अशोक भाटिया
17 साल के देश निकाला के बाद देश लौटे एक नेता के नेतृत्व में, तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने गुरुवार को हुए अहम राष्ट्रीय चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद पहला चुनाव है, जिस भेज ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल के सख्त शासन को खत्म कर दिया था। बांग्लादेश के चुनाव आयोग (ECB) के अनुसार, गुरुवार को हुए मतदान में लगभग 170 मिलियन लोगों के देश में 127 मिलियन से ज़्यादा योग्य वोटर शामिल थे, जिसमें देश भर की 299 संसदीय सीटों पर 1,981 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे।जैसे-जैसे आधी रात के बाद भी गिनती जारी रही, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता वापस पाने के और करीब पहुँच गई। अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद बने अंतरिम प्रशासन की जगह लेने के लिए हुए अहम आम चुनाव में, पार्टी ने अपने पुराने साथी जमात-ए-इस्लामी पर बड़ी बढ़त बना ली है। शेख हसीना की अब खत्म हो चुकी अवामी लीग के मैदान से गायब होने के कारण, चुनाव BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला बन गया है।
इत्तेफ़ाक अखबार के अनऑफिशियल नतीजों के मुताबिक, BNP ने 158 सीटें, जमात ने 41 और अन्य ने पाँच सीटें जीती हैं। जिन 299 सीटों पर वोटिंग हुई थी, उनमें से 204 पर गिनती पूरी हो चुकी थी। रिपोर्ट से पता चला कि BNP ने चुनाव जीत लिया है। इलेक्शन कमीशन के अधिकारियों ने बताया कि BNP चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे तारिक रहमान ने अपने होम डिस्ट्रिक्ट बुगुरा में जीत हासिल की। रहमान को 2,16,284 वोट मिले, जबकि उनके सबसे करीबी विरोधी और जमात के उम्मीदवार अबिदुर रहमान को 97,626 वोट मिले। BNP ने पहले घोषणा की थी कि अगर वह सत्ता में आती है, तो रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे, जिससे मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का 18 महीने का शासन खत्म हो जाएगा।
अब तक के नतीजों में नई सरकार की तस्वीर होने के बाद मन जा रहा है कि युनूस राज के खत्म होते ही अब चीन की दाल भी नहीं गलेगी। कारण कि अमेरिका ने चीन के बढ़ते दबदबे को रोकने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। जी हां, वॉशिंगटन अब बांग्लादेश को अमेरिकी और उसके दोस्त देशों के हथियार सिस्टम ऑफर करेगा, ताकि चीन की हथियारों की दुकानदारी पर ब्रेक लगे। इससे न केवल बांग्लादेश को फायदा होगा, बल्कि भारत को भी राहत मिलेगी। कारण कि बांग्लादेश में चीन दखल भारत के पड़ोसी देश में कम होगी। अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी। क्रिस्टेंसन ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि दक्षिण एशिया में चीन का असर बढ़ रहा है और अमेरिका बांग्लादेश की नई सरकार के साथ मिलकर इसके जोखिम बताएगा।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ढाका में वॉशिंगटन के एम्बेसडर ने क्रिस्टेंसन ने कहा कि अमेरिका साउथ एशिया में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर परेशान है और बांग्लादेश की अगली सरकार को चीनी हार्डवेयर के ऑप्शन के तौर पर अमेरिकी और उसके सहयोगी डिफेंस सिस्टम देने का प्लान बना रहा है। बता दें कि बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर अगस्त 2024 में हुआ था। तब जेन जी के नेतृत्व में हुए विद्रोह ने भारत समर्थक प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया। इस विरोध-प्रदर्शन की वजह से शेख हसीना दिल्ली भाग आईं। उसके बाद से भारत का बांग्लादेश में असर कम हो गया। इसी फायदा उठाते हुए चीन ने तेजी से कदम बढ़ाए। हाल ही में चीन ने बांग्लादेश के साथ रक्षा समझौता किया, जिसमें भारत बॉर्डर के पास ड्रोन फैक्ट्री बनाने का प्लान है। अमेरिका के साथ-साथ यह भारत के लिए भी चिंता की बात है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बांग्लादेश में चीन का अधिक दखल भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
