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आलेख
‘विशिष्ट’ को ‘अपशिष्ट’ प्रमाणित करती एपस्टीन फ़ाइल्स
तनवीर जाफ़री इनदिनों जेफरी एपस्टीन फ़ाइल्स के रहस्योद्घाटनों ने पूरी दुनिया में हलचल मचाकर रख दी है। पिछले दिनों अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा 30 लाख से भी अधिक पृष्ठों की…
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आलेख
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 ज़ारी-भारत की 10 पायदान की छलांग
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं वैश्विक गतिशीलता के इस दौर में पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज़ नहीं,बल्कि किसी राष्ट्र की कूटनीतिक विश्वसनीयता, आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सूचक बन चुका है।वर्ष…
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राज्य
“वी उत्सव” कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक कलाकार ज्योति जोशी की ऐपण कला को सराहा गया
रविवार दिल्ली नेटवर्क देहरादून : भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा आयोजित एक दिवसीय ‘वी उत्सव’ कार्यक्रम में महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेंगलुरु के कोरमंगला इंडोर स्टेडियम…
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सोलर पैनल वेस्ट: भविष्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती
प्रो. आरके जैन “अरिजीत” भारत की सौर ऊर्जा क्रांति आज दुनिया के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन चुकी है। स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत जलवायु परिवर्तन…
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आलेख
इलाज से वंचित गाँव, सुविधाओं से भरा शहर
प्रो. आरके जैन “अरिजीत” भोर की हवा जब गाँव की सूनी गलियों में बहती है, तो वह केवल मिट्टी की गंध नहीं लाती, बल्कि अधूरी साँसों, टूटी उम्मीदों और अनकहे…
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आलेख
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति
ललित गर्ग बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के…
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कोचिंग संस्कृति और बच्चों की मौतें: सफलता के नाम पर असफल समाज
डॉ. प्रियंका सौरभ कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या—यह कोई साधारण खबर नहीं है और न ही किसी एक परिवार की निजी त्रासदी भर। यह उस शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक…
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नवरात्रि की अष्टमी से महाशिवरात्रि तक: जब घर-आंगन में उतरते हैं देवी-देवता
अजय कुमार बियानी भारतीय संस्कृति में पर्व केवल कैलेंडर की तिथियाँ नहीं होते, वे भावनाओं, विश्वास और परंपराओं के जीवंत उत्सव होते हैं। जब कोई शिशु किसी विशेष पर्व पर…
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दाढ़ी पर नहीं, सोच पर बहस ज़रूरी
(फैशन, पहचान और भ्रम: आज के युवाओं के सामने असली चुनौती) डॉ. सत्यवान सौरभ हर दौर की अपनी पहचान होती है। यह पहचान केवल कपड़ों, हेयर-स्टाइल या चेहरे पर उगे…
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नारी ही परिवार की खुशी, राष्ट्र का गौरव और सुख की धुरी है
सुनील कुमार महला स्त्री की गरिमा और उसका सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा रहे हैं। हमारे यहां नारी को शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है तथा…
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