लोक सभा अध्यक्ष ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया

Lok Sabha Speaker constitutes Parliamentary Friendship Groups with over 60 countries

विश्व में लोकतांत्रिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल

प्रमोद शर्मा

नई दिल्ली : दुनिया के विभिन्न देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। यह पहल दर्शाती है कि भारत की संसद पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ संसदीय कूटनीति को भी मजबूत आधार देना चाहती है, ताकि वैश्विक स्तर पर प्रत्यक्ष और निरंतर संवाद को बढ़ावा मिल सके।

इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है। वरिष्ठ नेताओं में श्री रवि शंकर प्रसाद, डॉ. एम. थंबीदुरई, श्री पी. चिदंबरम, प्रो. राम गोपाल यादव, श्री टी.आर. बालू, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, श्री गौरव गोगोई, सुश्री कनिमोझी करुणानिधि, श्री मनीष तिवारी, श्री डेरेक ओ’ब्रायन, श्री अभिषेक बनर्जी, श्री असदुद्दीन ओवैसी, श्री अखिलेश यादव, श्री के.सी. वेणुगोपाल, श्री राजीव प्रताप रूडी, सुश्री सुप्रिया सुले, श्री संजय सिंह, श्री बैजयंत पांडा, डॉ. शशि थरूर, डॉ. निशिकांत दुबे, श्री अनुराग सिंह ठाकुर, श्री भर्तृहरि महताब, डॉ. (सुश्री) डी. पुरंदेश्वरी, श्री संजय कुमार झा, सुश्री हेमा मालिनी, श्री बिप्लब कुमार देब, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, श्री जगदंबिका पाल, डॉ. सस्मित पात्रा, सुश्री अपराजिता सारंगी, श्री श्रीकांत एकनाथ शिंदे, श्री पी.वी. मिधुन रेड्डी और श्री प्रफुल्ल पटेल सहित अनेक सांसद शामिल हैं।

जिन देशों के साथ मैत्री समूह गठित किए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

इस पहल का उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों के साथ सीधे संवाद का अवसर प्रदान करना है। वे अपने अनुभव साझा कर सकेंगे, एक-दूसरे से सीख सकेंगे और नियमित संपर्क के माध्यम से आपसी विश्वास को मजबूत करेंगे। इन समूहों के जरिए व्यापार, प्रौद्योगिकी, सामाजिक नीति, संस्कृति तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर भी सार्थक चर्चा होगी।

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदैव इस बात पर बल दिया है कि संसदीय कूटनीति भारत की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ बनाती है। उनके नेतृत्व में भारतीय संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार तथा परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है, जो संवाद और सहयोग में विश्वास रखता है।

संसद से संसद और जनता से जनता के बीच संपर्क बढ़ाने पर केंद्रित यह पहल विदेश संबंधों के प्रति एक व्यापक और सहभागी दृष्टिकोण को दर्शाती है। ये मैत्री समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे। इस प्रकार भारत की संसद विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज के रूप में अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाएगी।

उल्लेखनीय है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष विश्व समुदाय के समक्ष रखने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे। विभिन्न दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक मंच पर लाकर यह संदेश दिया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के प्रश्न पर भारत एकजुट है।

लोक सभा द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ समूह गठित किए गए हैं, जबकि निकट भविष्य में अन्य देशों के साथ भी ऐसे समूहों के गठन की प्रक्रिया जारी रहेगी।