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आलेख
प्रेमचंद को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए अत्यंत उपयोगी पुस्तक : बोल्शेविस्ट प्रेमचंद का संघर्ष
सुरेन्द्र अग्निहोत्री बोल्शेविस्ट प्रेमचंद का संघर्ष वरेण्य साहित्यकार श्री नारायण पाण्डेय द्वारा कथा-शिल्पी, उपन्यास-सम्राट प्रेमचंद पर केंद्रित सत्यान्वेषी समीक्षक के आत्मविश्वास तथा उसके उद्देश्य की सच्चाई से सत्य का अनुसंधान…
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खेल
अभिषेक व सुखजीत की कलाकारी से चीन की मजबूत दीवार तोड़ 7-0 से जीत भारत शीर्ष पर रह फाइनल में
भारत की कोशिश फाइनल भी जीत सीधे विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई करने की सत्येन्द्र पाल सिंह राजगीर (बिहार) : भारत के स्ट्राइकर खासतौर पर अभिषेक और सुखजीत सिंह बदली…
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कारोबार
अर्बन कंपनी लिमिटेड का आईपीओ 10 सितंबर को खुलेगा
मुंबई (अनिल बेदाग): अर्बन कंपनी लिमिटेड (“कंपनी”) बुधवार, 10 सितंबर, 2025 को अपने इक्विटी शेयरों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के संबंध में अपनी बोली/प्रस्ताव खोलेगी। इक्विटी शेयरों का कुल प्रस्ताव…
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राज्य
जिसने अपना माना नईं, उसके नाज़ उठाना नईं : दीक्षित दनकौरी
दीपक कुमार त्यागी दिग्गज कवियों ने काव्यपाठ करके धूमधाम से मनाया देश-दुनिया में प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी जन्मोत्सव नई दिल्ली : प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी के जन्म दिवस पर हिंदी…
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राज्य
हरिद्वार में कैलाशानंदजी महाराज द्वारा ‘एक ईश्वर’ ऐप का शुभारंभ
मुंबई (अनिल बेदाग) : हरिद्वार के सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर , हरिद्वार में 21 वर्षीय युवा उद्यमी समृद्धि बजाज और उनकी माता रश्मि बजाज ने ‘एक ईश्वर’ ऐप का शुभारंभ…
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खेल
ह्युनहोंग किम के दो गोलों से पिछड़ने के बावजूद, मलेशिया ने जीत की उम्मीद कायम रखी
सत्येन्द्र पाल सिंह राजगीर (बिहार) : हयुनहोंग किम के पेनल्टी कॉर्नर पर दो गोल की बदौलत की बदौलत 1-3 से पिछड़ने के बाद मौजूदा और पांच बार के चैपियन ने…
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राज्य
मारवाड़ी समाज ने ट्रेड और कॉमर्स के माध्यम से पूरे देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया : विजयेंद्र गुप्ता
भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था विकसित करने में भी अपना योगदान देवें नीति गोपेन्द्र भट्ट नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजयेंद्र गुप्ता ने कहा है कि…
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आलेख
जीएसटी का नया दौर: कराधान व्यवस्था क्रांति की ओर
ललित गर्ग भारतीय कराधान व्यवस्था में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का आगमन एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम था। इसने अप्रत्यक्ष करों के जटिल और उलझे जाल को जहां सरल…
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आलेख
नेताओं को सब, कर्मचारियों को कब?
“जनता और कर्मचारियों की एक पेंशन ही जीवनभर का सहारा, पर नेताओं के लिए अनेक पेंशन और असीमित सुविधाएँ – यही है लोकतंत्र की असली विसंगति।” डॉ. सत्यवान सौरभ भारत…
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