
अजय कुमार
लखनऊ : एक तरफ योगी सरकार दंगाइयों के खिलाफ आक्रामक रवैया अपना रहे हैं तो दूसरी तरफ उन्हीं के अधिकारी/कर्मचारी हिंसा के आरोपियों के लिये ‘सुविधाएं’ उपलब्ध करा रहे हैं। मामला मुरादाबाद का है। यहां बंद संभल हिंसा के आरोपियों से समाजवादी पार्टी के नेताओं की मुलाकात के बाद मुरादाबाद के जेलर और डिप्टी जेलर को सस्पेंड करने के साथ मुरादाबाद के जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है। आरोप है कि अधिकारियों ने नियम विरुद्ध जाकर समाजवादी नेताओं की जेल में बंद संभल हिंसा के आरोपियों से मुलाकात करवाई थी, जिसकी जानकारी होने के बाद काफी हंगामा हुआ था। जांच-पड़ताल के बाद अब एक्शन लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मुरादाबाद जेल के जेलर वीरेंद्र विक्रम यादव और डिप्टी जेलर प्रवीण सिंह पर एक्शन लेते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। वहीं, जेल अधीक्षक पीपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को एक पत्र भेजा गया है। जेल अधीक्षक पर लापरवाही बरतने का आरोप है। बताया जा रहा है कि डीजी जेल पीवी रामशास्त्री ने संभल हिंसा में आरोपियों की नियम विरुद्ध मुलाकात पर जेलर और डिप्टी जेलर के खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई की है. वहीं, मुरादाबाद जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिफारिश की है।
गौरतलब हो कि बीते सोमवार को समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने संभल हिंसा मामले के आरोपियों से मुरादाबाद जिला जेल में मुलाकात की थी. इसमें सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन भी शामिल थे. हसन के मुताबिक, उनके साथ नौगावां सादात (अमरोहा) से विधायक समरपाल सिंह, ठाकुरद्वारा से विधायक नवाब जान खां समेत कुल 15 लोग आरोपियों से मिलने जेल गए थे। एसटी हसन ने मुरादाबाद जिला जेल के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा था कि संभल हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए कई लोग यहां कैद हैं। उन पर फर्जी मुकदमा लादा गया। वे बेकसूर हैं। ऐसी घटनाओं के दौरान अक्सर निर्दाेष व तमाशबीन लोग फंस जाते हैं। हमने उन लोगों को कानूनी सहायता प्रदान करने और न्याय दिलाने का भरोसा दिया है.