चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण करता है, जो हमें सूर्य की हानिकारक विकिरणों से बचाता है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, यह दिवस हमें जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के बदलते स्वरूप पर भी विचार करने के लिए मजबूर करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों का पिघलना पृथ्वी के द्रव्यमान वितरण को बदल रहा है, जिससे इसकी घूर्णन गति पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ सकता है। यह सूक्ष्म बदलाव भविष्य में हमारे सटीक समय मापन और उपग्रह संचार प्रणालियों के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है। अतः, पृथ्वी घूर्णन दिवस केवल एक खगोलीय घटना का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिक तंत्र की संवेदनशीलता को समझने का भी दिन है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति की हर क्रिया एक निश्चित गणित और संतुलन पर आधारित है, जिसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आज के आधुनिक युग में पृथ्वी घूर्णन दिवस मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को विज्ञान के प्रति जागरूक करना और उन्हें ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने के लिए प्रेरित करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भले ही हम अपने पैरों के नीचे की जमीन को स्थिर महसूस करते हों, लेकिन हम वास्तव में अंतरिक्ष में एक अविश्वसनीय गति से यात्रा कर रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में इस दिन छात्रों को खगोल भौतिकी के बारे में बताया जाता है और महान वैज्ञानिकों के संघर्षपूर्ण योगदान को याद किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह दिवस कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है कि हमारी पृथ्वी सही गति और सही झुकाव के साथ घूम रही है, जिससे जीवन फलता-फूलता रहे। हमें इस दिन यह संकल्प लेना चाहिए कि हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएंगे और अपनी पृथ्वी के पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान देंगे ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अद्भुत ग्रह की गति का आनंद ले सकें।