दीपक कुमार त्यागी
“भारतीय राजनीति में ‘के.सी. त्यागी’ का एक बेहद सम्मानजनक व अहम स्थान है। वह राजनीतिक दलों के साथ-साथ देश भर में बहुत सारे राजनेताओं व आम और खास लोगों के संकटमोचक भी रहे हैं। उनकी समाजवादी पुरोधा के रूप में देश-दुनिया में एक विशिष्ट पहचान है। मुखर वक्ता ‘के.सी. त्यागी’ की आम आदमी, गरीब, किसान, नौजवान, क्षेत्रीय मुद्दों, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहुत ही जबरदस्त पकड़ है। उनकी बेबाक अंदाज वाली दमदार शैली भारतीय राजनीति में अब बामुश्किल ही देखने को मिलती है। ‘के.सी. त्यागी’ की गिनती देश के राजनीतिक गलियारों में शानदार व्यक्तित्व के धनी, बेहद मिलनसार, ज्ञानवान, विचारधारा को समर्पित रहने वाली दमदार शख्सियत के रूप में होती है। ‘के.सी. त्यागी’ दमदार कार्यशैली, बेबाकी व तथ्यात्मक विचारों के चलते ही मीडिया के साथ-साथ, खास व आम वर्ग के जनमानस के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। वह भारतीय राजनीति में दलगत सीमाओं को तोड़ने वाली शख्सियत हैं।”
“उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है,
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है ।।”
प्रसिद्ध शायर ‘नफ़स अम्बालवी’ की लिखी उपरोक्त पंक्तियां ‘के.सी. त्यागी’ पर एकदम सटीक बैठती है। अपनी दमदार कार्यशैली से आम जनमानस के दिलो-दिमाग पर अमिट छाप छोड़ने वाले भारतीय राजनीति के सशक्त पुरोधा पूर्व सांसद ‘के.सी. त्यागी पिछले’ कुछ माह से जबरदस्त चर्चाओं में हैं, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन के बयान के बाद तो ‘के.सी. त्यागी’ मीडिया व राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं में आ गए हैं। हालांकि ‘के.सी. त्यागी’ का व्यक्तित्व ऐसा है कि उसको किसी भी राजनीतिक दल की सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता है, उनकी अपनी एक विशेष पहचान है। लेकिन कुछ दिन पहले ही दिग्गज राजनेता ‘के.सी. त्यागी’ के बारे में जो टिप्पणी की गयी है, वह उचित नहीं है, उससे जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन आसानी से बच सकते थे, लेकिन फिर भी ना जाने क्यों जाने-अनजाने में जेडीयू नेता राजीव रंजन ने ‘के.सी. त्यागी’ जैसे निर्विवाद राजनेता को राजनीति में घसीटने का कार्य किया, लेकिन 17 मार्च 2026 को अब ‘के.सी. त्यागी’ ने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया है। जिससे आम लोगों विशेषकर युवा पीढ़ी में ‘के.सी. त्यागी’ की शख्सियत के बारे में जानने की जिज्ञासा जागी है।
भारतीय राजनीति के माहिर खिलाड़ी, कुशल राजनीतिज्ञ, ओजस्वी वक्ता ‘के.सी. त्यागी’ का पूरा नाम ‘किशन चंद त्यागी’ है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मोरटा गांव के एक मध्यवर्गीय किसान परिवार में पिता जगराम सिंह त्यागी और माता रोहताश त्यागी के यहां पर 10 दिसंबर 1950 को हुआ था। ‘के.सी. त्यागी’ की प्रारंभिक शिक्षा गाजियाबाद में हुई, उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी, कॉलेज के दिनों से ही उनका झुकाव समाजसेवा व राजनीति के तरफ़ था, जिसके चलते ही उनका जल्द ही सक्रिय राजनीति में पदार्पण हो गया। उनका विवाह पुष्पा त्यागी से हुआ जो गृहणी है और उनके तीन पुत्र राजीव त्यागी, अमरीश त्यागी और विकास त्यागी हैं, पुत्र अमरीश त्यागी पिता के पदचिन्हों पर ही चलते हुए समाजसेवा व भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं और पिता का नाम रोशन करने का कार्य कर रहे हैं।
‘के.सी. त्यागी’ का सक्रिय रुप से राजनीतिक सफर वर्ष 1970 के दशक से शुरू हुआ, जो आज भी पूरे मान-सम्मान, स्वाभिमान के साथ दमदार ढंग से निरंतर जारी है। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बाद ‘के.सी. त्यागी’ ने हापुड़ लोकसभा से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें इंदिरा गांधी की हत्या की सहानुभूति की लहर के चलते पराजय हासिल हुई थी। ‘के.सी. त्यागी’ वर्ष 1989 में हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज नेता बुद्ध प्रिय मौर्य (बी.पी. मौर्य) को 33,254 वोटों के अंतर से हराकर संसद सांसद चुनें गये और बाद में वह वर्ष 2013 में राज्यसभा के लिए भी चुनें गये थे। लोकसभा व राज्यसभा दोनों ही सदनों में ‘के.सी त्यागी ने अपनी दमदार ढंग से उपस्थिति दर्ज करवाने का कार्य किया। ‘के.सी त्यागी’ ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों के भी अनेक दौरे किये हैं और अपनी कार्यशैली की एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर, जेपी, चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी, चौधरी देवीलाल आदि का दौर बेहद ही नजदीक से देखा है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार की तानाशाही से लड़ने के चलते आपातकाल में वह लंबे समय तक जेल में भी बंद रहे थे। वह मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, नितिश कुमार आदि के बेहद करीबी रहे हैं।
