केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण को स्वीकृति दी
भारत सरकार की कैबिनेट ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण (फेज-2) को मंजूरी प्रदान कर दी है।
रविवार दिल्ली नेटवर्क
केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली के मीडिया सेन्टर में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण को स्वीकृति दे दी है। इस चरण में 13,037.66 करोड़ रुपये की लागत से 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो गलियारा निर्मित किया जाएगा।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में मेट्रो परियोजना के दसरे चरण को मंजूरी प्रदान करने के इस निर्णय ने केवल जयपुर के शहरी परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करेगा, बल्कि शहर के बढ़ते यातायात दबाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना को स्वीकृति मिलने के साथ ही अब इसके शीघ्र क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
जयपुर मेट्रो का पहला चरण पहले ही शहर के कुछ हिस्सों को जोड़ते हुए संचालन में है, लेकिन शहर के विस्तार और जनसंख्या वृद्धि के चलते दूसरे चरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। फेज-2 के तहत प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर शहर के प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इससे आमजन को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।परियोजना के अंतर्गत नए मेट्रो मार्ग का विस्तार शहर के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों तक किया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों को भी मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा, जहां वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन के सीमित साधन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क यातायात पर दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। केंद्रीय कैबिनेट की इस मंजूरी के साथ ही परियोजना के लिए वित्तीय प्रावधान और केंद्र-राज्य के बीच लागत साझा करने की रूपरेखा भी स्पष्ट हो गई है। अनुमान है कि इस परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर निवेश करेंगी। इसके अलावा, परियोजना के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से भी सहयोग लिया जा सकता है।
राजस्थान की भजन लाल सरकार ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जयपुर के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। राज्य के अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
शहरी विकास के दृष्टिकोण से यह परियोजना जयपुर को एक आधुनिक और सुव्यवस्थित महानगर के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होगी। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से शहर में ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे मेट्रो स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक और आवासीय विकास को नई दिशा मिलेगी।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जयपुर मेट्रो फेज-2 के लागू होने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘ग्रीन मोबिलिटी’ जैसी पहलों के अनुरूप है।
हालांकि, परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध योजना, प्रभावी निगरानी और तकनीकी दक्षता आवश्यक होगी। भूमि अधिग्रहण, वित्तीय प्रबंधन और निर्माण कार्य में पारदर्शिता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके।
जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण में प्रहलादपुरा से तोड़ी मोड़ तक के मार्ग में 36 स्टेशन होंगे। भारत सरकार और राजस्थान सरकार की 50:50 हिस्सेदारी के संयुक्त उद्यम वाली यह परियोजना राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड -आरएमआरसीएल कार्यान्वित करेगी।जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण का मार्ग सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, वीकेआईए, जयपुर हवाई अड्डा, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबारी और विद्याधर नगर जैसे प्रमुख केंद्रों को जोड़ेगा। इसमें हवाई अड्डे क्षेत्र में स्थित भूमिगत स्टेशन शामिल है और नियोजित इंटरचेंज और फीडर माध्यम से यह अभी क्रियाशील पहले चरण के मार्ग से जुड़ेगा जिससे पूरे शहर में एकीकृत और निरंतर मेट्रो नेटवर्क स्थापित हो जाएगा।जयपुर मेट्रो के पहले चरण में अभी प्रतिदिन औसतन लगभग 60 हजार व्यक्ति यात्रा करते हैं। यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कॉरिडोर 11.64 किलोमीटर लंबा है। दूसरे चरण का परिचालन आंरभ होने से मेट्रो नेटवर्क में यात्रियों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी की संभावना है। इससे जयपुर में सार्वजनिक परिवहन में मेट्रो की हिस्सेदारी काफी बढ़ेगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी।
जयपुर मेट्रो दूसरे चरण का अंतर-मंत्रालयी परामर्श, नेटवर्क योजना समूह समीक्षा और सार्वजनिक निवेश बोर्ड मूल्यांकन सहित कई स्तरों पर व्यापक मूल्यांकन किया गया है। परियोजना का आर्थिक आंतरिक प्रतिफल (परियोजना की संपूर्ण जीवन अवधि में अपेक्षित वार्षिक लाभप्रदता का प्रतिशत ) निर्धारित सीमा से अधिक 14 प्रतिशत है, जो इसकी मजबूत सामाजिक-आर्थिक व्यवहार्यता दर्शाता है। मेट्रो रेल नीति, 2017 के अनुसार, इसके वित्तपोषण की संरचना भारत सरकार और राजस्थान सरकार से पूंजी समर्थन, अधीनस्थ ऋण और बहुपक्षीय वित्तपोषण द्वारा की गई है।
यह परियोजना राजस्थान सार्वजनिक परिवहन-केंद्रित विकास नीति-2025, प्रस्तावित महानगरीय परिवहन प्राधिकरण सुधार और राष्ट्रीय सतत शहरी परिवहन उद्देश्यों के अनुरूप है। इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण से यातायात जाम घटने, वाहन उत्सर्जन में कमी, और शहरवासियों, कामकाजी लोगो और पर्यटकों के लिए आवागमन में सुधार की संभावना है। इससे आधुनिक तथा भविष्य के लिए तैयार शहर के तौर पर जयपुर की स्थिति अच्छी होगी और विकसित भारत और विकसित राजस्थान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। जयपुर में मेट्रो प्रणाली का प्रथम चरण पहले से संचालित है। पूर्व-पश्चिम गलियारे में मानसरोवर से बड़ी चौपर तक 11.64 किलोमीटर के इसके मार्ग में 11 स्टेशन हैं। यह जयपुर के महत्वपूर्ण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को केंद्रीय व्यापारिक जिले – ऐतिहासिक प्राचीर नगर से जोड़ती है। उत्तर-दक्षिण धुरी पर नियोजित जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण मौजूदा गलियारे का पूरक होगा और समूचे जयपुर शहर में मेट्रो संपर्क प्रदान करेगा। इससे यातायात भीड़भाड़ में काफी कमी आएगी और समग्र शहरी आवागमन में सुधार होगा।
कुल मिलाकर, जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण को मिली कैबिनेट मंजूरी शहर के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यदि इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाता है, तो यह जयपुर को देश के प्रमुख मेट्रो शहरों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करेगा।





