-
आलेख
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति
ललित गर्ग बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के…
Read More » -
आलेख
कोचिंग संस्कृति और बच्चों की मौतें: सफलता के नाम पर असफल समाज
डॉ. प्रियंका सौरभ कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या—यह कोई साधारण खबर नहीं है और न ही किसी एक परिवार की निजी त्रासदी भर। यह उस शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक…
Read More » -
आलेख
नवरात्रि की अष्टमी से महाशिवरात्रि तक: जब घर-आंगन में उतरते हैं देवी-देवता
अजय कुमार बियानी भारतीय संस्कृति में पर्व केवल कैलेंडर की तिथियाँ नहीं होते, वे भावनाओं, विश्वास और परंपराओं के जीवंत उत्सव होते हैं। जब कोई शिशु किसी विशेष पर्व पर…
Read More » -
आलेख
दाढ़ी पर नहीं, सोच पर बहस ज़रूरी
(फैशन, पहचान और भ्रम: आज के युवाओं के सामने असली चुनौती) डॉ. सत्यवान सौरभ हर दौर की अपनी पहचान होती है। यह पहचान केवल कपड़ों, हेयर-स्टाइल या चेहरे पर उगे…
Read More » -
आलेख
नारी ही परिवार की खुशी, राष्ट्र का गौरव और सुख की धुरी है
सुनील कुमार महला स्त्री की गरिमा और उसका सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा रहे हैं। हमारे यहां नारी को शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है तथा…
Read More » -
आलेख
शिव-शक्ति से सीखें परवरिश का पाठ, ‘परफेक्ट पेरेंटिंग’ के लिए अपनाएं ये 4 नियम
अजय कुमार बियानी महाशिवरात्रि केवल उपवास, पूजा और रात्रि-जागरण का पर्व नहीं है; यह आत्ममंथन और जीवन-मूल्यों को समझने का भी अवसर है। जब हम आदर्श दांपत्य और संतुलित परिवार…
Read More » -
आलेख
भविष्य के जलवायु समझौतों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज: क्योटो प्रोटोकॉल
सुनील कुमार महला पर्यावरणीय दृष्टि से 16 फरवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि 16 फरवरी 2005 को क्योटो प्रोटोकॉल आधिकारिक रूप से लागू हुआ था, जो जलवायु…
Read More » -
आलेख
एक प्रभावी व्यक्ति बनने के लिए खुद को कैसे बेहतर बनाया जाए?
डॉ. विजय गर्ग हम सभी ऐसे समाज में रहते हैं जहां हर चीज का मूल्यांकन पहली नजर से ही किया जाता है। बिस्कुट के पैकेट को लपेटने से लेकर कार…
Read More » -
राज्य
अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में महाशिवरात्रि महोत्सव सम्पन्न
तीन सौ से अधिक नव- जिज्ञासुओं को दी गई शक्तिपात-दीक्षासाधना-पथ की सबसे बड़ी बाधा है।थोड़ी-सी आध्यात्मिक उपलब्धि भी साधक के भीतर अहंकार का अंकुर उत्पन्न कर देती है,जो उसे साधना…
Read More » -
आलेख
मोबाइल, नशा और तनाव – बचपन पर तीन वार
“हमारे बच्चे खतरे में हैं – ज़िम्मेदार कौन?” डॉ. विजय गर्ग आज का बचपन तीन अदृश्य वार झेल रहा है—मोबाइल की लत, नशे का बढ़ता प्रचलन और तनाव का असामयिक…
Read More »