अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में महाशिवरात्रि महोत्सव सम्पन्न

Mahashivratri festival concluded under the aegis of International Issyoga Society

तीन सौ से अधिक नव- जिज्ञासुओं को दी गई शक्तिपात-दीक्षासाधना-पथ की सबसे बड़ी बाधा है।थोड़ी-सी आध्यात्मिक उपलब्धि भी साधक के भीतर अहंकार का अंकुर उत्पन्न कर देती है,जो उसे साधना के मार्ग से विचलित कर सकता है।

विनोद कुमार सिंह

पटना : आध्यात्मिक चेतना,श्रद्धा और साधना के विराट संगम के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव बिहार की राजधानी पटना के 1 माल रोड स्थित विशाल पण्डाल में भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस महा महोत्सव में देश-विदेश से आए पाँच हजार से अधिक इस्सयोगियों और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का दिव्य उत्सव बना दिया।इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष एवं ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरुमाता माँ विजया जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि अहंकार साधना-पथ की सबसे बड़ी बाधा है। थोड़ी-सी आध्यात्मिक उपलब्धि भी साधक के भीतर अहंकार का अंकुर उत्पन्न कर देती है,जो उसे साधना के मार्ग से विचलित कर सकता है। उन्होंने साधकों से आग्रह किया कि सद्गुरु में अखंड प्रीति रखते हुए निरंतर यह प्रार्थना करें कि उच्चतम आध्यात्मिक उपलब्धि के बाद भी अहंकार का प्रवेश न हो।माँ विजया जी ने कहा कि प्रत्येक मानव में शिव और शक्ति का वास है और इस्सयोग की साधना से शिव-शक्ति के एकत्व का अनुभव संभव है। उन्होंने मन की शक्ति और चंचलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन ही समस्या का कारण भी है और समाधान भी।श्रद्धा,विश्वास और निरंतर अभ्यास से मन शुद्ध होता है और आत्मा का प्रकाश स्वयं प्रकट होने लगता है।आंतरिक साधना की तुलना उन्होंने सूर्य-किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करने वाले मैग्निफाइंग ग्लास से करते हुए कहा कि जब मन की शक्तियाँ एकाग्र होती हैं,तब अद्भुत आध्यात्मिक उपलब्धियाँ संभव होती हैं। आज के महामहोत्सव का शुभारंभ पूर्वाह्न दस बजे सामूहिक ‘ओमकारम’ के उद्घोष के साथ हुआ।संस्था के संयुक्त सचिव सरोज गुटगुटिया ने देश-विदेश से आए इस्सयोगियों और अतिथियों का अभिनन्दन करते हुए इस्सयोग की सूक्ष्म साधना-पद्धति की दिव्यता का परिचय कराया।संयुक्त सचिव संदीप गुप्ता ने शिव-विवाह के रोचक प्रसंगों का कथात्मक वर्णन करते हुए शिव-तत्त्व की महिमा पर प्रकाश डाला।भजन-संकीर्तन, शिव-स्तुति,रुद्राष्टकम तथा प्रभात झा व गोल्डी द्वारा प्रस्तुत ‘शिव ताण्डव स्तोत्र’ ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

संस्था के संयुक्त सचिव डॉ. अनिल सुलभ ने बताया कि कुमार सहाय वर्मा, दीनानाथ शास्त्री,इशा कुमारी, सीमा बाबेजा,सुनील कुमार, संगीता ठाकुर, संतोष कुमार, निहारिका, सुमन सुहसरिया, गिरिजा शंकर सहित अनेक इस्सयोगियों ने अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा किए।बाल इस्सयोगियों ने भी अपनी अनुभूतियाँ सुनाकर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

महोत्सव के अंतर्गत गोला रोड स्थित संस्था के ‘एम एस एम बी भवन’ में शक्तिपात-दीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया,जिसमें माँ विजया जी ने तीन सौ से अधिक नव-जिजासु साधकों को इस्सयोग साधना आरंभ करने हेतु दीक्षा प्रदान की। कार्यकारणी की बैठक, सांस्कृतिक कार्यक्रम,जगत- कल्याण हेतु सामूहिक ब्रह्मांड- साधना और महाप्रसाद के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

इस भव्य आयोजन में नीना दुबे गुप्ता,पूर्व विधायक नीलम सिंह, लक्ष्मी प्रसाद साहू,शिवम् झा, वंदना वर्मा,अनंत कुमार साहू,अजीत पटनायक,डॉ. द्राशनिका सोलंकी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों, संस्था के कार्यकारणी समिति सदस्य और स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता रही।यह महाशिवरात्रि महोत्सव साधना,श्रद्धा और मानव-चेतना के उत्कर्ष का एक स्मरणीय अध्याय बन गया।