वर्ल्ड सेंटर फॉर पंजाबी ने मनाया विश्व कविता दिवस
कोलकाता : विश्व कविता दिवस के अवसर पर वर्ल्ड सेंटर फॉर पंजाबी लाहौर ने दुनिया के मुख्तलिफ देशों के पंजाबी कवियों को आभासी माध्यम से एक मंच पर एकत्रित किया। उनकी इस परिकल्पना की सफलता के लिए उनके साथ सहयोगी संस्थाएं शामिल थीं- पुंगरदे हर्फ़ विश्व साहित्यिक मंच, कोलकाता सिख नारी मंच, कैलगरी वूमेन कल्चरल एसोसिएशन तथा कलमां दी सांझ साहित्य सभा, टोरंटो।
कार्यक्रम की शुरुआत में वर्ल्ड सेंटर फॉर पंजाबी के निर्देशक डॉ. अब्दुल रज़्ज़ाक़ शाहिद ने बताया कि संस्था का मूल उद्देश्य विश्व के सभी समुदायों में प्रेम और भाईचारे के जज्बे को विकसित करना है। इसके अलावा दुनिया भर के पंजाबियों को चाहे वे किसी भी मजहब के हों एक मंच पर लाकर एकजुट करना है और पंजाबी को उसका उचित सम्मान हर मुल्क में दिलवाना है। उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तान के सिख धार्मिक स्थानों की यात्रा में आने वाले दुनिया के हर सिख को उचित मार्गदर्शन और सुविधाएं मुहैया करवाना है। उन्होंने कहा कि ये संस्था साल भर में अनेकों ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यक्रम आयोजित करती है तथा साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका- सांझा पंजाबी विरसा भी प्रकाशित करती है।हम गुरमुखी से शाहमुखी और शाहमुखी से गुरूमुखी की नियमित कक्षाएं भी संचालित करते हैं।
गौरतलब है कि इस बीच जापान की प्रतिष्ठित संस्था अमीन ख्याल इंटरनेशनल फाउंडेशन ने उन्हें पहले लाइफ़ टाइम एचीवमेंट अवार्ड के लिए नामित किया है,जो उन्हें जापान बुलाकर ख़ास आयोजन में दिया जायेगा।
विश्व कविता दिवस के इस आयोजन में शिरकत कर रहे कवियों की रचनाओं का मूल स्वर दुनिया में लगातार हो रहे युद्ध का प्रतिकार करना तथा प्रेम और भाईचारे का मार्ग प्रशस्त करना था।इस नायाब आयोजन में शिरकत कर रहे थे – भारत से सर्वश्री रावेल पुष्प, प्रो. बलदेव सिंह बली, डॉ. गिरविंदर कौर सिद्धू, रमनदीप कौर रम्मी, डॉ. हरमीत कौर मीत, डॉ. रवींद्र कौर भाटिया,मनदीप कौर,दलजिंदर रेहल, हरसिमरत कौर, सिमरजीत कौर गरेवाल तथा यूके से अज़ीम शेखर, कनाडा से कुलविंदर सिंह गरेवाल, दक्षिण कोरिया से अमनवीर सिंह धामी, टोरंटो से सुजान सिंह सुजान, अमेरिका से डॉ.अजीत सिंह कोटकपूरा तथा जब्बार हुसैन। इसके अलावा आखिर में लाहौर पाकिस्तान से इमरान शौकत अली खान जुड़े जिन्होंने डॉ. अब्दुल रज़्ज़ाक़ शाहिद के कलाम का खूबसूरत अंदाज में गायन किया।
इस आयोजन में शिरकत करने वाले कवियों की गूंजती आवाज पुरजोर तरीके से उभर रही थी- हमें जंग नहीं चाहिए, हमें नफरत नहीं चाहिए, हम तो एक सुंदर दुनिया चाहते हैं जहां बच्चों की निश्चल हंसी तोपों की गूंज को हरा दे तथा कविता की गूंज जंग की आग बुझा दे!