“अपने लगभग साढ़े पांच दशक के लंबे राजनीतिक सफर में ‘के.सी. त्यागी’ के नाम पर कई राजनीतिक उपलब्धियां हैं। मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान हम लोगों ने उनके जलवा का वह दौर भी देखा है, जब उन्हें उत्तर प्रदेश के अघोषित मुख्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था और उन्हें पूरे ताम-झाम के साथ मान-सम्मान मिलता था।”
‘के.सी. त्यागी’ राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, देश के दिग्गज राजनेताओं से उन्होंने राजनीति का कहकरा सीखा है। उनके राजनीतिक सफ़र की बात करें तो वर्ष 1977 में अखिल भारतीय युवा जनता पार्टी के महासचिव बनने के बाद फिर कभी उन्होंने पीछे मुड़कर के नहीं देखा, वर्ष 1980 में वह युवा लोक दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने, वर्ष 1989 में जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव बने, वर्ष 1989 में हापुड़ लोकसभा सीट से संसद सदस्य बने, वर्ष 1994 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वर्ष 2003 में केंद्रीय भंडारण निगम (सेंट्रल वेयरहाउस कॉर्पोरेशन) जैसे भारत सरकार के महत्वपूर्ण उपक्रम के अध्यक्ष बने, वर्ष 2013 में बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए, वर्ष 2013 में वह जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने, वहीं वर्ष 2013 में उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष बने, वर्ष 2016 में वह तीसरी बार जनता दल यूनाइटेड के मुख्य महासचिव बने, 22 मई 2023 को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता नियुक्त हुए थे, लेकिन अचानक ही 1 सितंबर 2024 को निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने जेडीयू के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था और अब 17 मार्च 2026 को जेडीयू से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद से ही उनके बारे में देश के राजनीतिक गलियारों में अब दल बदलने की तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
हालांकि ‘के.सी. त्यागी’ देश के उन राजनीतिज्ञों में शुमार हैं, जो दलगत सीमा से ऊपर हैं, उन्होंने लोक सभा व राज्य सभा दोनों सदनों के बेहद सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं देते हुए लोगों के दिलो-दिमाग पर अपनी कार्यशैली की अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने संगठनात्मक स्तर व सरकारी तंत्र दोनों स्तर पर कार्य बखूबी से किया है। उन्होंने लोकसभा व राज्यसभा सदस्य के रूप में कई संसदीय समिति में विभिन्न जिम्मेदारियों का भी बाखूबी निर्वहन किया है। उनके खाते में अनेक विदेश यात्राएं शामिल हैं।
हालांकि ‘के.सी. त्यागी’ अपने बयानों के कारण अक्सर ही सुर्खियों में बने रहते हैं, वह राष्ट्रहित, किसान, नौजवान, गरीब, राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मसलों पर तार्किक व मुखर होकर बोलते हैं। हालांकि समय-समय पर उनके कुछ बयानों के पार्टी की लाइन से अलग भी माना जाता है, जैसे मुख्यमंत्री नितीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करना, बांग्लादेशी खिलाड़ी को आईपीएल से हटाने के फैसला हो या फिर फिलिस्तीन के मुद्दे पर वर्ष 2024 में भारत सरकार से अलग स्टैंड लेने का बयान हो, कुछ राजनेताओं व राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘के.सी. त्यागी’ के बेबाक बयानों ने उनकी पार्टी के लिए कई बार असहज स्थिति भी पैदा की है, लेकिन फिर उन्होंने कभी भी अपनी बेबाक अंदाज से बोलने वाली शैली को नहीं छोड़ा है, जो उनकी शैली, विचारधारा व दृढ़संकल्प को दर्शाती ही।
वैसे देखा जाए तो ‘के.सी. त्यागी’ का व्यक्तित्व ऐसा है कि उन्हें किसी भी एक राजनीतिक दल की सीमा में कैद नहीं किया जा सकता है, उन्होंने राजनीति के दांव-पेंच दिग्गज कर्पूरी ठाकुर, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह जैसे दिग्गजों की पाठशाला से सीखें है। वहीं शरद यादव, जार्ज फर्नांडिस, मुलायम सिंह यादव, नितीश कुमार आदि जैसे देश के दिग्गज राजनेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के धरातल पर काम किया है। उन्होंने राजनीति में आम जनमानस की एक सशक्त आवाज़ बनकर के सामाजिक न्याय या सुधार के लिए लंबा संघर्ष किया है, उन्होंने राजनीति के माध्यम से आम आदमी की भलाई के लिए कार्य किया है, जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि ‘के.सी. त्यागी’ आज के दौर के सेल्फ फाइनेंस स्कीम वाले या आशिर्वाद प्राप्त एक सामान्य राजनेता नहीं हैं, बल्कि ‘के.सी. त्यागी’ एक असाधारण व्यक्तित्व के धनी, संघर्ष की भट्टी में तपें हुए सुलझे हुए एक ऐसे कुशल राजनेता हैं, जो अपनी सीमाएं स्वयं अपनी कार्यशैली के दम पर तय करने की ताकत रखते हैं, आज भी ‘के.सी. त्यागी’ का जलवा जनता, राजनीतिक गलियारों, सिस्टम व सरकार के बीच जबरदस्त है।





