मोदी का नववर्ष पर देश को नया तोहफ़ा: भारत बना आर्थिक प्रगति की गति में विश्व का चौथा अग्रणी देश

Modi's New Year gift to the nation: India becomes the fourth leading country in the world in terms of economic progress

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

नववर्ष 2026 की दहलीज़ पर खड़े भारत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी उपलब्धि का संदेश देकर नई ऊर्जा दी है। प्रधानमंत्री ने नववर्ष के अवसर पर देशवासियों के नाम अपने एक संदेश में कहा कि भारत आज आर्थिक प्रगति की गति के लिहाज़ से विश्व में चौथे स्थान पर पहुँच गया है। यह उपलब्धि केवल सरकार की नीतियों का परिणाम नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास की सामूहिक सफलता है। यह संदेश ऐसे समय आया है जब 21वीं सदी की सिल्वर जुबली पूरी होकर भारत एक नए ‘गोल्डन युग’ की ओर अग्रसर हो रहा है।

पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे—कोविड महामारी, वैश्विक मंदी, युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव। इसके बावजूद भारत ने न केवल स्थिरता बनाए रखी, बल्कि तेज़ी से आगे बढ़ते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार में दुनिया के कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में इस बात पर ज़ोर दिया कि नीति-स्थिरता, निर्णायक नेतृत्व और सुधारों की निरंतरता ने भारत को यह मुकाम दिलाया है।

सरकार की प्रमुख योजनाएँ—‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना—भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हैं। इन पहलों से विनिर्माण क्षेत्र को नई जान मिली, विदेशी निवेश बढ़ा और लाखों युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा हुए। आज भारत मोबाइल फ़ोन निर्माण, दवाइयों, ऑटोमोबाइल्स और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल क्रांति को भारत की आर्थिक छलांग का सबसे बड़ा आधार बताया। यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली ने न केवल देश के भीतर लेन-देन को सरल बनाया, बल्कि दुनिया भर में भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना—आधार, जनधन और मोबाइल (JAM ट्रिनिटी)—ने शासन को पारदर्शी बनाया और योजनाओं का लाभ सीधे आम नागरिक तक पहुँचाया।

मोदी के नववर्ष संदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू समावेशी विकास रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक प्रगति का अर्थ केवल जीडीपी के आँकड़े नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव है। किसानों के लिए सम्मान निधि, ग्रामीण सड़कों का विस्तार, हर घर जल, सस्ते आवास और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं ने विकास को गांव-गांव तक पहुँचाया। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुद्रा योजना, स्वयं सहायता समूह और महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया गया।

हरित ऊर्जा और सतत विकास भी भारत की आर्थिक प्रगति का अहम स्तंभ बनकर उभरे हैं। सौर और पवन ऊर्जा में भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, और भारत इस संतुलन का वैश्विक उदाहरण पेश कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएँ आने वाले वर्षों में नई आर्थिक संभावनाएँ खोलेंगी।

नववर्ष संदेश में भविष्य की दिशा भी स्पष्ट की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला दशक भारत के युवाओं का दशक है। कौशल विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत को और मजबूत बनाएगी। भारत आज केवल उपभोक्ता देश नहीं, बल्कि नवाचार और समाधान देने वाला देश बन रहा है।

अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह नववर्ष संदेश केवल एक उपलब्धि की घोषणा नहीं, बल्कि देश को आगे बढ़ने का आह्वान है। आर्थिक प्रगति की गति में विश्व में चौथा स्थान प्राप्त करना भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। यदि यही सुधारों की रफ्तार, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय संकल्प बना रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व की आर्थिक नेतृत्व पंक्ति में और ऊँचे स्थान पर विराजमान होगा। यह नववर्ष भारत के लिए सचमुच एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।