सबसे पहले जानते हैं कि हाल फिलहाल में चीन ने बांग्लादेश में क्या किया है। दरअसल, चीन ने हाल ही में भारत बॉर्डर के पास एक ड्रोन फैक्ट्री बनाने के लिए बांग्लादेश के साथ एक डिफेंस एग्रीमेंट किया है। इससे अमेरिकी और अन्य एशियाई डिप्लोमैट्स परेशान हैं। इतना ही नहीं, बांग्लादेश चीन के साथ मिलकर डेवलप किया गया एक मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, JF-17 थंडर फाइटर जेट खरीदने के लिए पाकिस्तान से भी बातचीत कर रहा है। ये सब चीन की सैन्य साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
अमेरिकी एम्बेसडर क्रिस्टेंसन ने कहा, ‘अमेरिका साउथ एशिया में चीन के बढ़ते असर को लेकर परेशान है और चीन के साथ कुछ तरह के जुड़ाव के रिस्क को साफ तौर पर बताने के लिए बांग्लादेशी सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए कमिटेड है।’ उन्होंने और अधिक जानकारी दिए बिना कहा, ‘बांग्लादेश को उसकी मिलिट्री क्षमता की जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए अमेरिका कई ऑप्शन देगा है, जिसमें अमेरिकी सिस्टम और सहयोगी पार्टनर के सिस्टम शामिल हैं, ताकि चीनी सिस्टम के विकल्प दिए जा सकें।’ उन्होंने साफ-साफ इशारा कर दिया कि चीन के हथियारों के बजाय अमेरिकी या उसके दोस्तों के सिस्टम बांग्लादेश के लिए ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित होंगे।
अब बात करे इन नतीजों के आने का बाद भारत में क्या बदलेगा अब अमेरिका भारत-बांग्लादेश रिश्तों को सुधारने पर भी जोर दे रहा है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार चाहती है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच अच्छे ताल्लुक हों, ताकि इलाके में स्थिरता बनी रहे। शेख हसीना के भागने के बाद दिल्ली-ढाका रिश्ते खराब हो गए हैं। वीजा सर्विस प्रभावित हुईं, और क्रिकेट मैचों तक पर असर पड़ा। दोनों देशों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक रिश्ते ठंडे पड़े हैं।अमेरिका का मानना है कि अगर बांग्लादेश नई सरकार के साथ भारत से दोस्ती बढ़ाए, तो दक्षिण एशिया में शांति बनी रहेगी।भारत के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि चीन की बॉर्डर पर ड्रोन फैक्ट्री से सुरक्षा खतरा कम होगा। अमेरिकी प्लान से भारत को अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा, क्योंकि बांग्लादेश अगर अमेरिकी हथियार चुनता है, तो चीन-पाकिस्तान का गठजोड़ कमजोर पड़ेगा।खुद क्रिस्टेंसन ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए बांग्लादेश और भारत के बीच अच्छे रिश्ते देखना चाहता है।
अमेरिका अब बांग्लादेश में व्यापारिक कूटनीति को सबसे ऊपर रख रहा है। क्रिस्टेंसन ने कहा कि कई अमेरिकी कंपनियां बांग्लादेश में इन्वेस्ट करने के बारे में सोच रही हैं, लेकिन वे चाहेंगे कि अगली बांग्लादेशी सरकार जल्दी और साफ़ संकेत दे कि वह बिज़नेस के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘कमर्शियल डिप्लोमेसी हमारी टॉप प्रायोरिटी में से एक है, और हम अंतरिम सरकार के साथ हुई प्रोग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए नई सरकार के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं, खासकर कमर्शियल, इकोनॉमिक और सिक्योरिटी संबंधों को मज़बूत करने में।’ चेवरॉन जैसी ऊर्जा कंपनी दशकों से बांग्लादेश में काम कर रही है, लेकिन अन्य अमेरिकी ब्रांड कम दिखते हैं। 17।5 करोड़ की आबादी वाले इस घनी आबादी वाले देश में ऊंचे टैक्स और मुनाफा बाहर भेजने की मुश्किलें बाधा हैं। यहां स्टारबक्स या मैकडॉनल्ड्स जैसी चेन नहीं हैं।
क्रिस्टेंसन ने कहा कि व्यापारिक कूटनीति हमारी प्राथमिकता है। अंतरिम सरकार के साथ जो प्रगति हुई, उसे नई सरकार के साथ मजबूत करेंगे, खासकर आर्थिक, व्यावसायिक और सुरक्षा क्षेत्र में।’ अमेरिका चाहता है कि बांग्लादेश निवेशकों के लिए आसान माहौल बनाए, ताकि रोजगार बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो। अमेरिका ने साफ कहा कि जो भी सरकार चुनी जाए, उसके साथ काम करेंगे। लेकिन चुनाव के बाद स्थिरता जरूरी है, ताकि निवेश आए। इतना ही नहीं, अमेरिका ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मदद करता रहेगा।





