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आलेख
करवा चौथ: परंपरा, प्रेम और पितृसत्ता के बीच
प्रेम, आस्था और समानता के बीच झूलता एक पर्व — जहाँ परंपरा भी है, और बदलाव की दस्तक भी। करवा चौथ भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व है, जिसमें विवाहित…
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आलेख
महिलाओं और बेटियां की कम या घटती संख्या
विजय गर्ग यह एक विचित्र विडंबना है कि पिछले कई दशकों से लगातार स्त्री-पुरुष अनुपात में बढ़ती खाई को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसे रोकने के लिए तमाम…
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आलेख
करवा चौथ पर दमके आपका चेहरा, जैसे आसमान में चांद
श्वेता गोयल भारत में सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा त्यौहार है ‘करवा चौथ’, जो दाम्पत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति समर्पण का अनूठा पर्व माना जाता है। इस विशेष त्यौहार…
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राज्य
केरल पर्यटन की नई सौगात: फेस्टिव सीज़न से पहले यात्रियों के लिए अनूठे अनुभव
मुंबई (अनिल बेदाग): त्योहारों और छुट्टियों के मौसम से पहले केरल पर्यटन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए नई ताज़गी भरी पेशकशों के साथ तैयार है। राज्य ने देशभर में…
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आलेख
भारतीय संस्कृति की प्रतिमूर्ति थीं राजमाता सिंधिया
जवाहर प्रजापति कश्मीर से कन्याकुमारी और कटक से अटक तक हमारा भारत अखंड है l लेकिन तबकी कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारण कश्मीर घाटी में हम भारतीय तिरंगा…
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आलेख
क्या भारत की कोचिंग संस्कृति को समाप्त करने के लिए आसान जेईई मेन, नीट यूजी परीक्षाएं महत्वपूर्ण हैं?
विजय गर्ग जैसा कि भारत जेईई और नीट में आसानी लाने पर बहस कर रहा है, वास्तविक चुनौती प्रश्न पत्रों से परे है। वास्तविक न्याय इस बात पर निर्भर करेगा…
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आलेख
नारी श्रद्धा और प्रेम का अमर पर्व करवा चौथ
योगेश कुमार गोयल भारत की गौरवशाली संस्कृति में करवा चौथ पर्व का विशेष महत्व है क्योंकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं…
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मनोरंजन
“हाय जिंदगी” ट्रेलर लॉन्च: पुरुष अधिकारों पर नई बहस छेड़ेगी फिल्म
फिल्म “हाय जिंदगी” का ट्रेलर लॉन्च, 31 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक मुंबई (अनिल बेदाग): निर्माता सुनील कुमार अग्रवाल और निर्देशक अजय राम की बहुचर्चित फिल्म “हाय जिंदगी” का दमदार…
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आलेख
प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन का पर्व: करवा चौथ
सुनील कुमार महला सनातन भारतीय संस्कृति में तीज-त्योहारों का प्रमुख व बड़ा स्थान है। कार्तिक का महीना इस दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। पाठकों को बताता चलूं कि प्रतिवर्ष…
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आलेख
मध्यप्रदेश में जातीय राजनीति का कोई स्थान नहीं
दिलीप कुमार पाठक देश के प्रत्येक राज्यों की अपनी राजनीति है कहीं मराठी अस्मिता, तो कहीं बिहारी अस्मिता, तो कहीं तमिल अस्मिता तो कहीं भाषायी अस्मिता तो कहीं क्षेत्रवाद हावी…
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